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29 राज्यों का विश्लेषण: टीका लगवाने में महिलाएं पिछड़ीं, सिर्फ 2 राज्यों में आगे

देशभर में वैक्सीनेशन को लेकर बहस छिड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने इस साल के अंत तक सभी को वैक्सीन लगाने का टारगेट रखा है। सरकारी वेबसाइट www.cowin.gov.in पर 8 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक 23.4 करोड़ लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। इसमें से 18.9 करोड़ को पहली डोज और 4.54 करोड़ लोगों को दूसरी डोज लग चुकी है।

अगर आंकड़ों को तोड़कर देखा जाए तो पुरुषों के मुकाबले इस अभियान में महिलाएं पीछे दिखाई देती हैं। कोविन पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के मुताबिक 10.26 करोड़ पुरुषों को पहली डोज लग चुकी है, जबकि इसके मुकाबले 8.73 करोड़ महिलाओं को ही पहली डोज लगी है। यानी फासला करीब 1.5 करोड़ का है।

हालांकि वेबसाइट पर इस बारे में स्थिति साफ नहीं है कि दूसरी डोज कितने पुरुषों या महिलाओं को लगी है। साथ ही अलग-अलग उम्र के हिसाब से कितनी महिलाओं या पुरुषों को वैक्सीन लगी है, यह भी साफ नहीं है। सरकार ने ओवरऑल आंकड़ा ही जारी किया है।

केरल और छत्तीसगढ़ में महिलाएं पुरुषों से आगे
जिन राज्यों में महिलाओं के वैक्सीनेशन की स्थिति अच्छी रही है, उनमें केरल और छत्तीसगढ़ टॉप पर हैं। यहां महिलाएं वैक्सीनेशन के मामले में पुरुषों से आगे हैं। केरल में 52.1% महिलाओं ने पहली डोज ली है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 51% है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, गोवा और हरियाणा में भी महिलाओं के वैक्सीनेशन का स्ट्राइक रेट बेहतर रहा है। वहीं अगर नंबर्स की बात करें तो महाराष्ट्र में 91.38 लाख और और UP में 74.45 लाख महिलाओं ने वैक्सीन की पहली डोज ली है। जो बाकी राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा है।

क्या जेंडर गैप के पीछे स्मार्टफोन और इंटरनेट वजह है?
देशभर में ज्यादातर जगहों पर वैक्सीनेशन कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन के जरिए हो रहा है। ऐसे में इसके लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन का होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में भी यह मसला उठा था। GSMA मोबाइल जेंडर गैप रिपोर्ट-2020 के मुताबिक भारत में महज 14% महिलाओं के पास स्मार्टफोन है। जबकि 6% के पास फीचर फोन और 31% के पास बेसिक फोन है। जबकि इसके मुकाबले 37% पुरुषों के पास स्मार्टफोन की उपलब्धता है।

अगर इंटरनेट की बात करें तो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे NFHS की दिसंबर 2020 के रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 10 में से सिर्फ 4 महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं। वहीं ग्रामीण इलाके में यह स्थिति और चिंताजनक है, वहां 10 में से 3 महिलाएं ही इंटरनेट एक्सेस कर पाती हैं। देश में अभी तक केवल 42.6% महिलाओं ने ही इंटरनेट का इस्तेमाल किया है, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 62.16% का है।

हालांकि सिक्किम, गोवा और मिजोरम में बाकी राज्यों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन, वैक्सीनेशन के मामले में उनका प्रदर्शन उसके मुताबिक नहीं रहा है। गोवा में 48.8%, मिजोरम में 48.4% और सिक्किम में 46.2% महिलाओं ने वैक्सीन लगवाई हैं।

महिलाओं का घरों से नहीं निकलना भी वैक्सीनेशन में पिछड़ने का कारण हो सकता है

ट्रैवल के लिए महिलाएं पुरुषों पर निर्भर हैं। खास कर ग्रामीण इलाकों में। ऐसे में महिला को वैक्सीन केंद्र तक लाने के लिए पुरुष की जरूरत होती है। महिलाएं अकेले वैक्सीन लगवाने के लिए सेंटर तक आएं इसकी भी बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं है। अब तक वैक्सीनेशन सेंटर्स का जो आंखों देखा हाल रहा है, उसमें भी यह चीज देखने को मिली है। कई ऐसी महिलाएं हैं जिनके पति या बेटे बाहर रहते हैं, इसलिए अभी तक वो उनके आने का इंतजार कर रही हैं।

जागरूकता की कमी और वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स भी वजह है
वैक्सीन लगाने को लेकर महिलाओं में जागरूकता की कमी है। खास कर गांवों में या कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के बीच। मीडिया रिपोर्ट्स में इस तरह की चीजें भी देखने को मिली हैं। सोशल मीडिया पर भी जमकर अफवाहें फैलाई गई हैं। इसके साथ ही वैक्सीन लगवाने के बाद फीवर और बॉडी पेन होना भी एक वजह है, जिससे महिलाएं आगे नहीं आ रही हैं। उन्हें लगता है कि अगर वे बीमार हो गईं तो घर का काम कौन करेगा, खाना कौन पकाएगा? गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं वैक्सिनेशन के लिए आगे नहीं आ रही हैं। यह भी एक वजह हो सकती है जिससे महिलाएं पिछड़ी हैं।

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