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सांसों के संकट में उम्मीद की कहानी, ऑक्सीजन प्लांट के वर्कर्स ने 90 दिन का काम 11 दिन में पूरा किया!

कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा दिक्कत सांसों की यानी ऑक्सीजन की हो रही है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीज दम तोड़ रहे हैं। केंद्र से लेकर राज्यों तक की सरकारें ऑक्सीजन प्रोडक्शन बढ़ाने में जुटी हैं। ऐसे में देशभर में ऑक्सीजन प्लांट्स के अधिकारी-कर्मचारी और लेबर दिन-रात काम कर जिंदगी की उम्मीद को बरकरार रखने में जुटे हुए हैं।

इंदौर के पीथमपुर में 100 लोगों की टीम ने 11 दिन की कड़ी मेहनत से 90 दिन में तैयार होने वाला ऑक्सीजन प्लांट 11 दिन में तैयार कर दिया। इस प्लांट में रविवार रात से ट्रायल प्रोडक्शन भी शुरू हो गया है। 24 घंटे शुद्धता जांच के बाद मंगलवार से 40 टन ऑक्सीजन रोज मिलने लगेगी। एकेवीएन एमडी रोहन सक्सेना ने बताया कि करण मित्तल का प्लांट तीन साल से बंद पड़ा था। उनसे बात की तो बोले चालू करने में 3 महीने लगेंगे। सभी विभागों ने को-ऑर्डिनेशन से काम किया और जरूरी मंजूरियां हाथों हाथ जारी की गईं। प्लांट तक सड़क भी बनाई। नतीजा- प्लांट शुरू हो गया।

इसके लिए मित्तल ने 40 लाख रुपए खर्च किए। मुंबई से ऑक्सीजन मीटर और अहमदाबाद से दूसरी मशीनें मंगवाई गईं। ड्यूटी अधिकारी और नायब तहसीलदार विनोद राठौर ने बताया कि काम एक घंटे भी नहीं रोका गया। प्लांट इंचार्ज मदन अग्रवाल की मदद के लिए अहमदाबाद से 3 इंजीनियर आए।

14 अप्रैल से प्लांट पर काम शुरू हुआ। मोयरा सरिया ने मैकेनिकल हैंड और लेबर उपलब्ध कराए तो अन्य कंपनियों ने दूसरी सामग्री दी और प्लांट तैयार हो गया।

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