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कानपुर: रहमदिली दिखाकर फंसी लेखपाल, अब होगी तगड़ी जांच!

कानपुर: शादी अनुदान (Marriage Grant) और पारिवारिक लाभ योजना (Parivarik Labh Yojna) के फर्जीवाड़े में कानपुर में कार्रवाई का दौर जारी है. डीएम ने इस प्रकरण में अब तक सदर तहसील के कई लेखपालों को (Lekhpal Suspend) को दोषी पाए जाने पर निलंबित किया है.

यह है पूरा मामला

कानपुर के कल्यानपुर ब्लॉक के गांव नारामऊ होरा बांगर में रहने वाली महिला राम श्री को पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 हजार रुपये की रकम उनके बेटे के मरने पर लेखपाल द्वारा जांच के बाद दिए गए थे. बता दें कि राम श्री के पति एलिम्को में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे. पति की मौत के बाद राम श्री को 1018 रुपये महीने में पेंशन के रूप में मिल रहे हैं, मगर घर की हालात ठीक नहीं है. जांच में इस महिला को पारिवारिक लाभ योजना के तहत अपात्र पाया गया. इसमें लेखपाल प्रीति दीक्षित को दोषी मानते हुए उसके ऊपर जांच बैठा दी गई है और उसे निलंबित कर दिया है.

जब इस मामले को लेकर मीडिया ने महिला के गांव जाकर पड़ताल की और वहां के पूर्व और वर्तमान प्रधान से बात की तो उनका कहना है कि महिला को सरकार द्वारा जो पारिवारिक योजना का लाभ मिला है, वो पूरी तरह से सही है. महिला की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है. जब उसे इसका लाभ दिया गया तब महिला के बेटे की मौत हो चुकी थी. वर्तमान में महिला की तबियत भी सही नहीं रहती है.

लेखपाल का क्या है कहना
इस मामले में जब लेखपाल प्रीति दीक्षित से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पारिवारिक लाभ योजना के तहत एक बुजुर्ग महिला को उनके द्वारा लाभ दिलाया गया था, जो चल तक नहीं सकती है. महिला के बेटे की एक्सीडेंट मे मौत हो गयी थी और पति भी इस दुनिया में नहीं हैं. बुजुर्ग महिला को एलिम्को संस्थान द्वारा 1018 रुपये पेंशन आती है. उसके घर की हालत ठीक नहीं है, इसी के चलते मैंने इस योजना का लाभ उसे दिया था. महिला को योजना का लाभ मिलने की वजह से मुझको निलंबित कर दिया गया है.

पारिवारिक लाभ योजना में पात्रता
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का शुभारम्भ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के द्वारा गरीब परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए किया गया है. इस योजना के अंतर्गत राज्य के किसी परिवार के एक मात्र कमाने वाले मुखिया की मृत्यु हो जाये तो उसे राज्य सरकार द्वारा 30,000 रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी. राज्य के समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदेश में सफलतापूर्वक चलाने की जिम्मेदारी दी गई है.

नियमानुसार परिवार के एक मात्र कमाने वाले मुखिया की मृत्यु हो जाने पर पीड़ित को इस योजना का लाभ दिया जाता है. इस मामले में जिस महिला को योजना का लाभ दिया गया उसके पांच बेटे थे. पति की मौत के बाद उनके एक बेटे की मौत हो गई थी. वर्तमान में उसके चार बेटे हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. जिसके कारण लेखपाल द्वारा योजना का लाभ महिला को दिलाया गया था.

पारिवारिक लाभ योजना में हुआ था फर्जीवाड़ा
दरअसल, उत्तर प्रदेश के कानपुर में शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में घोटाला की खबर सामने आई थी. जिसमें करीब साढ़े छह करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ है. शादी अनुदान योजना के 1079 और पारिवारिक लाभ योजना के 1444 लाभार्थी जांच में फर्जी पाए गए थे. इसका खुलासा 51 अफसरों की बनाई गई जांच कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है. अब फर्जी तरीके से योजनाओं का लाभ पाने वाले इन 2523 लोगों से रिकवरी की योजना है. जांच कमेटी ने सत्यापन करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को अपनी पड़ताल में दोषी पाया है.

जांच अफसरों की कमेटी में खुलासा
51 अफसरों की जांच कमेटी में खुलासा हुआ है कि 1076 शादी अनुदान और 1444 पारिवारिक लाभ योजना में फर्जी लाभार्थी पाए गए हैं. अफसरों और कर्मचारियों ने अपात्रों को पात्र बना दिया. जांच में सामने आया कि बिना शादी हुए ही शादी अनुदान दिया गया. परिवार में किसी की मौत नहीं हुई और बिना मौत के पारिवारिक लाभ मिला. जांच में कई लाभार्थियों के नाम पते भी गलत निकले हैं.

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