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सुशील कुमार : अपराध के अखाड़े में ऐसे पहुंचा नामी पहलवान, हरिद्वार वाले नामी बाबा ने भी नहीं की मदद

नई दिल्ली: सुशील देश का गौरव है! छत्रसाल स्टेडियम मर्डर कांड में पहली बार जब पहलवान सुशील कुमार का नाम आया, तो एक वॉट्सऐप ग्रुप में चल रही चर्चा में एक पत्रकार के मुंह से सीधे यह बात निकली। वह अपनी जगह सही था। सुशील डबल ओलिंपिक्स मेडल जीतने वाला देश का एकमात्र खिलाड़ी है। वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड लाने वाला भारत का एकमात्र पहलवान है। देश के इसी सर्वश्रेष्ठ पहलवान की धर-पकड़ के लिए आज पुलिस की कई टीमें दिल्ली-एनसीआर की खाक छान रही हैं। पुलिस का दावा है कि सबूत पुख्ता हैं… विडियो में सुशील मृतक की पिटाई करता दिख रहा है, गवाहों ने ठोककर बयान दिया है और लोकेशन भी वारदात वाली जगह की है। सुशील अब उनके लिए मोस्ट वॉन्टेड मुलजिम है।

नामी बाबा से मांगी मदद
सुशील आखिर छुप क्यों रहा है? पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान होने की वजह से वह इस मामले में अंत तक खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए वह एक नामी बाबा से मदद लेने हरिद्वार गया था। वहां से ऋषिकेश भी गया। अब वह लौटकर दिल्ली-एनसीआर में ही छिपा गया है। इसलिए दिल्ली, हरियाणा और यूपी के कई ठिकानों में छापेमारी चल रही है। पुलिस को पता चला है कि सुशील अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाने की कोशिश में लगा हुआ है। लेकिन सबूत इतने पुख्ता हैं कि कानूनी शिकंजे से उसका निकलना फिलहाल मुश्किल है। विदेश भागने की आशंका के मद्देनजर सुशील के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी कर दिया गया है।

गैंगस्टरों के चला गया करीब
आखिर देश का गौरव बन चुका पहलवान सुशील इस दलदल में कैसे चला गया? दौलत, शौहरत, पद और प्रतिष्ठा सब कुछ तो उसके पास थी। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, सुशील की ख्याति की वजह से कई गलत लोग उसके करीबी बन गए। कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवानिया का मामा और मकोका के तहत जेल में बंद पूर्व विधायक रामबीर शौकीन सबसे पहले सुशील के करीब आया। इसके जरिए पहलवान बहादुरगढ़ के गैंगस्टर राजीव उर्फ काला असौदा के संपर्क में आया था। काला को झज्जर की अदालत के बाहर पुलिस कस्टडी में 2017 में नीतू दाबोदिया-अशोक प्रधान गैंग के शार्प शूटर ने मार दिया था। सूत्र बताते हैं कि कुछ समय से सुशील कुख्यात गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी के टच में आ गया।

सेटलमेंट का करने लगा काम
काला जठेड़ी 2 फरवरी 2020 को फरीदाबाद कोर्ट में पेशी के बाद गुड़गांव पुलिस की कस्टडी से फरार हो गया। पुलिस सूत्रों का दावा है कि दिल्ली और हरियाणा के कारोबारियों से काला जठेड़ी गैंग रंगदारी मांगने का काम कर रहा है। तफ्तीश में सामने आया कि कुछ केसों की सुशील ने मांडवाली (सेटलमेंट कराने) का काम किया है। विदेश से गैंग को ऑपरेट कर रहा काला जठेड़ी धमकी देता और जरूरत पड़ने पर फायरिंग भी करवाता था। इसके बाद डरे-सहमे कारोबारियों से सुशील के लोग संपर्क करते और फिर मांडवाली के काम को अंजाम दिया जाता। एक पीड़ित ने मीडिया  से इसकी पुष्टि भी की है। छत्रसाल स्टेडियम में 4 मई की रात को ग्रीको रोमन के पूर्व जूनियर नैशनल चैंपियन सागर राणा (23) हत्याकांड में सुशील का ग्रुप और काला जठेड़ी गैंग से जुड़े लोग आमने-सामने हो गए। मॉडल टाउन के फ्लैट्स को लेकर यह झगड़ा हुआ था। सुशील फ्लैट खाली कराना चाहता था, जबकि वो नहीं करना चाहते थे।

अकड़ने से हो गई मारपीट
पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुशील पहलवान और उसके सहयोगियों की तरफ से 4 मई की रात झगड़े से पहलवान-बदमाश इकट्ठा करने के लिए चारों तरफ कॉल की गईं। सुशील के चाचा का लड़का संदीप, नीरज बवानिया गैंग का दीपा लाडपुरिया और काला असौदा गैंग का प्रिंस दलाल समेत 35-50 लोग रात को छत्रसाल स्टेडियम पहुंच गए। दूसरे पक्ष की तरफ से सागर के अलावा काला जठेड़ी का राइट हैंड सोनू महाल था। सूत्रों का कहना है कि फ्लैट खाली कराने को लेकर हुए विवाद में सुशील से सागर अकड़ गया। इसके बाद मारपीट शुरू हो गई। सुशील के खिलाफ मर्डर, अपहरण और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज हो चुका है। स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और जिले की स्पेशल स्टाफ की कई टीमें उसे तलाश रही हैं।

 

 

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