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100 मीटर दूरी पर फंसे इन मजदूरों की सुनेगी संसद, जब रहने के लिए घर नहीं दे सकती सरकार तो…

देश में कोरोना वायरस के आकड़ों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। इस समय भारत समेत पूरी दुनिया को कोरोना से न केवल सामाजिक, बल्कि आर्थिक रूप से काफी नुकसान हुआ है। चूंकि इस वायरस से निपटने के लिए अभी तक किसी तरह का इलाज संभव नहीं हो पाया, जिस कारण कई देशों ने वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन का सहारा लिया है, साथ ही लोगों से सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंस) बनाए जाने की अपील की जा रही है। भारत में कोरोना वायरस के मामले आते ही सरकार ने वायरस को गंभीरता से लेते हुए 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की थी।

21 दिनों के लॉकडाउन के बाद भी अब तक कोरोना के मामलों में किसी तरह की कोई कमी नहीं आने के बाद  प्रधानमंत्री मोदी ने 14 अप्रैल को देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया है। इस दौरान मोदी ने लोगों को देश से इस महामारी से बचाने के लिए कुछ ओर दिनों तक घरों में रहने का आह्वान किया।

लेकिन देश में लॉकडाउन के बाद पूरे देश में इसका मजदूरों और गरीबों के ऊपर काफी बुरा असर पड़ा है। बड़े स्तर पर फैक्ट्री और मिलों के बंद होने के कारण मजदूरों को काम मिलना बंद हो गया, जिसके बाद आय न होने के कारण उन्हें अपनी मुलभूत चीजों के अलावा परिवार को पालने तक के पैसे नहीं बचे। सरकार द्वारा गांवों से शहरों में आकर बसे इन प्रवासी मजदूरों के लिए सरकारों ने काफी राहत पैकेज का ऐलान किया, लेकिन उससे भी कुछ असर नहीं दिखता।

लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों ने अपने गांव वापस जाने की अपील की, लेकिन सरकार द्वारा कोई प्रबंधन ना किए जाने के बाद और बिना किसी तैयारी के किए गए लॉकडाउन के कारण कई लोग जो बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब के रहने वाले थे, काम बंद होने के कारण दिल्ली समेत अन्य राज्यों में फंस गए हैं।

ऐसे में पूरे देश को चलाने वाली संसद से 100 मीटर की दूरी में बंगला साहिब गुरुदारा के पास कई मजदूर देश में लॉकडाउन के बाद से काफी परेशान हैं। ये इलाका प्रधानमंत्री कार्यालय समेत तमाम मंत्रालयों के आवासों के आसपास पड़ता है। लॉकडाउन होने के बाद कई मजदूरों को काम से निकले जाने के कारण ये लोग बंगला साहिब में इस उम्मीद से इकट्ठा हुए कि इन्हें खाना मिल जाए, लेकिन पैदल चल कर पहुंचे इन मजदूरों को यहां पर भी निराशा ही हाथ लगी।

ऐसे में इन मजदूरों के लिए सरकार की तरफ से भी इनके लिए कुछ खास इंतजाम नहीं किए गए। ऐसे ही पंजाब से आए इंद्रजीत लॉकडाउन के बाद में फंसे हुए हैं। इंद्रजीत दिल्ली की न्यू फ्रेडंस कॉलोनी में बार टेंडर का काम करते थे, लॉकडाउन के बाद से ही उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया और जो कुछ उनके पास समान था वो चोरी हो गया।

वह बताते हैं कि लॉकडाउन के बाद में अपने घर जाना चाहता था, लेकिन जब में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा तो सारी ट्रेनें रद्द हो चुकी थी। जिसके बाद में पैदल चलते हुए बंगला साहिब गुरुदारा शरण लेने के लिए पहुंचा, लेकिन जब में यहां पहुंचा तो यहां पर मेरे सारे समान को यहां के नशेड़ियों और लॉकल गुंडों ने मुझ से छीन लिया। अब मैं अपने अपने परिवार से संपर्क भी नहीं कर पा रहा हूं, अगर घर पर बात करनी होती है तो यहां कुछ अन्य मजदूरों के फोन से बात कर लेता हूं। लेकिन मेरा यहां पर अब कुछ नहीं बचा है। मेरे साथ मेरे परिवार वाले भी अब काफी परेशान हैं।

पंजाब के संगरूर से आए सुखवीर दिल्ली में लॉकडाउन लगने के बाद फंस गए हैं, सुखवीर भी दिल्ली में मजदूरी कर के अपना कामकाज कर लेते थे। सुखवीर ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से हमारी हालत काफी खराब है। काम बंद हो जाने के कारण हम कुछ नहीं कमा पा रहे हैं। जेब में पैसे नहीं होने के कारण हम लोग गुरूदारे की शरण में आए थे, लेकिन यहां भी खाने के लिए कुछ नहीं मिला।

सरकार द्वारा भी कभी-कभार ही खाना मिल पा रहा है और जो खाना मिल रहा है उसमें भी किसी तरह का कोई स्वाद नहीं है। हम सिखों के लिए भी गुरूदारे बने हुए हैं, लेकिन गुरूदारे से भी हमें कोई मदद नहीं मिली। हमारी कुछ समझ में नहीं आ रहा क्या करें। पुलिस वालों ने अलग से हमें तंग किया हुआ है। पुलिस वाले आकर हमें भगाना शुरू कर देते हैं।हमें बसों में ले जाकर किसी और जगह छोड़ दिया जाता है। बाद में हमें खुद यहां तक पैदल चल कर आना पड़ता है। सरकार या तो हमें रहने के लिए जगह दे, नहीं तो लाइन में खड़ा करके गोली मार दे।

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