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राजस्थान में हल्का पड़ा कोरोना: 16 जिलों में पहली बार शून्य मौत, लेकिन रहें सावधान

जयपुर. राजस्थान में कोरोना महामारी की दूसरी लहर अब हल्की पड़ने लगी है। संक्रमण का प्रकोप पर पिछले कई दिनों से लगातार उतार पर है। यहां करीब दो महीने बाद पहली बार प्रदेश के 16 जिलों में एक भी मौत कोरोना संक्रमण की वजह से नहीं हुई। पूरे प्रदेश की बात करें तो यहां 16 अप्रेल के बाद 5 जून शनिवार को 33 जिलों में सबसे कम 32 मौतें हुई। जबकि कोरोना पीक के वक्त रोजाना राजस्थान में संक्रमण से डेढ़ सौ से ज्यादा मौतें हो रही थी।

चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान में अब तक कोरोना से 8631 लोग दम तोड़ चुके है। प्रदेश में पिछले 66 दिन बाद 1000 से कम कोरोना रोगी मिले। यहां शनिवार को महज 942 पॉजिटिव केस मिले। पिछले 24 घंटे में 53 हजार 944 सैंपल लिए गए थे। इनमें से 942 लोग ही कोरोना पॉजिटिव पाए गए।

राजस्थान में अब कोरोना पॉजिटिव होने की दर 2 फीसदी से कम होकर 1.74 प्रतिशत रह गई है। एक्टिव रोगी भी घटकर 21,550 हो गए है। रिकवरी दर बढ़कर 97 प्रतिशत के पास पहुंच गई है। शनिवार को सिर्फ दो शहरों में 100 से ज्यादा कोरोना मरीज मिले। इनमें जयपुर में 170 और अलवर में 133 पाए गए।

कोरोना कम हुआ तो ब्लैक फंगस के केस बढ़े, 8 दिन में 1600 मामले

प्रदेश में कोरोना संक्रमण कम होने के बाद अब ब्लैक फंगस के मामलों में तेजी आई है। यहां पिछले 8 दिनों में ब्लैक फंगस के 1600 मामले सामने आए है। इसके बाद प्रदेश में इस बीमारी के 2400 मरीज हो गए है। दावा है कि यह देश में सबसे तेजी से बढ़ता आंकड़ा है। यहां तीन गुना रफ्तार से यह बीमारी फैल रही है।

पिछले एक सप्ताह में इतनी तेजी से अन्य किसी भी राज्य में आंकड़े नहीं बढ़े। वहीं, ब्लैक फंगस के लिए देश में सबसे ज्यादा वायल खरीदने वाला राजस्थान पहला राज्य बन गया है। अचानक रोगियों के बढ़ने से दो विशेष विमान भेजकर राजस्थान सरकार ने 5550 वायल मंगवाई। राज्य सरकार ने कुल 60 हजार इंजेक्शन का ऑर्डर किया है।

जयपुर जिले में 2800 टीमें कर रही है डोर टू डोर सर्वे
जयपुर जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जेडीए ने डोर टू डोर सर्वे के लिए 2800 टीमें बनाकर ग्राउंड पर उतारी है। इन टीमों की मॉनिटिरिंग के लिए 52 प्रभारी अधिकारी लगाए है। प्रत्येक टीम रोजाना 30 से 50 घरों का सर्वे कर कोविड लक्षणों वाले लोगों की पहचान कर रही है। इनमें ग्रामीण इलाकों में 1500 और शहरी क्षेत्रों में 1300 टीमें लगा रखी है। इस सर्वे की मॉनिटरिंग के लिए जेडीए में कंट्रोल रुम बनाया गया है। इसके अलावा चार पीएसची और सीएचसी का एक जोन बनाया है।

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