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योगी सरकार ने कोरोना वायरस पर की एक चूक, अब सजा भुगत रही जनता

लखनऊ
पूरे देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश ऐसा दूसरा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा कोरोना वायरस के मामले आ रहे हैं। कोरोना का पहली वेव में जब अस्पतालों की कमी हुई तो बेडों की संख्या बढ़ाई गई। जैसे ही वेव कुछ धीमी पड़ी बेड कम कर दिए गए। थोड़े ही दिनों में बेड इतने कम कर दिए गए कि सेकंड वेव से यूपी में हाहाकार मच गया।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, यूपी में हालात यह हैं कि अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं। मरीजों को भर्ती नहीं मिल रही। घरों में ऑइसोलेट मरीजों को ऑक्सिजन नहीं मिल पा रहा है। यहां तक कि अस्पतालों में ऑक्सिजन के लिए मारामारी है। तमाम मरीजों ने बिना इलाज और ऑक्सिजन दम तोड़ दिया।

आनन-फानन में बढ़ाए बेड, लेकिन…
यूपी में कई मौतों के बाद योगी सरकार ने कोविड इलाज के लिए बेडों की संख्या बढ़ाने के लिए अधिकारियों को आदेश दिया। आनन-फानन में अब बेड बढ़ाए जा रहे हैं। अगर सरकार पहले से सचेत रहती तो शायद इतने मरीजों की जान न जाती।

पहली वेव में थी 1.50 लाख बेड की व्यवस्था

यूपी में कोरोना की पहले वेव के दौरान राज्य में 500 से अधिक अस्पतालों में लगभग 1.5 लाख बेड की व्यवस्था करने का दावा किया गया था। इलाज के लिए व्यवस्था की गई थी और कोविड मैनेजमेंट किया गया था लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ।

यह की गई थी इलाज की व्यवस्था

योगी सरकार ने डेढ़ लाख बेडों के लिए तीन-स्तरीय इलाज का प्रबंध किया था, इसमें 25 एल-3 अस्पताल बनाए गए थे। इन अस्पतालों में वेंटिलेटर, आईसीयू और डायलिसिस समेत सभी आधुनिक सुविधाएं थीं। 400 से अधिक अस्पतालों ने पहली लेयर में रखा गया था। ये एल -1 अस्पताल थे। इन अस्पतालों में कम से कम 48 घंटे ऑक्सिजन की आपूर्ति थी। एल-2 कैटेगरी में 75 अस्पतालों को रखा गया था, जिसमें कई बेड ऑक्सिजन सपोर्ट और वेंटिलेटर वाले थे।

बचे सिर्फ 83 अस्पताल
हालांकि, इस साल 2 फरवरी के बाद से लगातार Covid-19 के मामलों में गिरावट जारी रही। राज्य सरकार ने कोविड अस्पतालों को खत्म कर दिया और वहां सामान्य तरीके से इलाज होने लगा। सरकार की माने तो 83 अस्पतालो में कोरोना इलाज की व्यवस्थाएं जारी रखी गईं। इमें 15 L-3 और 68 L-2 के अस्पताल थे। इन अस्पतालों में कुल 17,235 बेड थे, जिनमें से 7,023 में ऑक्सिजन की व्यवस्था और 1,342 में वेंटिलेटर का प्रबंध था।

कोरोना केस बढ़े तो…
31 मार्च को, जैसे ही मामले फिर से बढ़ने लगे, कोविड रोगियों के इलाज के लिए 45 अस्पतालों को फिर से अधिसूचित किया गया। इससे बिस्तर की कुल ताकत लगभग 25,000 हो गई। उम्मीद थी कि इतने बेड पर्याप्त होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मरीजों की संख्या में इतना उछाल आया कि ये बेड कम पड़ गए।

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