वैज्ञानिकों का दावा है कि अब गुदा से सांस लेना संभव

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नई दिल्ली; दुनिया में ऐसी बहुत सी चीजें हो रही हैं जो स्वाभाविक रूप से आश्चर्य का कारण बनती हैं। मनुष्य नाक से सांस लेता है। मुंह से निकलने वाली परेशानी में भी, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई व्यक्ति गुदा से सांस ले सकता है, हां हां… वैज्ञानिकों का दावा है कि जल्द ही आदमी भी गुदा से सांस लेना शुरू कर देगा। इससे मुसीबत में फंसे लोगों की जान बच जाएगी। फिलहाल सुअरों और चूहों पर इसका प्रयोग सफल रहा है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि जल्द ही इंसान अपने शरीर के पिछले हिस्से यानी गुदा के जरिए सांस ले सकेगा। इससे सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत मिलेगी। इस बात को साबित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने सुअरों और चूहों पर प्रयोग किए। कुछ कछुओं पर। प्रयोग पर एक रिपोर्ट हाल ही में क्लिनिकल एंड ट्रांसलेशनल रिसोर्स एंड टेक्नोलॉजी इनसाइट पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग में जानवरों की आंतों को थोड़ा रगड़कर पतला किया। ताकि म्यूकोसल लाइन को पतला किया जा सके। यह रक्त प्रवाह को तेज करता है। रक्त प्रवाह किसी भी तरह से बाधित नहीं होता है। इन जीवों को तब कम ऑक्सीजन वाले कमरे में रखा गया था। कछुओं में पहले से ही पतली श्लेष्मा रेखाओं वाली आंतें होती हैं। इसलिए उन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं हुई। इसलिए वे सर्दियों में भी जीवित रहते हैं।

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जिन जीवों का आंतों का इलाज नहीं हुआ, वे कम ऑक्सीजन वाले कक्ष में केवल 11 मिनट तक जीवित रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इलाज कराने वाले जीव की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है । ऑक्सीजन की कमी वाले कक्ष में रखे गए जानवरों की 11 मिनट बाद मौत हो गई। क्योंकि उनकी आंतों में कोई इलाज नहीं था। लेकिन जिन जानवरों की आंतों का इलाज किया गया, वे करीब 18 मिनट तक जीवित रहे। यानी वह अपने शरीर के पिछले हिस्से से सांस ले रहा था।

इस तकनीक की मदद से आपात स्थिति में मरीजों को बचाने के लिए
यह प्रयोग एक घंटे तक चला । जानवरों की आंतों का इलाज किया गया। उसके गुदा में दबाव ऑक्सीजन दिया गया था। फिर 75 प्रतिशत जानवर एक घंटे तक जीवित रहे। इससे पता चला कि चूहे और सूअर कम ऑक्सीजन की स्थिति में अपने गुदा से सांस लेने में सक्षम थे। इस प्रयोग की सफलता के बाद अब वैज्ञानिक कहते हैं कि हम सब मरने के लिए पैदा हुए हैं। इसलिए बुरे समय में हम अपने गुदाद्वार से सांस लेकर अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं।

मानव परीक्षण अभी नहीं, भविष्य में संभव!
हालांकि, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि किसी को भी इसे खुद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। वैज्ञानिक इससे आसान उपाय ढूंढ रहे हैं ताकि कम ऑक्सीजन की समस्या से कोई परेशान न हो। अभी तक इस चीज का इंसानों पर परीक्षण नहीं किया गया है। साथ ही मानव परीक्षण को लेकर कोई योजना नहीं चल रही है। भविष्य में ऐसा होने पर लोगों को सूचित किया जाएगा।