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ओलंपिक 2020ः जो पदक जीत रहे हैं रूसी खिलाड़ी वो रूस के खाते में नहीं जा रहे, क्यों ?

क्या टोक्यो ओलंपिक की पदक तालिका में आपको कहीं रूस नजर आया ? अगर नहीं दिखा तो सवाल है कि क्या रूस इस ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले रहा ? या बड़े खेल आयोजनों में पदकों की झड़ी लगाने वाले रूस के खिलाड़ी पदक नहीं जीत रहे ? ऐसा बिल्कुल नहीं है, रूस के 335 एथलीट इस ओलंपिक में हिस्सा भी ले रहे हैं और पदक भी जीत रहे हैं. गुरुवार तक रूसी खिलाड़ी 7 गोल्ड समेत कुल 26 पदकों के साथ पदक तालिका में 5वें स्थान पर थे. लेकिन पदक तालिका में रूस नहीं बल्कि ROC लिखा है.

ROC यानि रशियन ओलंपिक कमेटी (russian olympic committee), रूस के खिलाड़ी इस ओलंपिक में अपने देश के झंडे के नहीं बल्कि ROC के झंडे के तले खेल रहे हैं. इस दौरान ना तो उनकी जर्सी पर देश का नाम या झंडा है और ना ही पदक जीतने पर उनके देश का झंडा बुलंद हो रहा है. इतना ही नहीं रूसी खिलाड़ियों के पदक जीतने पर रूस का राष्ट्रगान भी नहीं बजता, उसकी जगह प्यानो की एक धुन बजती है.

ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजनों में रूस के खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहता है. टोक्यो से पहले 2016 रियो ओलंपिक्स में रूस के खिलाड़ी 19 गोल्ड मेडल के साथ 56 पदक जीते थे और पदक तालिका में रूस चौथे स्थान पर रहा था. इसी तरह 2012 लंदन ओलंपिक्स में 68 पदकों के साथ चौथे, 2008 बीजिंग में 60 पदकों के साथ तीसरे और साल 2000 के सिडनी ओलंपिक्स में 89 पदकों के साथ रूस दूसरे स्थान पर था. इस बार भी रूस के खिलाड़ी पदक जीत रहे हैं और अंक तालिका में टॉप-5 में बने हुए हैं, लेकिन रूसी खिलाड़ी ये पदक अपने देश के नाम पर नहीं जीत रहे.

दरअसल इसकी वजह है वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) का लगाया गया बैन. World Anti Doping Agency (वाडा) ने साल 2019 में रूस पर टोक्यो ओलंपिक 2020, फीफा वर्ल्डकप 2022 समेत सभी प्रमुख खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर चार साल का बैन लगा दिया था.

रूस पर आरोप लगा था कि वो डोप टेस्ट के लिए खिलाड़ियों के अपने खिलाड़ियों के गलत सैंपल भेज रहा है. जांच के दौरान इसकी पुष्टि हुई कि सैंपल्स से छेड़छाड़ की गई है. जिसके बाद WADA ने रूस पर 4 साल का बैन लगा दिया. रूस पर कई सालों तक इस तरह के डोपिंग कार्यक्रम चलाने का आरोप लगा, जिसपर अंतरराष्ट्रीय महासंघों को प्रतिबंध का फैसला लेना पड़ा.जिसके तहत टोक्यो और फीफा विश्व कप 2022 में रूस हिस्सा नहीं ले सकता है.

डोपिंग में संलिप्त खिलाड़ियों के नाम जानने के लिए मॉस्को की प्रयोगशाला से एथलीटों के डेटा मांगे गए लेकिन उसेक बाद भी रूस पर डेटा में हेरा फेरी के आरोप लगे जिसके बाद वाडा ने बैन का फैसला लिया. डोपिंग से जुड़े खुलासों के बाद रूस की एंटी डोपिंग लैब की मान्यता रद्द कर दी गई. साल 2016 के रियो ओलंपिक में शामिल होने वाले रूसी खिलाड़ियों में से 111 को हटा दिया गया.

हालांकि वाडा के नियमों के मुताबिक जो खिलाड़ी डोपिंग के दोषी नहीं पाए गए उन्हें न्यूट्रल खिलाड़ियों क तौर पर अतंरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई. इसी के तहत रूस के खिलाड़ी टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं.

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