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‘चायनीज’ बोल रहे राजस्थान में खरीदे गए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, स्टाफ के कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा!

जयपुर, कोरोना की दूसरी लहर के कारण प्रदेश में कई लोगों की मौत हो गई। इस दौरान ऑक्सीजन की जरूरत पूरी करने के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की खरीद की गई। इसमें अब बड़ी गड़बड़ी सामने आ रही है। केरल में 32 हजार रुपए में बेचे गए कंसंट्रेटर राजस्थान में 50 हजार रुपए में बिक रहे हैं। इनमें तो कई चाइनीज हैं। आवाज भी चाइनीज लैंग्वेज में ही आती है। चाइनीज भाषा में इंडिकेशन भी आता है, जिसे स्टाफ भी नहीं समझता।

गारंटी भी नहीं

कंसंट्रेटर खरीद की मुख्य शर्त यह थी कि एक से 3 साल की गारंटी होनी चाहिए। एक कंपनी ऐसी थी, जिसने 3 साल की गारंटी दी, लेकिन उसे नकार दिया। एक साल गारंटी देने वाली कंपनी से कई कंसंट्रेटर खरीद लिए। इस डील के कागज एक हिंदी अखबार के पास मौजूद हैं। इतना ही नहीं साबुन, नमक-मिर्च और एलईडी बेचने वाली कंपनियों से कंसंट्रेटर खरीदे गए। इनके पास तो मेडिकल उपकरण बनाने-बेचने-खरीदने का अनुभव नहीं था।

इमरजेंसी के नाम पर वारे-न्यारे

इमरजेंसी के नाम पर इन्होंने चाइनीज कंसंट्रेटर खरीदकर सरकार को बेचे। आरएमएससी ने जिस कंपनी को 2019 में ब्लैक लिस्टेड किया था, उनसे भी कंसंट्रेटर खरीदे गए। कंसंट्रेटर खरीद में वित्तीय नियमों की भी अवहेलना हुई है। नियमों के तहत किसी कंपनी को टैक्स का भुगतान सामान पहुंचने के बाद किया जाता है, लेकिन प्रदेश में कंसंट्रेटर बेचने वाली कंपनियों को 12% जीएसटी दर से भुगतान पहले कर दिया गया। केंद्र ने कंसंट्रेटर पर जीएसटी की दर घटाकर 5% कर दी थी इसके बावजूद 12% का भुगतान किया गया। कई कंपनियों के कंसंट्रेटर अभी तक नहीं पहुंचे।

स्वास्थ्यकर्मी बोले- ये काम के नहीं

मीडिया ने स्वास्थ केन्द्रों पर कंसंट्रेटर का उपयोग करने वाले स्वास्थकर्मियों से बात की। वे बोले- ये बेकार हैं। मरीजों के लिए किसी काम का नहीं है। स्वास्थ्य केंद्रों को दिए 10% कंसंट्रेटर ऐसे हैं जिनकी बोली, बटन और मैनुअल की भाषा चाइनीज है। कोविड पेशेंट को ऐसे कंसंट्रेटर लगाने से उन्हें नुकसान ही होगा। ज्यादातर कंसंट्रेटर में प्योरिटी इंडिकेटर नहीं। जिनमें है, उनमें ऑक्सीजन प्योरिटी बहुत कम (30-50%) है।

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. वीरेन्द्र सिंह व न्यूरोसर्जन नगेन्द्र शर्मा बताते हैं- मध्यम लक्षण वाले मरीज को कंसंट्रेटर लगाते हंै। ऑक्सीजन सिचुरेशन की प्योरिटी तय मानक (90%) से कम हो तो कार्बनडाईऑक्साइड बढ़ने लगती है। ब्रेनडेथ हार्ट और किडनी फेल्योर का डर रहता है।

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