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क्या आपको चाहिए इतिहास में बदलाव? सुनहरा अवसर दे रही है सरकार!

अक्सर हमें भारतीय इतिहास से शिकायत रही हैं कि ये सही नहीं रहा है। अक्सर हमें समस्या रही है कि हमारे इतिहास में हमारे नायकों को उचित स्थान नहीं दिया गया है, और जो इतिहास में एक पन्ने के योग्य भी नहीं, उनकी जमकर तारीफ की गई है। परंतु अब इसमें सुधार करने की एक अनूठी पहल केंद्र सरकार ने की है, जिसमें जनता भी बराबर की सहभागी होगी। जी हाँ, जनता के सहयोग से अब इतिहास में देश के नायकों को उनका उचित स्थान वापिस देने का उचित अवसर आ चुका है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से एक विज्ञप्ति सामने आई है, जिसने इसी ओर इशारा किया है।

केंद्र सरकार की शैक्षणिक, महिला, बाल विकास, युवा एवं खेल संबंधित संसदीय स्टैन्डिंग कमेटी ने हाल ही में विज्ञप्ति जारी की है, जिसमें ईमेल के जरिए स्कूली स्तर पर इतिहास के पुस्तकों में बदलाव करने पर ध्यान देने की बात की गई है। इसके लिए अंतिम सीमा 15 जुलाई है। इस नीति के अनुसार इन बातों पर प्रमुख तौर से ध्यान दिया जाएगा कि कैसे भारतीय नायकों के बारे में ऐतिहासिक पुस्तकों में से भ्रामक कंटेट को हटाया जाए, और उन्हें उनका उचित सम्मान दिया जाए। चाहे वो मराठा नायकों के बारे में कहा गया असत्य हो, या फिर सनातनी क्रांतिकारियों को भारतीय इतिहास में स्थान न मिलना हो, ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनपर अब मंथन किया जा सकेगा।

इसके साथ ही भारतीय इतिहास के सभी कालों का समानुपातिक संदर्भ सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जायेगा। भारतीय इतिहास के बारे में सभी कालखंडों के बारे में उचित और सही बातें समाहित करने पर भी जोर दिया जा सकेगा। यही नहीं, गार्गी और मैत्रेयी से लेकर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई, चाँद बीबी, रानी चिनम्मा जैसी वीरांगनाओं के बारे में उचित वर्णन भी किया जाएगा।

ये केंद्र सरकार द्वारा भारतीय इतिहास के वास्तविक नायकों को उनका उचित मान सम्मान और उनका गौरव देने की दिशा में एक अहम कदम भी है। साथ ही साथ जिस प्रकार से मार्क्सवादियों ने देश के इतिहास को क्षति पहुंचाई है, उस पर भी मरहम लगाने का यह सधा हुआ प्रयास है।

बता दें कि बच्चों के कोर्सबुक से लेकर एनसीईआरटी की पुस्तकों तक ऐसे ना जाने कितने उदाहरण हैं, जहां पर देश के बच्चों को इतिहास के नाम पर भ्रामक तथ्य, और कभी कभी तो सफेद झूठ तक पढ़ाया गया है।  जो तुगलक कभी मेवाड़ या विजयनगर जैसे साम्राज्यों से नहीं जीत पाया, उसे इतिहासकारों ने एक अनोखे और प्रतापी शासक के तौर पर दिखाने का जबरदस्ती प्रयास किया गया।

एक समय तो रोमिला थापर और बिपन चंद्रा जैसे इतिहासकारों पर प्रश्न उठाना अपराध माना जाता था। इनकी कही बात मानो पत्थर की लकीर थी, और कुछ वामपंथियों के लिए तो आज भी है। कुछ ही महीनों पहले जब शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया था कि किस प्रकार से नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय इतिहास के गौरवशाली क्षणों को उनका उचित स्थान दिया जाएगा, तो अधिकतर लोगों ने इसे हंसी में उड़ा दिया था।

लेकिन अब हमारे पास एक सुनहरा अवसर है कि हम केंद्र सरकार की रणनीति को मजबूत कर पूर्व में हुई गलतियों को सुधार करें और एक नए, एवं सशक्त इतिहास का निर्माण कर करें।

सुप्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्म ब्रेवहार्ट फिल्म का एक संवाद है, इतिहास अक्सर उन्होंने ही लिखा है, जिन्होंने नायकों की बलि चढ़ाई है। परंतु अब समय आ चुका है कि इस धारणा को झुठलाया जाए और हमारे असली नायकों को उनका खोया गौरव पुनः प्रदान किया जा सके।

हम आशा करते हैं कि केंद्र सरकार की इस अनूठी रणनीति का लाभ अधिक से अधिक लोग उठाएँ, ताकि लोग देश के असली नायकों से परिचित हों और भारतीय इतिहास की नींव अधिक मजबूत हो सके।

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