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सावधान : कातिल कोरोना हुआ और खतरनाक, अब कर रहा सीक्रेट अटैक

कोरोना वायरस पूरी दुनिया में कहर मचा रहा है. वो लगातार लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है वो भी अलग-अलग तरीके से, नए तरीके से, एसिम्प्टोमैटिक मरीजों के रूप में. आम कोरोना मरीजों से एसिम्प्टोमैटिक मरीज बिल्कुल अलग होते हैं क्योंकि उनमें सर्दी-खांसी या बुखार जैसा कोई भी लक्षण नहीं होता. हां कुछ केसेस में ये जरूर पाया गया है कि ऐसे मरीजों की सूंघने या स्वाद की क्षमता काफी कम हो जाती है. पर कई बार इसके बारे में खुद मरीज को भी नहीं पता होता. इसलिए एसिम्पमैटिक मरीजों के बारे में पता लगा पाना काफी मुश्किल होता है.

ऐसे मरीजों के बारे में सबसे पहली विस्तृत जांच रिपोर्ट चीन में प्रकाशित हुई है.15 अप्रैल को चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन की रिपोर्ट आई थी. 6764 एसिम्प्टोमैटिक मरीजों की जांच पर आधारित रिपोर्ट तैयार की गई थी. इनमें सिर्फ 1297 मरीजों में ही बाद में बीमारी के लक्षण दिखे. यानी कोरोना पॉजिटिव मरीजों में सिर्फ 20 फीसदी मरीजों में ही बाद में बीमारी का लक्षण दिखा, बाकी मरीजों में ऐसा कोई लक्षण नजर नहीं आया.

चीन में कोरोना के संक्रमण पर करीब-करीब अंकुश लगा लेने के दावे के बाद ऐसे एसिम्प्टोमैटिक मरीजों की संख्या ने वहां की सरकार को सकते में डाल दिया है. क्योंकि विशेषज्ञों का दावा है कि ऐसे मरीज दूसरे मरीजों के मुकाबले कहीं तेजी से वायरस का संक्रमण फैला सकते हैं. इसी खतरे को देखते हुए चीन सरकार ने एसिम्प्टोमैटिक मरीजों का रैंडम टेस्ट किया था.

टेस्ट के लिए वुहान में 11 हजार लोगों को चुना गया. इनमें 100 अलग अलग शहरों से आए लोग शामिल थे. टेस्ट रिपोर्ट में 6774 मरीज कोरोना पॉजिटिव निकले. ऐसा माना जा रहा है कि ऐसे एसिम्प्टोमैटिक मरीजों की संख्या कई गुना ज्यादा हो सकती है. और खास बात ये कि ये मरीज सिर्फ बुजुर्ग हों ये जरूरी नहीं.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट की मानें तो चीन में कोरोना वायरस से संक्रमित करीब 86 फीसदी मरीज ऐसे थे जो कभी बीमार नहीं पड़े थे. जाहिर है चीन के बाद अब भारत में भी एसिम्प्टोमैटिक मरीजों की बढ़ती संख्या बड़ी चुनौती बन गई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कह चुका है कि एसिम्प्टोमैटिक मरीज कोरोना वायरस का संक्रमण काफी तेजी से फैला सकते हैं. और इसके कई उदाहरण भी सामने आ चुके हैं. ब्रिटेन के डायमंड प्रिंसेस क्रूज शिप में हुए कोरोना वायरस का संक्रमण याद ही होगा.

डायमंड प्रिंसेस क्रूज में 104 लोग संक्रमित हुए थे. मरीजों को जापान के अस्पताल में भर्ती किया गया.10 दिन तक सभी मरीजों की निगरानी की गई. उनमें से 33 मरीजों में कोई लक्षण नहीं दिखा. 33 मरीजों में कोरोना वायरस तो मौजूद था पर उनमें इस बीमारी का कोई लक्षण नहीं दिखा

कहने का मतलब ये कि इन 33 मरीजों में कोरोना वायरस तो मौजूद था पर उनमें इस बीमारी का कोई लक्षण नहीं दिखा. यानी करीब एक तिहाई मरीज ऐसे थे जिनमें कोरोना वायरस होते हुए भी वो बीमार या अस्वस्थ नहीं थे. पर दूसरे लोगों को आसानी से संक्रमित कर सकते हैं. ऐसे में भारत जैसे देश में जहां टेस्टिंग की रेट अभी काफी कम है. वहां चुनौती वाकई बड़ी है.

अमेरिका और यूरोप के कोरोना प्रभावित कई देशों में जहां प्रत्येक दस लाख की आबादी पर करीब दस से बीस हजार लोगों को टेस्ट किया जा रहा है वहीं भारत में अभी भी ये दर 300 से भी कम है. अब सवाल है कि ये कमी कैसे दूर होगी.

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