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इमरान खान की इस हरकत पर बौखलाया पाकिस्तान, लोग बोले- अब तो शर्म करो!

कोरोना के कहर के चलते पाकिस्तान इन दिनों खाने के संकट से जूझ रहा है, देश के कई हिस्सों में अनाज बस खत्म होने की कगार पर है. ऐसे में पाकिस्तान को जरूरत थी एक मददगार की. जिसके सामने झोली फैलाए और भीख माफ़ कीजिये मदद मिल जाए. ऐसे मुश्किल की घड़े में शायद इमरान खान जनता को कह कर गए होंगे मेरे रहते हुए आपने घबराना नहीं है. मैं जा रहा हूँ तो कुछ तो लेकर आऊंगा, तो बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तीन दिन यानी 7 से 9 मई तक सऊदी अरब की यात्रा पर थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए.

दोस्ती निभाते हुए सऊदी अरब ने आर्थिक हालात से जूझ रहे पाकिस्तान को कई तरह की मदद मुहैया कराने की बात कही है. इसी सिलसिले में सऊदी ने पाकिस्तान को चावल के 19,032 बोरे भी दिए हैं. लेकिन सऊदी से मिली इस जकात को लेकर पाकिस्तान में अब बहस छिड़ गई है और इमरान खान सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए जाने लगे हैं.

सऊदी अरब की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान की तरफ से दिए जाने वाली इस जकात से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह और पंजाब के 1,14,192 लोगों को मदद मिलेगी. सऊदी अरब की ओर से मुहैया कराये गए 440 टन चावल को पंजाब प्रांत के लाहौर, फैसलाबाद, खानेवाल, साहिवाल के अलावा खैबर पख्तूनख्वाह के अन्य जिलों में वितरित किया जाएगा. सऊदी अरब से चावल मिलने का बयान पाकिस्तान की पत्रकार नाइला इनायत ने शेयर किया है.

अब सऊदी अरब तो मदद कर रहा है. लेकिन इस बात को लेकर भी पाकिस्तान में राजनीति गरमा गई है. दरअसल अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने इस मसले पर बिना नाम लिए इमरान खान की सरकार पर निशाना साधा है.

हुसैन हक्कानी ने ट्वीट किया, ‘हाल के दिनों तक चावल के बड़े निर्यातक रहे पाकिस्तान को सऊदी अरब से मदद के तौर पर 19,032 बोरी (440 टन) चावल की जरूरत क्यों पड़ी? सऊदी अरब की उदारता के लिए उसका आभार जताने के साथ-साथ अपने देश की विफलता के लिए आत्ममंथन की भी जरूरत है.

अमेरिका में कनेक्टिकट विश्वविद्यालय में पाकिस्तान की रिसर्च स्कॉलर मारवी सिरमद ने हुसैन हक्कानी के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी. मारवी सिरमद ने लिखा, पंजाब के मध्यम स्तर के किसानों के लिए चावल उगाना बहुत आसान नहीं रह गया है. वहां पानी नहीं है, किसानों को कोई सब्सिडी नहीं मिलती है, बिचौलिये सबसे ज्यादा फायदा उठाते हैं. किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है और अब वे थक चुके हैं.

वहीं पाकिस्तान के मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. कैसर बंगाली ने भी ट्वीट कर इस खबर पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ट्वीट किया, गरीबी घटाने और विकास के नाम पर पिछले चार सालों से अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई और चीन के सामने भीख मांगने के बाद अब पंजाब और खैबर पख्तूनख्वां के जरूरतमंद परिवारों के लिए सऊदी अरब से चावल लेने की नौबत आ गई है. क्या रावलपिंडी-इस्लामाबाद में थोड़ी भी शर्म बची है?

मारवी सिरमद ने कहा कि शुगर इंडस्ट्री के चलते इस इलाके में दूसरी नकदी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं. सरकार ने किसानों को भुगतने के लिए अलग-थलग छोड़ दिया है. सरकार ने हार मान ली है.

कुछ लोगों ने सऊदी के चावल दान में देने पर हैरानी जताई. सलमान रशीद नाम के शख्स ने पूछा कि अच्छा जी! कब से रेगिस्तान ने चावल उगाना शुरू कर दिया गया है?

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