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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बालिग पत्नी के साथ नहीं रह सकता नाबालिग पति

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर पति नाबालिग है तो वो बालिग पत्नी के साथ नहीं रह सकता। नाबालिग पति को उसकी बालिग पत्नी को सौंपना पाक्सो एक्ट के तहत अपराध है। इसी के साथ कोर्ट ने नाबालिग पति को सरकारी आश्रय स्थल में रखने का दिया आदेश है। जस्टिस जेजे मुनीर की एकल पीठ ने सोमवार को यह आदेश दिया।

मां चाह रही थी बेटे की कस्टडी, बेटे ने किया इनकार

दरअसल, लड़के की मां आजमगढ़ की हौशिला देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने अपने नाबालिग बेटे की कस्टडी की मांग की थी। इस मामले में पेंच यह था कि बेटा अपनी मां के साथ नहीं रहना चाह रहा था और मां उसकी उसे अपने साथ रखना चाह रही थी। उसकी उम्र अभी 16 साल ही है। जब बेटा अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहता तो हाईकोर्ट ने उसकी अभिरक्षा मां को भी नहीं दी।

कोर्ट ने बेटे को उसके बालिग (4 फरवरी 22) बालिग होने तक जिला प्रशासन को उसे सारी सुविधाओं के साथ आश्रय स्थल में रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बालिग होने के बाद वह अपनी मर्जी से कहीं भी किसी के साथ जाने के लिए स्वतंत्र होगा।

दो बालिगों को साथ रहने का अधिकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो दिन पहले भी ऐसे ही एक महत्वपूर्ण आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि धर्म परिवर्तन करके शादी करने वाले बालिगों को सुरक्षा प्रदान करने में धर्मांतरण महत्वपूर्ण तथ्य नहीं है। यदि धर्मांतरण जबरन कराने का आरोप नहीं है तो ऐसे कपल को सुरक्षा मुहैया कराना पुलिस व प्रशासन की बाध्यता है। कोर्ट ने कहा था कि यद‌ि दो बालिग अपनी मर्जी से शादी कर रहे हैं, तब भी उन्हें साथ रहने का अधिकार है। भले ही उनके पास विवाह का प्रमाण नहीं है।

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