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लॉकडाउन: भारत में 95% बढ़ी पोर्न कंंटेंट की सर्च, गूगल को नोटिस

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गूगल, ट्वीटर और फेसबुक को एक नोटिस भेजा है। नोटिस में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल और पोर्नोग्राफी से जुड़ी सभी शिकायतों की जानकारी मांगी है। गूगल, ट्विटर और फेसबुक से ये जानकारी भी मांगी गयी है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने के लिए लिए वो किस तरह की पॉलिसी का पालन कर रहे हैं? आयोग ने इन कंपनियों के भारतीय प्रबंधन को पत्र लिखकर ये जानकारी मांगने के साथ ही जाँच करने का फ़ैसला लिया है। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड नाम की एक संस्था की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए ये नोटिस भेजा गया है। एक रिसर्च में ये जानकरी सामने आयी है कि लॉकडाउन के दौरान पोर्न वेबसाइट पर 95 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है और दुनिया भर इन एडल्ट्स साइट्स पर सबसे अधिक भारत के लोगों की विज़िट हैं।

एनसीपीसीआर ने अपने बयान को जारी करते हुए कहा है कि चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल की स्वतंत्र जांच में ये सामने आया है कि पोर्नोग्राफी से जुड़ी तमाम सामग्रियां गूगल के प्ले स्टोर से डाउनलोड की जाने वाली ऐप के माध्यम से आसानी से लोगों तक पहुँच रही हैं। साथ ही आयोग ने ये भी कहा है कि इस तरह के चाइल्ड पोर्नोग्राफी के लिंक्स व्हाट्सऐप पर भी लोगों के पास हो सकते हैं। व्हाट्सऐप पर बने ग्रुप्स में भी तेजी से पोर्नोग्राफी की सामग्री लोगों तक पहुँच रही हैं।

कुछ समय पहले इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड ने एक रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि लॉकडाउन के बाद से ऑनलाइन डाटा मॉनिटरिंग वेबसाइट दिखा रही हैं कि ‘चाइल्ड पोर्न, सेक्सी चाइल्ड और टीन सेक्स वीडियो जैसी खोजों की मांग अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। विश्व की सबसे बड़ी साईट पोर्नहब ने अपने डाटा में बताया था कि 24 से 26 मार्च 2020 के बीच भारत में उनका ट्रैफिक 95 प्रतिशत तक बढ़ा है।

आईसीपीएफ ने कहा था कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी एडिक्ट्स को ये सामग्रियां आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। अगर जल्द से जल्द कार्रवाई नहीं की जाएगी तो बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराधों में बेतहाशा वृद्धि देखी जाएगी। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन एजुकेशन की भी डिमांड बढ़ी है जिसकी वजह से बहुत से बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं। बच्चों का शोषण करने वाले लोग भी ऑनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी तक अपनी पहुँच बना चुके हैं, जिसकी वजह से बच्चों के लिए इंटरनेट असुरक्षित होता जा रहा है।

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