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रावण ने इंद्रजीत को बताई थी ये बात, सबको हमेशा रखनी चाहिए याद

धर्म से जुड़ी हुई कई प्रकार की कहानियां और किस्से हैं जिसके बारे में आपने बचपन से ही पढ़ते आ रहे हैं, और रावण के बारे में तो आप सभी जानते हैं कि रावण कौन थे और कहां के रहने वाले थे। वो दुराचारी और राक्षसी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे किंतु इस सभी चीजों के बाद भी वह बहुत बड़े विद्वान थे। कहा जाता है कि उनसे बड़ा ज्ञानी कोई भी नहीं था। उन्होंने अपनी भक्ति से ब्रम्हदेव और शंकर जी को प्रसन्न कर कर कई ऐसी सिद्धियां और वरदान प्राप्त किए थे जिस वजह से वह काफी तेजस्वी माने जाते थे। हमारे हिंदू शास्त्रों में भी बताया गया है कि रावण बेशक राक्षस प्रजाति के हो फिर भी उन से बड़ा कोई पंडित आज तक नहीं था।

रावण के कई बेटे थे उनमें से सबसे अत्यधिक प्रिय मेघनाथ याने इंद्रजीत थे। आज हम रावण की कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो उन्होंने इंद्रजीत को बताई थी और कहा था इन तीन चीजों को जीवन भर हमेशा याद रखना। तो आइए पढ़ते हैं वह कौन सी बातें हैं।

युद्ध से पहले इंद्रजीत और रावण के बीच हुई थी यह बातें

आप सभी जानते हैं कि रावण ने सीता का हरण कर लिया था और राम और रावण के बीच युद्ध हुआ था उससे पहले भी छोटे-छोटे बहुत युद्ध हुए थे जिसमें इंद्रजीत लक्ष्मण से युद्ध करने जा रहे थे तब उसका पिता बहुत मुसीबत में था और वो अपने पिता को मुसीबत में छोड़ कर चला गया था। इस प्रकार का अनादर तो कभी भगवान भी नहीं किया करते जो इंद्रजीत ने किया था अपने पिता के साथ।

इस बात को रावण और इंद्रजीत की आखिरी और अंतिम बातचीत माना जाता है जिसमें दोनों ने वार्तालाप के दौरान रावण ने इंद्रजीत को बताया कि इस तरह बिना किसी सबूत के किसी को वरदान प्राप्त नहीं होता है उसी प्रकार यदि आप स्वर्ग की प्राप्ति चाहते हैं तो बिना पिता की सेवा किए आप स्वर्ग की ओर नहीं जा सकते हैं।

रावण ने अपने पुत्र इंद्रजीत से वार्तालाप के समय यह भी बताया कि यदि कोई बेटा अपने बाप के खातिर प्राणों के त्याग भी दे देता है तब भी उसका ऋण नहीं चुका सकता, यह बात जब इंद्रजीत लक्ष्मण से हारकर अपने पिता को अंतिम प्रणाम करने आया था तब उन्होंने कही थी।

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