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राहुल गांधी, स्वरा, ओवैसी और ज़ुबैर पर NSA के तहत होगा केस? लोनी विधायक ने पेश किए सबूत

पिछले 3 दिनों से सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक में सबसे ज्यादा किसी खबर ने सुर्खियों में जगह बनाई है तो वह हैं- लोनी कांड। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वामपंथियों और विपक्षी नेताओं द्वारा वायरल किया गया। बता दें कि वीडियो को गलत तथ्यों से जोड़कर, सांप्रदायिक हिंसा और दंगें फैलाने के लिए वायरल किया गया था। ऐसे में लोनी के विधायक ने  वीडियो वायरल करने वाले अराजक तत्वों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले को रासुका कानून के तहत दर्ज कराने की मांग की है।

अगर हम बात करें अराजक तत्वों की तो यह और कोई नहीं बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी है, उनके साथ AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, अभिनेत्री स्वरा भास्कर और ऑल्ट न्यूज़ के कोृफाउंडर जुबैर है। इन सभी ने म्यूट वीडियो को आग की तरह वायरल कर यह अफवाह फैलाई की इस में वीडियो में पीड़ित से जबरन जय श्री राम बुलवाया जा रहा है। यही नहीं इस केस में आरोपी मुस्लिम है पर इन सभी ने उनको हिंदू करार दिया था।

दरअसल, सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके आधार पर आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मुस्लिम व्यक्ति से जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया। गाजियाबाद पुलिस ने पूरे मामले का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जब पुलिस ने जाँच की तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपी परवेश गुज्जर के घर बंधक बनाया गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए। फिर मुस्लिम बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई और वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

ऐसे में लोनी के विधायक नन्द किशोर गुर्जर  ने लोनी बॉर्डर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया है। उन्होंने अपने शिकायत पत्र में लिखा है कि, “श्री राहुल गांधी, एआईएमआईएम अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी और अभिनेत्री स्वरा भास्कर एवं साजिश में शामिल अन्य सभी लोगों पर रासुका के तहत मुक़दमा दर्ज कर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए, जिससे देश की एकता और अखंडता अक्षुण्ण रहे।”

क्या है यह रासुका कानून यानी नेशनल सिक्योरिटी एक्ट?

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित एक कानून है। यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध नागरिक को हिरासत में लेने की शक्ति देता है।

बता दें कि जिस व्यक्ति के ऊपर रासुका कानून लगता है वो उच्च न्यायालय के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है, लेकिन मुकदमे के दौरान वकील को अनुमति नहीं दी जाएगी।

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