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मां से बिछड़ा 20 दिन पहले जन्मा नन्हा शिवा, पी रहा 20 हजार रुपए किलो का दूध

ये नन्हा पैंथर शिवा है। अभी जयपुर के नाहरगढ़ बाॅयोलॉजिकल पार्क में है। 10 दिन से डॉक्टर्स की निगरानी में है। शिवा को अमेरिका का बना हुआ 20 हजार रुपए किलो का पेटलेक किटन मिल्क दिया जा रहा है। साथ ही मल्टीविटामिन व मेडिसिन दी जा रही है। हर दो घंटे में दूध पिलाया जा रहा है। पहले काफी डरा हुआ था, लेकिन अब पूरी तरह से एक्टिव है। वरिष्ठ वन्यजीव डॉक्टर अरविंद माथुर उसकी देखभाल कर रहे हैं। अब वे ही उसकी मां है। उन्होंने बताया कि नन्हे पैंथर शावक को शिवा नाम दिया गया है। जब उसे यहां पर लेकर आए तो काफी कमजोर था। उसे बहुत भूख भी लग रही थी। काफी डरा हुआ था। शुरू में उसे दूध पीने में काफी दिक्कत हो रही थी। तब उन्होंने उसकी भूख मिटाने का रास्ता निकाला। उसे पिंजरे से भी निकाल कर बाहर खुले में भी लेकर जाते हैं। अब पैंथर बाहर निकल कर खेलता है।

पहाड़ी में फॉरेस्ट टीम को अकेला मिला

24 जून को दोपहर करीब 2.30 बजे रायसर रेंज स्थित टोडा मीणा के पास गोल डूंगरी में पहाड़ी मंदिर के पास अकेला मिला था। वन विभाग की टीम ने वहां पगमार्क देखे तो पता लगा वह मां के साथ ही आया था। वहां से मां कहीं चली गई और वह बिछड़ गया। अगले दिन दोपहर तक रेंजर रघुवीर मीणा अपनी टीम के साथ शावक की मां को ढूंढते रहे। वन विभाग की टीम ने वहां पर तीन ट्रिप कैमरे भी लगाए। फिर भी शावक की मां का कुछ पता नहीं लगा। इसके बाद नाहरगढ़ जैविक उद्यान में लेकर आए।

500 ग्राम से एक किलो हुआ वजन

डॉक्टर अरविंद माथुर ने बताया कि शिवा को पिलाने के लिए अमेरिका से बना हुआ 20 हजार रुपए किलो का पेटलेक किटन मिल्क रिप्लेंसमेंट मंगवा कर पिलाया जा रहा है। दिल्ली की एक फर्म ने एजेंसी ले रखी है। जो कि शावक के लिए दूध भिजवा रही है। इससे शिवा के शरीर में ताकत बन रही है। यहां पर 24 घंटे सुरेश और माधव देखभाल कर रहे है। उसे हर दो घंटे में दूध पिलाया जाता है। उन्होंने बताया कि जब उसे नाहरगढ़ बॉयोलाजिकल पार्क में लाया गया था। तब उसकी आंख भी नहीं खुली थी। अब उसका वजन भी 500 ग्राम से बढ़कर एक किलो हो चुका है। उनका कहना है कि उसे तीन महीने यही दूध पिलाया जाएगा। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा खाने के लिए दिया जाएगा। बड़ा होने तक इसे नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में ही रखा जाएगा।

अठखेलियां करने लगा शिवा

शिवा को जब नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में लाया गया था। उसकी आखें भी नहीं खुल रही थी। वह डरता था। अब पूरी तरह से एक्टिव हो गया है। फ्रेंडली माहौल देने के लिए उसे पिंजरे से निकाल कर बाहर रखा जाता है। पिंजरे से बाहर निकलने पर अठखेलियां करता है। बाहर काफी खेलता है और दौड़ता है। हालांकि इंफेक्शन के डर से उसका पूरी तरह से ध्यान रखा जा रहा है।

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