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लॉकडाउन बढ़ाकर नहीं जीत सकते कोरोना से जंग, इन 3 बड़ी चुनौतियों का खोजना होगा तोड़

देशभर में कोरोना वायरस ( coronavirus in india ) के बढ़ते खतरे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश मेंलगे 21 दिन के लॉकडाउन ( Lockdown2 ) को अब 19 दिन और बढ़ा दिया है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या को कैसे रोका जाएगा?

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में लैब से लेकर बेड तक दावे तो कई किए हैं लेकिन जमीनी तौर पर हकीकत कुछ और ही है। कोरोना वायरस से जंग में देश के हेल्थ सेक्टर को फिलहाल कई चुनौतियों का सामना करना है।

1. वैक्सीन में लगने वाला लंबा समय
कोरोना वायरस को मात देने के लिए वैक्सीन मौजूदा समय में दूर की कौड़ी ही लगती है। क्योंकि इस वैक्सीन के तैयार होने में कम से कम 18 महीने का वक्त लगेगा। हालांकि CSIR ने दावा किया है कि वे आने वाले हफ्तों में कुछ क्लीनिकल ट्रायल करेंगे, लेकिन ये कितने कारगर होंगे इसको लेकर कई आशंकाएं हैं।

2. जांच किट की कमी
कोरोना वायरस से जंग में देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है जांट टेस्टिंग किट। फिलहाल देश में टेस्टिंग किट को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वो जमीनी तौर पर नाकाफी नजर आते हैं। देश में जांच किट की कमी महसूस की जा रही है।

ICMR के मुताबिक भारत के पास मौजूदा समय में सिर्फ छह हफ्ते का टेस्ट किट स्टॉक ही बचा है। जबकि देश को 50 लाख किट्स की तत्काल जरूरत है। तभी हर रोज एक लाख जांच संभव है।

ऑर्डर के बाद भी किट भारत की बजाय यूएस पहुंच गई। ऐसे में पीएम मोदी के संबोधन में ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग के लक्ष्य को पूरा करने के लिए फिलहाल जमीनी तौर पर जांच किट का पर्याप्त मात्रा में होना बहुत जरूरी है।

3. डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 49 हजार वेंटिलेटर के ऑर्डर दिए गए हैं। 1.7 करोड़ पीपीई किट मंगाई जा रही है। इसके 20 निर्माता काम कर रहे हैं। डीआरडीओ रोजाना लगभग 20,000 एन99 मास्क बना रहा है। लेकिन जानकारों की मानें तो सिर्फ वेंटिलेटर मंगाने से कोरोना पर काबू नहीं पाया जा सकता है बल्कि इसे चलाने के लिए पर्याप्त डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी चाहिए।

अब यही है उपाय
अब उपाय यही है कि देश में लैब की संख्या बढ़ाई जाए। सभी सरकारी व निजी मेडिकल कालेज व निजी लैब के नेटवर्क को इसमें जोड़ा जाना चाहिए। प्राइमरी हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए।

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