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शॉर्ट हुईं शादी की रस्में : सामूहिक विवाह समारोह में बोले पंडित- समझ नहीं आ रहा कि कौन सा मंत्र छोड़ें

जयपुर. बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच सरकार ने शादी समारोह के लिए भी गाइडलाइन जारी कर दी है। सरकारी नियमों का ख्याल रखकर होने वाली शादियां अब औपचारिकता बनकर रह जा रही हैं। यह बात शादी कराने वाले पंडित भी मान रहे हैं। न ही मंत्र पूरे पढ़े जा रहे हैं, न ही सारी रस्में ही पूरी हो पा रही हैं। पंडित भी दुविधा में कि कौन सा मंत्र पढ़ें, कौन सा छोड़ें। रविवार को हुई एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

राधा विहार स्थित श्रीराधाजी झटपट बालाजी मंदिर में परमार्थ एवं आध्यात्मिक सेवा समिति की ओर से 13 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया गया। नई गाइडलाइन और कोराेना के बढ़ते प्रकोप के चलते विवाह समारोह को 2 भागों में बांटा गया था। एक परिवार से केवल 5 लोगों के शामिल होने की अनुमति थी। इससे सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर अन्य नियमों का पालन आसानी से कर लिया गया।

पंडितों को आई दिक्कत

जब बात मंत्र और रस्मों की आई तो पंडित परेशान हो गए। आगुणी कराएं या छोड़ दें। फेरे से पहले के पूरे मंत्र पढ़ें या आगे बढ़ जाएं। वजह यह है कि फेरों को अगर विधि-विधान से कराया जाए तो कई घंटे लग जाते हैं। अगर एक ही रस्म में ज्यादा समय लगा देंगे, तो बाकी का क्या होगा। यानी फेर पट्‌टा, विदा आदि की रस्में। एक पंडित का कहना था, रस्में शॉर्ट कराने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है। केवल फेरों के जरूरी मंत्रों को पढ़कर विवाह संपन्न करा रहे हैं। बाकी काम वे विदा के बाद घर पर कर लेंगे।

हालांकि अब तक सरकार की ओर से भी स्पष्ट नहीं किया जा सका है कि विवाह की रस्मों के लिए कितना समय मिल रहा है। कहा जा रहा है कि गृह विभाग ने अपनी गाइडलाइन में विवाह की रस्मों के लिए नहीं बल्कि भोजन आदि के समय को सीमा में बांधा है। यह बात दीगर है कि ऐसी बात गाइडलाइन में स्पष्ट तौर पर नहीं लिखी गई है।

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