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हैंडीक्राफ्ट का काम बंद हुआ तो श्मशान में सजाने लगे चिताएं, आखिर पापी पेट का सवाल है!

कोरोना महामारी ने रोजगार छीना तो रोटी पर संकट आ गया। परिवार पालना मुश्किल हो गया। दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भारी पड़ने लगा। हालात ऐसे बदले कि जिस बीमारी का नाम सुनते ही लोग दूरी बना लेते हैं, उसी बीमारी से मरने वालों के आसपास रहना मजबूरी बन गई। हैंडीक्राफ्ट का काम करने वाला लाला इस समय जयपुर के आदर्श नगर स्थित मोक्षधाम में चिताएं सजाता है। करता भी क्या, कोई चारा भी तो नहीं है। पापी पेट का जो सवाल है।

इस कोरोना ने न जाने कितनों की रोजी रोटी छीन ली, तो कितनों को सड़क पर ला खड़ा किया। आदर्श नगर मोक्षधाम में कोविड पेशेंट की लाशों पर लकड़ियां सजाने में मशगूल लाला 15-20 दिन पहले ही यहां आया है। पसीने से तरबतर लाला के हाथ अचानक रुकते हैं। थोड़ा सुस्ताने के बाद एक बोतल हाथ में लिए पानी भरने चल पड़ता है।

साधारण कद-काठी वाला लाला पूछने पर बताता है कि वह आदर्श नगर के जनता कॉलोनी में हैंडीक्राफ्ट का काम करता था। लॉकडाउन लगा और काम- ठप हो गया। कई दिन तक वह घर खाली बैठा रहा। इस बीच किसी परिचित ने मोक्षधाम में काम दिला दिया। यहां से उसे रोज 500 रुपये मिल जाते हैं।

लाला ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से इतने शव आ रहे हैं, वक्त नहीं मिल रहा। वह पिछले साल भी काम धंधा बंद होने पर यह काम कर चुका था, लेकिन तब इतने शव नहीं देखे थे।

 

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