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कई गुना कीमत में भी नहीं मिल रहा ऑक्सीजन सिलेंडर का रेगुलेटर, सिर्फ 100 रुपए में बनाये भागलपुर के डॉक्टर

भागलपुर : कोरोना महामारी में ऑक्सीजन की कमी के बाद अब लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर में लगने वाले रेगुलेटर के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं, सरकार के लाख दावों के बाद भी बाजार में कालाबाजारी चरम पर है। मांग बढ़ने के साथ ही बाजार से रेगुलेटर खत्म हो गए हैं। अगर कहीं मिल भी रहा है तो 2000 रुपए में मिलने वाले रेगुलेटर के लिए 5000 रुपए तक वसूला जा रहा है। ऐसे में भागलपुर के एक डॉक्टर ने जुगाड़ टेक्नोलॉजी से इस समस्या का समाधान कर डाला। शिशु रोग विशेषज्ञ और जीवन जागृति सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह का दावा है कि जुगाड़ टेक्नोलॉजी से बना यह रेगुलेटर काफी कारगर है। इसकी लागत 50 से 100 रुपए तक आती है। इसे बनना और ऑपरेट करना भी आसान है। डॉ. अजय कुमार लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर भी डोनेट कर रहे हैं।

ऑक्सीजन देकर बचा रहे हैं मरीजों की जान
डॉ.अजय कुमार सिंह ने बताया कि उनके पास वर्तमान में 14 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध है। वे इसे रिफिलिंग करवा कर मरीजों को मुफ्त में उपलब्ध करवा रहे हैं। वे ऑक्सीजन सिलेंडर की संख्या बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं ताकि अधिक से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हो सके।

क्यों और कैसे किया जुगाड़ टेक्नोलॉजी से रेगुलेटर का इजात
डॉ. अजय कुमार ने बताया कि उन्हें सैकड़ों फोन आते थे, जिसमें लोग यह कहते थे कि हमारे पास ऑक्सीजन सिलेंडर तो है लेकिन रेगुलेटर नहीं। समस्या गम्भीर थी तब उन्होंने अपने सहयोगी धर्मेंद्र कुमार और राहुल सिंह के साथ मिलकर बड़े सुई के सिरिंच, मेडिसिन या स्लाइन के लिए प्रयोग में आने वाले कांच की बोतल और 2 पतले-पतले प्लास्टिक के नली द्वारा निर्मित रेगुलेटर बनाया। इसे बारी-बारी से तीन-चार सिलेंडर पर लगाकर जांच की। इसका प्रयोग सफल रहा। लोग आसानी से इसे उपयोग कर सकते हैं। डॉ. अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस जुगाड़ टेक्नोलॉजी से निर्मित रेगुलेटर का वीडियो अपलोड किया है। लोग अपने घर में इसे खुद से बना सकते हैं। इसे बनाना और इसका प्रयोग करना काफी आसान है।

बरतनी होगी ये सावधानियां
डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि इस जुगाड़ रेगुलेटर का उपयोग करते वक्त कुछ सावधानियां बरतनी होगी। जब सिलेंडर का मुख्य नोब खोलना हो तो उसे धीरे-धीरे और आराम से खोलें। मरीज की नाक में ऑक्सीजन का पाइप या मास्क तब तक नहीं लगाएं, जब तक आप ऑक्सीजन के रफ्तार को सही से संतुलित न कर लें। इसके लिए पानी मे उठने वाले बुलबुले को ठीक से देख लें। सब कुछ ठीक से फिट होने और ऑक्सीजन की सही मात्रा में निकलने के बाद ही नाक में पाइप वाला मास्क लगाएं। ऑक्सीजन की मात्रा को नाक में लगाने से पहले ही जांच लें। ऐसा नहीं होने पर नाक के जख्मी होने का भय बना रहता है।

 

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