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कोरोना से जंग के बीच ऐसे फैसले लिए CM योगी, ताकि सुरक्षित रहे भारत का ‘भविष्य’

 लखनऊ :  उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी से लड़ने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री की ओर से लिए जा रहे फैसलों की तारीफ आज पूरे देश में हो रही है। महामारी से अभी तक लड़ी जा रही जंग के बीच लिए गए फैसलों की बात करें या भविष्य में आने वाली कोरोना की तीसरी लहर के लिए हो रही तैयारियों की बात करें, इन सभी फैसलों और योजनाओं में प्रदेश के बच्चों के लिए सीएम योगी का एक अलग ही प्रेम भाव निकल कर सामने आया है। एक ओर जहां बच्चों को भविष्य में कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए पीकू वार्ड बनाए जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर सीएम योगी ने इस महामारी में अनाथ हुए बच्चों की जिम्मेदारियां अपने सिर उठाने का ऐलान भी कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सूबे के आलाअफसरों के लिए दिख रहा रवैया जितना सख्त होता है, उससे कई गुना अधिक नरम स्वभाव मासूम बच्चों के लिए भी होता है। सीएम योगी और बच्चों के बीच इस रिश्ते की कहानी कोई नई नहीं है। इसका जीता-जागता उदाहरण कुछ साल पहले गोरखपुर में फैले इंसेफेलाइटिस रोग से जुड़ी तस्वीरों में साफ तौर पर नजर आता है। एक सांसद से मुख्यमंत्री तक का सफर करने के बीच उनके काम करने के तरीकों में तो बहुत बदलाव आया लेकिन बच्चों के लिए जो लगाव पहले हुआ करता था वहीं लगाव आए दिन अलग-अलग दौरों के बीच हुई बच्चों से मुलाकात के दौरान दिख जाता है। बच्चों से जुड़े इस अदृश्य रिश्ते का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में खासकर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक बताई जा रही कोरोना की तीसरी लहर आने से पहले ही उससे मासूमों को सुरक्षित करने की तैयारियां पूरी की जा रही है।

इंसेफेलाइटिस रोग का वो दौर….

प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भीतर बच्चों के लिए दिख रही संवेदनाओं में कोई नई बात नहीं है। बल्कि, आज से 25 साल पहले ही बतौर सांसद यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी ने बच्चों को महामारी से बचाने के लिए एक बड़ी जंग की शुरुआत कर दी थी, जो मुख्यमंत्री बनने के बाद पूरी तरह सफल हुई। आपको बता दें कि गोरखपुर में बीते कुछ सालों पहले इंसेफेलाइटिस रोग जैसी घातक बीमारी के कारण हर साल हजारों बच्चों की मौत होती थी। इतना ही नहीं, इस रोग के कारण जितने बच्चे मरते थे, उससे दुगुने बच्चे उम्र भर के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग हो जाते थे।

इस मुद्दे को लेकर भीषण गर्मी में तत्कालीन सांसद की अगुआई में सरकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन होते थे। संसद में इस बात को रखते हुए एक बार मौजूदा मुख्यमंत्री अत्यंत भावुक भी हुए थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद सीएम योगी ने सबसे पहले इंसेफेलाइटिस रोग को खत्म करने को लेकर काम किया। नतीजन, 2016 से 2020 के दौरान इंसेफेलाइटिस रोग से जूझ रहे बच्चों की संख्या 3911 से घटकर 1624 पर आ गयी। इतना ही नहीं, इससे होने वाली मौतों की संख्या भी 641 से घटकर मात्र 79 रह गयी है। ये मौजूदा मुख्यमंत्री की ओर से 25 साल पहले शुरू की गई संघर्ष की लड़ाई ही है, जिसके चलते पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस जैसा रोग खत्म होने की कगार पर आ गया है।

‘इंसेफेलाइटिस’ की तर्ज पर होगा कोरोना की तीसरी लहर से युद्ध

बच्चों के लिए सबसे घातक बनाई जा रही कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए भी सीएम योगी ने प्रदेश में ठीक वैसी ही तैयारियां कर रखी हैं, जैसी इंसेफेलाइटिस रोग को खत्म करने के लिए गोरखपुर में की गई थीं। कोरोना की तीसरी लहर आने से पहले ही उससे लड़ने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू वार्ड), मिनी पीकू स्थापित किए जा रहे हैं, अस्पतालों में बेड और दवाइयों की उपलब्धता के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इतना ही नहीं, बच्चों को इस तीसरी लहर से बचाने के लिए बच्चों के अभिभावकों का वैक्सीनेशन प्राथमिकता से किया जा रहा है। आपको बताते चलें कि बच्चों के लिए कोरोना की तीसरी लहर को ध्यान में रखकर इतनी तैयारी करने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य बना है।

राजकीय बाल/बालिका गृह में होगी कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की देखभाल
सीएम योगी की ओर से बच्चों के प्रति संवेदनाएं रखते हुए शुरू की गई बाल सेवा योजना के तहत प्रदेश के बच्चों के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए जाएंगे। योजना के अनुसार, महामारी के कारण अनाथ हुए 10 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों की देखभाल के लिए प्रदेश सरकार द्वारा संचालित राजकीय बाल गृह (शिशु) में रखा जाएगा। ऐसे ही अनाथ हुई बालिग बालिकाओं को भी राजकीय बाल गृह (बालिका) या कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (आवासीय) में रखा जाएगा, जहां इनकी देखभाल के साथ शिक्षा-दीक्षा के जुड़े सारे प्रबंध किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मथुरा, लखनऊ प्रयागराज, आगरा एवं रामपुर जिलों में कुल 13 राजकीय बाल गृह (शिशु) संचालित किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर प्रदेश में स्थापित किए जा रहे 18 अटल आवासीय विद्यालयों में रखकर उनकी देखभाल की जाएगी।

नाबालिक बच्चों की देखभाल करने वाले को प्रति माह दिए जाएंगे 4 हजार रुपए

‘बाल सेवा योजना’ के तहत बच्चों के बालिग होने तक उनकी देखभाल करने वाले को 4 हजार रुपए प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इतना ही नहीं, महामारी के बीच अनाथ हुईं बालिकाओं के विवाह की समुचित व्यवस्था के लिए प्रदेश सरकार बालिकाओं की शादी हेतु 1,01,000 रुपए की राशि भी उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की ओर से इस योजना के तहत स्कूल अथवा कॉलेज में पढ़ रहे या व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे ऐसे सभी बच्चों को टैबलेट/लैपटॉप की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

महामारी में अनाथ हुए बच्चों का सहारा बने सीएम योगी
कोरोना महामारी के बीच कई बच्चों से सिर से उनके माता पिता का साया उठ गया। संक्रमण से जंग लड़ते लड़ते अनाथ हुए बच्चों के लालन-पालन, शिक्षा-दीक्षा सहित विकास के सभी संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी योगी सरकार ने अपने ऊपर ले ली है। सीएम योगी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास से ऐसे अनाथ हुए बच्चों के लिए ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ का शुभारंभ किया है। शनिवार को सीएम योगी ने कहा कि ऐसे बच्चे जिन्होंने कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता अथवा यदि उनमें से एक ही जीवित थे, जिन्हें महामारी के चलते खो दिया हो और अब अनाथ हो गए हों, ऐसे में राज्य सरकार द्वारा उन सभी अनाथ बच्चों की समुचित देखभाल की जाएगी। सरकार की ओर से ऐसे बच्चों को जीवन में उन्नति के सभी अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी भावना के साथ उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना प्रारंभ की जा रही है।

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