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योगी का ये कैसा नया यूपी?: जिस नाले में बह रहा लाखों घरों का सीवेज, उसमें रोटी के लिए गर्दन तक धंसा बचपन

कानपुर।  बचपन अपना पेट भरने में ही खो जाए तो तकलीफ सरकार और समाज दोनों को होनी चाहिए। कानपुर में किसी नहर की तरह बह रहे रफाका नाला में 5 लाख घरों का सीवर जाता है। बर्रा-4 के पास कुछ बच्चे रोजाना इस नाले में गर्दन तक उतरते हैं। प्लास्टिक और कांच की बोतल, पालिथीन बीनते हैं। इसे वह बेचकर अपना पेट भरते हैं। ये हाल तब है जब सरकार गरीब बच्चों के लिए कई योजनाएं चला रही हैं।

बीमारी और जान का खतरा
रावतपुर से विजय नगर, दादा नगर, गोविंद नगर, बर्रा और तात्याटोपे नगर होते हुए पांडु नदी में गिर रहे नाले का प्रवाह कई जगह तेज रहता है। ये कानपुर के 4 प्रमुख बड़े नाले में शुमार है। नाले में उतरने से कई बीमारियों को खतरा तो रहता ही है। साथ ही प्रवाह ज्यादा होने से जान का खतरा भी रहता है। वहीं, बारिश में नाला प्रवाह काफी तेज रहता है। पास में स्थित शराब के ठेके से फेंकी गई बोतलों को बीनते हैं। नाले के एक तरफ गुजैनी सी-ब्लॉक और बर्रा-7 के पास स्थित बस्ती के बच्चे हैं।

पूरे शहर में बच्चे बीनते हैं कूड़ा
कानपुर में अब भी पूरे शहर में बच्चे कूड़ा बीनने का काम करते हैं। इसमें छोटी लड़कियां भी होती हैं। कूड़े के कंटेनर में उतरकर तो कोई नाले के बीच में उतरकर प्लास्टिक से बनी चीजों को ढूंढते हैं और इन्हें पीठ पर लदी बोरी में डालते जाते हैं। ये काम भी बाल श्रम की श्रेणी में आता है, लेकिन आज तक इस पर किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया।

नाला सफाई की खुल रही पोल
नाला साफ न होने से इस पर बड़ी मात्रा में कूड़ा जमा हो जाता है। इसको बीनने के लिए बच्चे आए दिन नाले में उतरते हैं। बता दें कि मानसून आने से पहले नगर निगम ने करीब 6 करोड़ रुपए खर्चकर नालों की सफाई का दावा किया। लेकिन शहर के बड़े नाले में शुमार रफाका नाला में टनों कूड़ा जमा है। ठेकेदारों ने नाला सफाई के बिल भी लगाना शुरू कर दिए हैं। कागजों में रफाका नाला भी 90 पर्सेंट साफ किया जा चुका है।

गरीब बच्चों के लिए ये योजनाएं बनी मजाक

  • प्रदेश में अनाथ, बेसहारा और गरीब बच्चों के लिए बाल श्रमिक विद्या योजना शुरू की गई है। बालश्रम के चलते स्कूल न पहुंच पाए 18 साल तक के बालकों के लिए हर महीने 1 हजार और बालिकाओं को 12 रुपए महीना दिया जाना है। लेकिन अफसोस इन योजनाओं में बच्चों का चयन नहीं हो सका। ये योजनाओं से अंजान है, लेकिन एक भी अधिकारी इन तक नहीं पहुंच सका।
  • बेसहारा और गरीब बच्चों के लिए अटल आवासीय योजना भी सरकार ने शुरू की है। इसमें पढ़ने वाले बच्चों की मुफ्त भोजन, मुफ्त आवासीय व एजूकेशन की व्यवस्था होगी। जिनकी रूचि पढ़ाई के अलावा स्पोर्ट्स में है, उनके लिए स्पोर्ट्स ट्रेनिंग का इंतजाम किया जाएगा। पढ़ाई और खेल में न रूचि होने पर इन बच्चों के लिए स्किल डेवलपमेंट का इंतजाम किया जाएगा।

क्या बोले जिम्मदार
मामले में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष एएन अग्निहोत्री ने बताया कि जब हमारे पास मामला आता है, तो नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है। बालश्रम कर रहे बच्चों को पकड़ना चाइल्ड लाइन और पुलिस का काम है।

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