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ब्लैक फंगस का कहर: 22 वर्षीय युवक के निकाले 6 दांत, 2 महीने बाद है बारात

सूरत. कोरोना संक्रमण के बाद ब्लैक फंगस के मामले काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। ब्लैक फंगस वायरस कोरोना संक्रमण का इलाज करा चुके और इसका इलाज ले रहे मरीजों को शिकार बना रहा है। युवा से लेकर बुजुर्ग तक इस फंगस के चपेट में आ रहे हैं। ब्लैक फंगस बीमारी के कारण इलाज के दौरान सूरत में 800 से ज्यादा मरीजों के अंग भंग हाे चुके है।

इलाज के दौरान कई मरीजों की आंखें, दांत, जबड़ा से लेकर नाक में से साइनस का ऑपरेशन कर हटाया जा चुका है। वहीं जिन मरीजों में संक्रमण अधिक फैला गया था उनमें से करीब 55 से 60 फीसदी मरीजों की मौत भी हो चुकी हैं। कोरोना का इलाज ले रहे मरीजों को यह पता भी नहीं होता कि कोरोना से वह ठीक भी हो जाते है, तो ब्लैक फंगस नामक महामारी उनके जीवन को बर्बाद कर देगी। सूरत मे अनुमानित 400 से अधिक मरीजों का आंख, जबड़ा और दांत निकाले जा चुके हैं। वहीं करीब 1000 मरीजों से अधिक के साइनस का ऑपरेशन भी हो चुका है। सरकारी आंकड़े की माने तो इस फंगस के कारण 42 मरीजों की जान जा चुकी है। अकेले सिविल अस्पताल में 300 से अधिक मरीजों का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के बाद भी उन्हें इस बीमारी से निजात नहीं मिल पा रहा है।

युवक का दायां गाल पिचक गया और आवाज भी लड़खड़ाने लगी है

रांदेर निवासी 22 वर्षीय संतोष पटेल को डेढ़ महीने पहले कोरोना संक्रमित हो गए थे, उनका घर पर इलाज हुआ। फैमिली फिजीशियन ने उन्हें इलाज के दौरान 3 दिन तक स्ट्राइड और एंटीबायोटिक दवाइयां दी थी। करीब 8 दिन में वह काेरोना संक्रमण से ठीक हो गए लेकिन इसी बीच उनके चेहरे के दाहिनी तरफ असहनीय दर्द शुरू हो गया। उन्होंने फैमिली डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि यह ब्लैक फंगस के लक्षण है। एक निजी अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद वह सिविल अस्पताल में भर्ती हो गए।

डॉक्टरों ने सीटी स्कैन, एमआरआई और बायोप्सी के बाद उनके दाहिने जबड़े के ऊपरी हिस्से के 6 दांत फंगस की चपेट में आ गए हैं। जिसके बाद सिविल के डेंटल डिपार्टमेंट के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उनके सभी छह दांत निकाल दिए। ऑपरेशन के बाद 1 महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा। संतोष अब ठीक से बोल नहीं पाते बोलते समय उनकी जुबान लड़खड़ा जाती है, उन्हें खाने में समस्या होती है। दाहिने तरफ गाल पिचक गया है, उनके चेहरे का आकार बदल गया। 2 महीने बाद उनकी शादी होनी है इस बात को लेकर वह बहुत परेशान हैं। इस उम्र में उनके दांत निकाले जा चुके हैं।

दो बार साइनस का ऑपरेशन हुआ, अब बोलने में होती है दिक्कत

ऐसा ही एक मामला भटार की रहने वाली रचना की भी है, वह 28 साल की है डेढ़ महीने तक सिविल अस्पताल में ब्लैक फंगस का इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया। फंगस उनके जबड़े में फैल गया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर चार दांत निकाल दिए। इसके साथ ही साइनस का दो बार ऑपरेशन कर दिया इस ऑपरेशन के बाद उनकी आवाज साफ नहीं निकलती। उन्हें बोलने में काफी समस्या होती है। किसी के सामने बोलने में शर्म महसूस होती है। इसी तरह से तमाम मरीजों की अपनी-अपनी समस्याएं हैं जिन मरीजों की आंखें निकाली जा चुकी हैं वह मानसिक रूप से पीड़ित हो चुके हैं कुछ मरीज आत्महत्या करने जैसी बात भी करने लगे हैं।

स्मीमेर अस्पताल में इलाज के दौरान एक और मरीज की मौत

स्मीमेर अस्पताल में ब्लैक फंगस से पीड़ित एक मरीज की शनिवार को मौत हो गई। अस्पताल में अब तक 16 मरीजों की जान जा चुकी है। वहीं एक मरीज भर्ती किया गया। वहीं मौजूदा समय में अस्पताल में 46 मरीज भर्ती है। वहीं 51 मरीजों की सर्जरी की गई है जिसमें 5 मरीजों की आंखें निकाली गई। वहीं सिविल अस्पताल में 2 मरीज को डिस्चार्ज किया गया। यहां से अब तक 50 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। वहीं शनिवार को यहां पर 5 मरीजों की सर्जरी की गई जिसमें एक मरीज की आंख और एक का जबड़ा निकाला गया।

गंदे पानी और फल खाने से बच्चों में डायरिया की शिकायतें बढ़ी

पिछले कुछ दिन से बारिश, गंदे पानी और खराब फल और खाना खाने की वजह से बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ गई है। सिविल अस्पताल में 30 से 40 बच्चे डायरिया की शिकायत के साथ में आ रहे हैं। डॉक्टर प्राथमिक इलाज और दो-तीन दिन एडमिट करने के बाद उन्हें घर भेज रहे है। इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि परिजनों से पूछने के बाद पता चला है कि सड़े गले आम खाने, गंदा पानी पीने और गलत खानपान की वजह से यह समस्या हुई है।

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