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गलवान को एक साल: फिंगर एरिया से ही पीछे हटीं सेनाएं, 5 विवादित इलाकों में अभी भी सहमति नहीं

गलवान घाटी में 45 साल के बाद भारत और चीनी सेनाओं के बीच पिछले साल आज ही के दिन हिंसक झड़प हुई थी। एक साल के बाद दोनों देशों की सेनाएं केवल फिंगर इलाके से कुछ पीछे हटी हैं। इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। पिछले एक साल में दोनों पक्षों के टॉप ऑफिसर्स के बीच 11 दौर की बातचीत के बावजूद गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स के साथ-साथ डेमचोक और रणनीतिक महत्व की देपसांग घाटी में मई 2020 वाली स्थिति बहाली की भारत की मांग को लेकर कोई डेवलपमेंट नहीं हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक पैंगोंग लेक एरिया में आमने-सामने तनी दोनों सेनाओं को पीछे हटाने पर दोनों पक्ष सहमत हो गए थे, जिसके बाद सैनिक वास्तव में उत्तरी तट पर फिंगर क्षेत्रों से अलग हो भी गए। लेकिन यह केवल सैनिकों का डी एस्केलेशन था, सेनाओं का डी-इंडक्शन नहीं। डिफेंस सोर्सेज के मुताबिक अधिकांश चीनी तैनाती अभी केवल पीछे के क्षेत्रों में स्थानांतरित हुई है, सैनिक पूरे क्षेत्र से हटे नहीं हैं।

पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प के एक साल बाद भी चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ गहरे इलाकों में अतिरिक्त आवास बना लिए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने स्वीकार किया है कि चीन यहां लंबी तैनाती की तैयारी में है।

एक सूत्र ने साफ़ माना कि इसी क्रम में PLA ने रुडोक, कांग्शीवार, ग्यांटसे और गोलमुड क्षेत्रों में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के अतिरिक्त आवास बनाए हैं। PLA द्वारा फील्ड अस्पतालों के निर्माण और अतिरिक्त बर्फ में आने जाने के लिए स्नो मोबिलिटी वाहनों की खरीद से यह भी संकेत मिलता है कि वे इन क्षेत्रों में लंबे समय तक और स्थायी तैनाती की तैयारी कर रहे हैं।

यही नहीं पैंगोंग में सेनाओं के अलगाव के बाद से जमीनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है लेकिन स्थिति शांत है। भारत व चीन के बीच पिछले 45 वर्षों में पहली लड़ाई में, पिछले साल 15 जून की रात को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों द्वारा एक महीने के बाद पीछे हटने “डी-एस्केलेशन” प्रक्रिया के दौरान हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में कई बिंदुओं पर सैनिकों के बीच लंबा गतिरोध लगातार जारी है। चीन ने झड़प में मारे गए अपने सैनिकों की संख्या के बारे में पहले खुलासा नहीं किया। हालांकि बाद में चीन ने माना कि उसके चार सैनिक मारे गए हैं।

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