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बढ़ती ‘R’ वैल्यू है तीसरी लहर की आहट, जानिए क्या होता है कोरोना का आर फैक्टर?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दो दिन पहले ही सभी राज्यों को कोविड-19 के बढ़ते ‘R’ फैक्टर को लेकर अलर्ट किया है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्यों को भेजे पत्र में लिखा कि आपको पता ही होगा कि R फैक्टर का 1.0 से अधिक होना कोविड-19 के केस बढ़ने का संकेत है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि अधिकारी सतर्क हो जाएं और भीड़ वाले इलाकों में मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य कोविड-19 बचाव उपायों का सख्ती से पालन कराएं।

पर आखिर यह ‘R’ फैक्टर है क्या, जिसे लेकर सरकार इतनी चिंतित नजर आ रही है? इसके बढ़ने से लॉकडाउन का खतरा क्यों बढ़ रहा है? इस समय R फैक्टर क्या है और यह कैसे केस बढ़ने का संकेत देता है?

R वैल्यू से कैसे बढ़ते हैं केस?

  • डेटा साइंटिस्ट्स के मुताबिक R फैक्टर यानी रीप्रोडक्शन रेट। यह बताता है कि एक इन्फेक्टेड व्यक्ति से कितने लोग इन्फेक्ट हो रहे हैं या हो सकते हैं। अगर R फैक्टर 1.0 से अधिक है तो इसका मतलब है कि केस बढ़ रहे हैं। वहीं, R फैक्टर का 1.0 से कम होना या कम होते चले जाना केस घटने का संकेत होता है।
  • इसे इस बात से भी समझ सकते हैं कि अगर 100 व्यक्ति इन्फेक्टेड हैं। वह 100 लोगों को इन्फेक्ट करते हैं तो R वैल्यू 1 होगी। पर अगर वे 80 लोगों को इन्फेक्ट कर पा रहे हैं तो यह R वैल्यू 0.80 होगी।

इस समय भारत में R वैल्यू की क्या स्थिति है?

  • चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइंसेस (IMSc) की एक स्टडी के मुताबिक देश में इस समय भले ही R फैक्टर 1.0 से कम है, पर कुछ राज्यों में यह तेजी से बढ़ रहा है। पूरे भारत में मई के मध्य में R फैक्टर 0.78 था। यानी 100 लोग 78 लोगों को ही इन्फेक्ट कर पा रहे थे। पर जून के अंत में और जुलाई के पहले हफ्ते में R वैल्यू बढ़कर 0.88 हो गई है। यानी 100 लोग 88 लोगों को इन्फेक्ट कर रहे हैं।
  • इस स्टडी के मुताबिक 9 मार्च और 21 अप्रैल के बीच R वैल्यू 1.37 थी। इसी वजह से इस दौरान केस तेजी से बढ़ रहे थे और दूसरी लहर अपने पीक की ओर बढ़ रही थी। 24 अप्रैल से 1 मई के बीच R वैल्यू 1.18 थी और फिर 29 अप्रैल से 7 मई के बीच 1.10 रह गई। उसके बाद से R वैल्यू लगातार कम होती गई। नतीजा यह रहा कि केस भी घटते चले गए।

किन राज्यों में R-वैल्यू खतरनाक तरीके से बढ़ रही है?

  • रिसर्चर्स की टीम का नेतृत्व कर रहे सीताभ्र सिन्हा का दावा है कि भारत में R वैल्यू 1 से कम है। पर एक्टिव केस की संख्या में गिरावट की रफ्तार धीमी पड़ गई है। इसकी वजह पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों और केरल में बढ़ी हुई R वैल्यू है।
  • सिन्हा का कहना है कि R वैल्यू जितनी कम होगी, उतनी तेजी से नए केस कम होते जाएंगे। इसी तरह R वैल्यू अगर 1.0 से अधिक होगी तो हर राउंड में इन्फेक्टेड लोगों की संख्या बढ़ती जाएगी। टेक्निकली इसे एपिडेमिक फेज कहा जाता है।

R वैल्यू से एक्टिव केस में कितना अंतर आता है?

  • सिन्हा का कहना है कि 9 मई के बाद R वैल्यू में गिरावट आई है। 15 मई से 26 जून के बीच यह घटकर 0.78 रह गई थी। पर 20 जून के बाद यह बढ़कर 0.88 हो गई। जब तक R वैल्यू 1.0 के पार नहीं जाती, तब तक केस बहुत तेजी से नहीं बढ़ेंगे, पर इस वैल्यू का बढ़ना चिंताजनक तो है ही।
  • उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि अगर 0.78 पर R वैल्यू कायम रहती तो 27 जुलाई तक एक्टिव केस घटकर 1.5 लाख से कम रह जाएंगे। पर अब R वैल्यू बढ़कर 0.88 हो गई है और इसमें कोई और बदलाव नहीं आता है तो 27 जुलाई को एक्टिव केस 3 लाख के आसपास रहेंगे। यानी R वैल्यू में 0.1 का अंतर भी दो हफ्ते में एक्टिव केसेज की संख्या को दोगुना कर सकता है।

किन राज्यों में बढ़ी हुई है R वैल्यू?

  • महाराष्ट्र में 16 जुलाई को एक्टिव केस की संख्या घटकर 1.07 लाख रह गई। पर चिंता की बात यह है कि मई 30 को राज्य की R वैल्यू 0.84 थी, जो जून के अंत में 0.89 हो गई थी। इस दौरान महाराष्ट्र में केस तेजी से बढ़े।
  • केरल की बात करें तो वहां 1.19 लाख एक्टिव केस हैं। इस महीने की शुरुआत में यहां R वैल्यू 1.10 हो गई थी। यही कारण है कि यहां रिकवर होने वाले केसेज की तुलना में इन्फेक्शन के नए केस तेजी से बढ़े हैं। महाराष्ट्र और केरल की बात करें तो इन दोनों राज्यों में मिलाकर इस समय देश के 50% से अभी अधिक एक्टिव केस हैं।
  • स्टडी के मुताबिक मणिपुर में R-वैल्यू 1.07 है, जबकि मेघालय में 0.92, त्रिपुरा में 1.15, मिजोरम में 0.86, अरुणाचल प्रदेश में 1.14, सिक्किम में 0.88 और असम में 0.86 है। यानी इन राज्यों में केस पिछले महीने की गिरावट के बाद फिर से रफ्तार पकड़ने लगे हैं।

क्या बढ़ती R वैल्यू लॉकडाउन लगा सकती है?

  • हां। निश्चित तौर पर। अगर R वैल्यू बढ़ती रही और 1.0 के आसपास पहुंची तो लॉकडाउन फिर लग सकता है। यह एक ऐसा फॉर्मूला है जिसे केंद्र और राज्य सरकारें फॉलो कर रही हैं। इस समय उनका फोकस पॉजिटिविटी रेट पर है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन और सख्त प्रतिबंधों से ही R वैल्यू को काबू में रखा जा सकता है। अगर लोग बाहर न निकलें तो इन्फेक्टेड व्यक्ति और लोगों को इन्फेक्ट नहीं कर सकेंगे। मई में भी R-वैल्यू कम होने की बड़ी वजह लॉकडाउन ही थी। तब दूसरी लहर भी ठंडी पड़ने लगी थी।
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