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राजस्थान में कोरोना का कहर : ऑक्सीजन की कमी से जयपुर, बीकानेर, कोटा में 10 मरीजों ने दम तोड़ा

राजस्थान में ऑक्सीजन और बेड की कमी के चलते हालात बेकाबू हो रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी के चलते जयपुर, बीकानेर, कोटा में 10 मरीजों ने दम तोड़ दिया। जयपुर के एक निजी अस्पताल में मंगलवार रात ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने से 4 मरीजों की मौत हो गई। कोटा और बीकानेर में भी ऑक्सीजन के कमी के कारण 6 मरीजों की जान गई।

राज्य में एक सप्ताह के अंदर 1.07 लाख से ज्यादा केस सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 599 लोगों की मौत हुई है। केसों की संख्या तेजी से बढ़ने की वजह से अस्पतालों में बेड की कमी भी बढ़ती जा रही है।

पहली बार 24 घंटे में गई 121 मरीजों की जान
राजस्थान में कोरोना के पिछले 24 घंटे के अंदर 16 हजार 89 केस मिले हैं। पहली बार 121 मरीजों की एक दिन में मौत हुई है। 27 दिनों में कोरोना के 2.13 लाख नए केस मिल चुके हैं। राजधानी जयपुर में रिकॉर्ड 3 हजार 289 संक्रमित मिले और 21 मरीजों की मौत हुई है।

जयपुर में अस्पताल और श्मशान दोनों में वेटिंग
जयपुर के आदर्श नगर श्मशान घाट की स्थिति ये है कि कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार करने के लिए जगह नहीं बची। शव लेकर पहुंची एंबुलेंस को इंतजार करना पड़ रहा है। जयपुर में कोरोना के बढ़ते केसों के कारण सभी अस्पतालों में बेड्स फुल हो गए। प्रदेश के सबसे बड़े कोविड केयर अस्पताल RUHS में मंगलवार को बेड्स उपलब्ध नहीं होने के बाद लोगों रोकने के लिए गेट बंद करना पड़ गया।

लापरवाही ने ली 4 की जान: जयपुर में मंगलवार देर रात किटी कोनिक्स खंडाका अस्पताल में 4 मरीजों ने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में ऑक्सीजन का बैकअप भी था, लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं बदल पाए। घटना के बाद जिम्मेदार अस्पताल छोड़कर भाग गए।

इस बीच, एक राहत पहुंचाने वाली खबर भी है। जयपुर में 500 से ज्यादा बेड्स का कोविड केयर सेंटर शुरू हो गया है। यहां ऐसे मरीजों का इलाज होगा, जिनमें लक्षण कम या हल्के हैं और जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत कम है।

राजस्थान में एक हफ्ते के कोरोना के हालत

उदयपुर ​​​: ऑक्सीजन बेड्स हैं पर ऑक्सीजन नहीं

उदयपुर में अस्पतालों में कुछ बेड्स खाली तो हैं, लेकिन ऑक्सीजन नहीं है। इस कारण गंभीर मरीजों भर्ती नहीं हो पा रहे। पूरे उदयपुर में जितने भी अस्पताल हैं। उनमें मौजूद लगभग 217 वेंटिलेटर फुल हैं। सरकार ने सभी अस्पतालों के फोन नंबर और उनकी बेड्स की रियल टाइम स्थिति जानने के लिए पोर्टल शुरू किया। इस पोर्टल पर बताए नंबरों पर जब लोग फोन कर रहे है तो कोई फोन तक नहीं उठा रहा।

कोटा में स्थिति चिंताजनक, लोगों को बिना इलाज लौटाया जा रहा
कोटा में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहां के सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पताल फुल हो चुके हैं। आलम ये है कि कोई मरीज दिखाने के लिए अगर अस्पतालों में पहुंच रहा है तो उन्हें बिना देखे ही स्टाफ लौटा रहा है। इसके पीछे तर्क बस यही दिया जा रहा है कि अस्पताल में बेड खाली नहीं हैं। आप दूसरी जगह जाएं। कोटा में कल 701 नए पॉजिटिव केस मिले थे, जबकि ऑन रिकॉर्ड 15 लोगों की मौत हो गई।

जोधपुर में मौत के आंकड़े छिपा रही है सरकार

जोधपुर में मंगलवार को रिकॉर्ड 37 संक्रमितों की मौत हो गई। 1 हजार 924 पॉजिटिव आए और 889 मरीज ठीक हुए। अप्रैल के 27 दिन में 26 हजार 231 पॉजिटिव केस आए, जबकि 304 की मौत हो गई। जोधपुर प्रदेश का ऐसा शहर है, जहां कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं। यहां प्रशासन हर रोज मौत के आंकड़े छिपा रहा है। मंगलवार की बात करें तो जोधपुर में प्रशासन ने 22 मौत रिकॉर्ड में दिखाई, जबकि हकीकत में 37 लोगों की कोरोना से जान चली गई।

अजमेर में अस्पतालों की व्यवस्थाएं चरमराईं

अजमेर के JLN अस्पताल में बेड्स फुल हो गए हैं। मरीजों को खुद ही ऑक्सीजन सिलेंडर वार्डों तक पहुंचाने पड़ रहे हैं। अस्पतालों में दवाइयों का स्टॉक भी खत्म हो गया है। लोगों को बाहर से दवाइयां लानी पड़ रही हैं।

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