Saturday , October 16 2021
Breaking News
Home / खबर / कोवैक्सीन, कोविशील्ड या स्पूतनिक.. भारत में लग रही कौन सी वैक्सीन है सबसे असरदार?

कोवैक्सीन, कोविशील्ड या स्पूतनिक.. भारत में लग रही कौन सी वैक्सीन है सबसे असरदार?

नई दिल्ली :  हाल ही में हुई एक स्टडी में दावा किया गया है कि कोरोना की वैक्सीन कोवैक्सीन के मुकाबले कोविशील्ड से शरीर में ज्यादा एंटीबॉडी बन रही हैं। इसका यह भी मतलब निकाला जा रहा है कि कोवैक्सीन के मुकाबले कोविशील्ड ज्यादा असरदार है। देश में अभी इन दोनों के अलावा रूसी कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-V का इस्तेमाल हो रहा है। कुछ लोगों के जेहन में यह भी सवाल होगा कि इन तीनों में कौन बेहतर है, कौन ज्यादा असरदार है और कौन सी वैक्सीन लगवाना ठीक है। अगर आपके मन में भी यह सवाल है तो एम्स डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने इसका जवाब दिया है।

एम्स डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कोरोना के टीकों की अलग-अलग क्षमताओं के बारे में अफवाहों के बीच कहा कि अब तक उपलब्ध आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि सभी टीके, चाहे कोवैक्सीन हो, कोविशील्ड या स्पुतनिक वी की प्रभावशीलता कमोबेश बराबर है। भारत में उपलब्ध ये टीके एंटीबॉडी के उत्पादन या उच्च सेरोपॉजिटीविटी दर के संदर्भ में बराबर असरदार हैं। गुलेरिया ने कोविड-19 के संबंध में लोगों की तमाम शंकाओं का समाधान करते हुए कहा, ‘हमें यह नहीं कहना चाहिए कि यह टीका या वह टीका, जो भी टीका आपके क्षेत्र में उपलब्ध है, कृपया आगे बढ़ें और अपना टीकाकरण कराएं ताकि आप और आपका परिवार सुरक्षित रहे।’

गुलेरिया ने टीकाकरण के बाद पर्याप्त एंटीबॉडी के बारे में आमतौर पर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि हमें केवल एंटीबॉडी की मात्रा के आधार पर टीकों की प्रभावशीलता का फैसला नहीं करना चाहिए। एम्स निदेशक ने कहा कि टीके कई तरह की सुरक्षा देते हैं, जैसे एंटीबॉडी, सेल-मध्यस्थता प्रतिरक्षा और मेमोरी सेल (जो हमारे संक्रमित होने पर अधिक एंटीबॉडी उत्पन्न करते हैं)। गुलेरिया ने कहा, अब तक जो असर को लेकर नतीजे आए हैं, वे परीक्षण अध्ययनों पर आधारित हैं, जहां प्रत्येक परीक्षण का अध्ययन डिजाइन कुछ अलग है।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी.के. पॉल ने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ लोग टीकाकरण के बाद एंटीबॉडी परीक्षण कराने के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन साधारण तथ्य के लिए ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है कि अकेले एंटीबॉडी किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा का संकेत नहीं देते हैं। उन्होंने कहा, ‘ऐसा टी-कोशिकाओं या स्मृति कोशिकाओं के कारण होता है, जब हम टीका प्राप्त करते हैं तो ये कुछ बदलावों से गुजरते हैं, वे मजबूत हो जाते हैं और प्रतिरोध शक्ति प्राप्त करते हैं। और टी-कोशिकाओं का पता एंटीबॉडी टेस्ट से नहीं लगाया जाता है, क्योंकि ये अस्थि मज्जा में पाए जाते हैं।’

पॉल ने कहा, ‘इसलिए, हमारी अपील है कि टीकाकरण से पहले या बाद में एंटीबॉडी परीक्षण करने की प्रवृत्ति में न पड़ें, वैक्सीन लें, जो उपलब्ध है, दोनों खुराक सही समय पर लें और कोविड व्यवहार का पालन करें।’ उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को यह गलत धारणा नहीं बनानी चाहिए कि अगर उन्हें कोविड-19 हुआ है तो वैक्सीन की जरूरत नहीं है। इस समय, विशेष रूप से तीन कोविड टीके, जिनमें रूस का कोविड-19 वैक्सीन स्पुतनिक वी शामिल है। यह भारत में पहला विदेशी टीका है, जिसे मंजूरी दी गई है। अन्य दो सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोविशील्ड और भारत बायोटेक के कोवैक्सीन हैं, जिन्हें इस साल प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीडीआई) की मंजूरी मिली। इसके बाद यहां 16 जनवरी से दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई।

 

loading...

Check Also

खूबसूरत जेलीफिश को देखने नजदीक जाना पड़ेगा महंगा, 160 फीट लंबी मूछों में भरा है जहर

लंदन (ईएमएस)। पुर्तगाली मैन ओवर नाम की जेलीफिश आजकल ब्रिटेन के समुद्र किनारे आतंक मचा ...