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मोदीराज: भारत की एक और किरकिरी, कर्ज नहीं चुकाने पर फ्रांस में ज़ब्त होंगी 20 भारतीय संपत्तियां

दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की विदेशी संपत्तियों का विदेश में ही जब्त हो जाना बेहद चिंतनीय है। अपने अंतर्राष्ट्रीय समीकरणों का दंभ भरने वाले प्रधानमंत्री मोदी के पास भी शायद इस पर कोई नया जुमला या नारा नहीं है।

तभी तो राष्ट्रीय संपत्ति के जब्त होने पर जिम्मेदारी लेने की जगह वो मंत्रिमंडल विस्तार और नए मंत्रियों के उत्सव में मशगूल हैं।

दरअसल पेरिस में मौजूद भारतीय संपत्ति को ब्रिटिश ऑयल कंपनी केयर्न एनर्जी ने जब्त कर लिया है। रेट्रोस्पैक्टिव टैक्स मामले में केयर्न एनर्जी ने भारत से 1.72 बिलियन डॉलर करीब 12,600 करोड़ रुपए की वसूली के लिए अमेरिका में 2 महीने पहले ही मुकदमा दर्ज किया था।

केयर्न ने वसूली के लिए भारत की विदेशों में स्थित 70 बिलियन डॉलर करीब 5.12 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति की पहचान भी कर ली थी।

साथ ही ये स्पष्ट किया था कि यदि भारत इसमें विफल रहता है तो वह आर्बिट्रेशन अवार्ड का भुगतान ना करने वाली लीग में शामिल हो जाएगा।

पहचान की गई संपत्ति में केयर्न एनर्जी ने एअर इंडिया के हवाई जहाज, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से जुड़े बंदरगाह, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की प्रॉपर्टी, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के ऑयल एंड गैस कार्गो जैसे कीमती संपत्तियों को शामिल किया है।

यह भारतीय संपत्ति अलग अलग देशों में मौजूद है। भारत सरकार ने समय पर भुगतान नहीं किया जिसके बाद अब केयर्न ने पेरिस में 70 बिलियन डॉलर की भारतीय संपत्ति जब्त कर ली है।

भारत सरकार कल तक तो अपने मंत्रिमंडल विस्तार व्यस्त थी। जनता को बहलाने के लिए ये भी कह दिया कि उन सभी मंत्रालयों में फेरबदल किये जा रहे हैं जहां मंत्रियों ने ठीक से काम नहीं किए।

ऐसे में तो सबसे पहले वित्त मंत्रालय में फेरबदल की जरूरत थी। जीडीपी अपने सबसे निचले स्तर पर है। महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ रखी है।

पेट्रोल के दामों ने शतक का मार्क लगभग हर राज्य में पार कर लिया है। छोटे मंझोले व्यवसाय वाली जनता दिन के दो वक्त के खाने के लिए भी संघर्ष कर रही है।

अब भारत की विदेशों में मौजूद संपत्ति भी कर्ज की भेंट चढ़ रही है। इतने सब के बाद भी निर्मला सीतारमन को वित्त मंत्रालय की गद्दी से हटाया नहीं गया।

मध्यम वर्गीय जनता टैक्स भरते समय ये सोचती है कि ये पैसा हमारे बेहतरी के लिए लगाया जाएगा, लेकिन अब उन्हीं पैसों से अर्जित की गई भारतीय संपत्ति भी विदेशी हाथों में जा रही है।

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