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बड़ी खबर: वैक्सीन की कीमत दो गुना बढ़ाया सीरम, सरकार का बढ़ेगा खर्च!

नई दिल्ली :  सरकार को पोलियो वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम के लिए अपना खर्च काफी ज्‍यादा बढ़ाना पड़ सकता है। इसके लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) से वैक्‍सीन की डोज खरीदी जानी हैं। हालांकि, उसने हर खुराक के लिए जो कीमत बताई है, वह पिछली खरीदारी दर की तुलना में दोगुने से भी ज्‍यादा है। यह और बात है कि पुणे की यह कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाले के रूप में सामने आई है।

इसके मद्देनजर एक सरकारी खरीद समिति ने कंपनी के साथ कीमत को लेकर बातचीत करने का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से अनुरोध करने का फैसला किया है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि एसआईआई ने 180 लाख डोज की सप्‍लाई के लिए टीके की प्रति खुराक 188 रुपये कीमत बताई है। इसमें टैक्‍स शामिल नहीं है। यह कीमत में 106.65 फीसदी की बढ़ोतरी है।

उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 2021-22 के लिए आईपीवी (इनैक्टिवेटेड पोलियो वैक्‍सीन) की 180 लाख खुराक खरीदने के लिए 28 मई, 31 मई और एक जून को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) की अध्यक्षता में एकीकृत खरीद समिति (आईपीसी) की बैठक हुई थी।

कीमत बहुत ज्‍यादा

आईपीसी ने पाया कि एसआईआई की ओर से कोट सबसे कम कीमत पिछले बार की कीमत से बहुत अधिक है। पिछली बार टीके 91 रुपये प्रति खुराक की कीमत पर खरीदे गए थे। इसमें टैक्‍स शामिल नहीं था। आईपीसी ने कंपनी के साथ बातचीत करने की सलाह दी।

आईपीसी की बैठक 31 मई को फिर से बुलाई गई और समिति ने एसआईआई के प्रतिनिधि से मूल्य वृद्धि का औचित्य पूछा।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, ‘कंपनी के प्रतिनिधि ने सूचित किया कि उन्होंने आईपीवी टेंडर में पहली बार भाग लिया है। उन्होंने पहले ही प्रति खुराक 188 रुपये और टैक्‍स की सबसे कम संभावित कीमत कोट की है। यह यूनिसेफ की कीमत से कम है।’

दाम कम करने को तैयार नहीं कंपनी
आईपीसी ने कंपनी से कोट की गई कीमत की फिर से समीक्षा करने को कहा। इसके बाद एसआईआई में सरकार और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से 31 मई को कहा कि वे उद्धृत कीमत को कम नहीं कर पाएंगे। उन्होंने मंत्रालय से जल्द से जल्द ऑर्डर देने का अनुरोध किया, ताकि वे इन्हें मुहैया कराने संबंधी योजना बना सके।

आईपीसी की अगली बैठक एक जून को हुई। सूत्र ने कहा, ‘आईपीसी ने पाया कि कंपनी उद्धृत यानी कोट की गई कीमत कम करने पर राजी नहीं हुई है। उन्होंने कहा, ‘आईपीसी ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पाया कि 106.65 फीसदी की बढ़ोतरी बहुत अधिक है और उसने इस टीके की जरूरत को समझते हुए स्वास्थ्य मंत्री से यह अनुरोध करने का फैसला किया कि वह उच्च स्तर पर कंपनी के साथ बातचीत करें।’

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