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रिसर्च : अब बच्चों तक पहुंच रहे FB पर Adult ads, इसे गंभीरता से ले भारत

आज सोशल मीडिया का प्रभाव सभी उम्र के लोगों पर काफी तेज़ी से बढ़ रहा है। बड़ी से बड़ी कम्पनियां हो या सट्टे का प्लेटफार्म सभी अपने Ad के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। अब एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि फेसबुक adults के लिए बने विज्ञापन द्वारा अब बच्चों को टारगेट करने की अनुमति भी दे रहा है। इसका अर्थ यह हुआ कि अब धुम्रपान, शराब और जुआबाजी के विज्ञापन के जरीए बच्चों को भी टारगेट किया जायेगा। Reset Australia नामक संस्था ने एक रिपोर्ट ‘Profiling Children for Advertising: Facebook’s Monetization of Young People’s Personal Data’ जारी की है, जिसमें यह सब बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्रोफाइलिंग के जरीए 13 से 17 वर्ष की आयु के यूजर से एकत्र किए गए व्यक्तिगत डेटा का उपयोग उसी तरह किया जाता है जैसे कि वयस्कों से एकत्र किए गए डेटा का किया जाता है। यानी, उनकी कई श्रेणियों में प्रोफाइलिंग की जा रही है जिससे वे उन विज्ञापनों के निशाने पर आ जाए, लेकिन उनके लिए ये सब असुरक्षित है। रिपोर्ट के अनुसार, कम उम्र के यूजर से इकट्ठें किए गए डेटा का उपयोग हानिकारक या जोखिम वाले विज्ञापन जैसे धूम्रपान, जुआ, शराब या अधिक वजन घटाने वाले युवाओं के साथ प्रोफाइलिंग की जाती है।

Reset Australia के रिसर्च में यह सामने आया कि फेसबुक ने vaping, कॉकटेल, राजनीतिक अतिवाद और QAnon संदर्भ, अत्यधिक वजन घटाने और Adult dating जैसे विज्ञापनों को भी बच्चों को दिखाया। अब यहाँ यह सोचने वाली बात है कि अगर 13 से 17 वर्ष के बच्चों को शराब और डेटिंग के विज्ञापन दिखाए जायेंगे को उनकी मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। हालाँकि, रीसेट ऑस्ट्रेलिया ने यह एक्सपेरिमेंट सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में ही किया था, लेकिन फेसबुक पैसे के लालच के कारण भारत में भी ऐसा करने से नहीं चुकेगा।

रीसेट ऑस्ट्रेलिया के कार्यकारी निदेशक क्रिस कूपर ने बताया कि, “फेसबुक ने संदिग्ध विज्ञापनों को कम उम्र के युवाओं को टारगेट करने की मंजूरी दे दी है, जिसमें कॉकटेल व्यंजनों, जुआ खेल, vaping और अत्यधिक वजन घटाने जैसे विज्ञापन शामिल है।”

उन्होंने सवाल किया कि एक 13 वर्षीय बच्चा जिसने फेसबुक पर अपने status को single बताया है, क्या उसे sugar daddy dating service के विज्ञापन से लक्षित करना उचित है? क्या हम चाहते हैं कि 16 साल के बच्चों को जुए के विज्ञापन दिखाया जाये?

उन्होंने कहा कि, “सोशल मीडिया कभी भी बाल संरक्षण के लिए नहीं बनाया गया था। युवाओं के डेटा को कैसे एकत्र किया जाता है और कैसे उपयोग किया जाता है, इसकी सुरक्षा के लिए हमें कुछ नियमों की आवश्यकता है।“

इससे यह स्पष्ट पता चलता है कि अंडरएज डेटा से फेसबुक कैसे लाभ कमाता है। शायद यही कारण है कि फेसबुक का revenue उम्मीदों से भी हो रहा है। yahoo की रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक ने इस वर्ष के पहली तिमाही में अपने इतिहास की सबसे बड़ी कमाई की है, जिसमें सबसे बड़ा हाथ विज्ञापन सर्विस का ही है। बुधवार को पोस्ट किए गए सोशल मीडिया दिग्गज के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी ने पहली तिमाही में 26.1 बिलियन डॉलर का राजस्व हासिल किया था। फेसबुक को लगभग 23.67 बिलियन डॉलर राजस्व की उम्मीद थी, लेकिन लगभग 3 बिलियन डॉलर की अधिक राजस्व की कमाई हुई।

कंपनी ने अपने विज्ञापन व्यवसाय में वृद्धि को अपने साल-दर-साल के राजस्व में वृद्धि का श्रेय दिया, जिसमें इसकी विज्ञापन में 12 प्रतिशत की वृद्धि और औसत विज्ञापन मूल्य में 30 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। इसका अर्थ यह हुआ कि फेसबुक अपने फायदे के लिए लगातार विज्ञापन बढ़ा रहा है और वो विज्ञापन सिर्फ adults पर ही नहीं बल्कि बच्चों पर भी भी केन्द्रित हैं। चाहे कुछ हो जाये फेसबुक का एक ही मकसद है पैसे कमाना। अब भारत की सरकार को भी फेसबुक के बढ़ते मनमानी से भविष्य में होने वाली परेशानी को ध्यान में रखते हुए नियम बनाने चाहिए जिससे बच्चे इस तरह के कंटेंट या विज्ञापन से प्रभावित न हो।

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