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यूपी में अब होगी बारिश, उमस से मिलेगी राहत, जानें पूरा अलर्ट

आजमगढ़. पिछले दिनों लगातार बरसात के कारण अरहर, मक्का आदि की बोआई करने से चूके किसानों के लिए बड़ा अवसर है। वे देर से ही सही इन फसलों की बोआई कर सकते है। कारण कि अगले पांच दिन तक तेज बारिश की उम्मीद नहीं है। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार आसमान में मध्यम बादल छाये रहेंगे। इस दौरान हल्की बरसात की उम्मीद है। आर्द्रता कम के कारण उमस से भी थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के मौसम वैज्ञानिक डा. तेज प्रताप सिंह के मुताबिक ग्रामीण कृषि मौसम सेवा योजना के अंतर्गत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अगले 4 दिनों में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने तथा हल्की बारिश होने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 35-37℃ व न्यूनतम तापमान 27-28℃ तथा आर्द्रता 52-96 फीसद के मध्य रहेगी । हवा सामान्य से मध्यम गति के साथ पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर चलने की संभावना है।

किसानों के लिए सुझाव
सामान्य-
आकाशीय बिजली से या वज्रपात द्वारा होने वाली हानि से बचने के लिये किसान अपने फोन में दामिनी एप डाउनलोड करें।

गन्ना-
डा. तेज प्रताप के मुताबिक इस समय गन्ने की फसल में कीट का प्रकोप होता है। अगर गन्ने की फसल पीली दिखाई दे रही हो या वह कीटों के द्वारा फसल का रस चूसने एवं पत्तियों को काटकर खाने के लक्षण दिख रहे हो तो इसका तत्काल प्रबंधन करें। इसके रोकथाम के लिए समय से गुड़ाई करते रहें एवं चोटी भेदक कीट के नियंत्रण के लिए कारटेप हाइड्रोक्लोराइड 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें एवं गन्ने के जिस पौधे में लाल सड़न रोग का प्रकोप दिखाई दे उस पौधे को उखाड़कर खेत से दूर कही जमीन में दबा दें।

आम-
आम के फलों की तुड़ाई के बाद फलदार वृक्षों में 500 ग्राम नाइट्रोजन प्रति वृक्ष की दर से डालें।

बैंगन-

बैंगन में प्रति हेक्टेयर फली भेदक कीट के नियंत्रण हेतु ट्राइकोग्रामा के दो से तीन कार्ड 10 दिन के अंतर पर लगायें।

अदरक-

अदरक की बुवाई के 40 दिन बाद प्रति हेक्टेयर 25 किग्रा नाइट्रोजन की मात्रा (54 किग्रा यूरिया) मिट्टी चढ़ाते समय दें।

कद्दूवर्गीय सब्जियां-

वर्षाकालीन कद्दूवर्गीय सब्जियों (जैसे- नेनुआ, लौकी, करेली आदि) में कीटों एवं रोगों की निगरानी करते रहें। इनका प्रकोप दिखने पर उचित उपाय करें। इनकी लताओं को वर्षा के पानी से सड़ने से बचाने के लिए बेलों पर चढ़ाने के व्यवस्था करें ।

उडद-
उडद में कुल खरपतवार के नियंत्रण के लिए क्वीनालफास इथाइल की 50 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से आवश्यक्तानुसार पानी में मिलाकर मौसम साफ होने पर छिड़काव करें।

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