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कोरोना से दो पंचायतों में दो महीने में 1 मौत बताई सरकार, सामने आई 55 मृतकों की सूची

जयपुर. कोरोना की दूसरी लहर ने देश में पूरे हेल्थ सिस्टम की पोल खोल कर रख दी। सरकारी आंकड़ों में तो जान गंवाने वाले लाखों लोग दर्ज हुए, लेकिन बहुत से ऐसे भी लोग थे जिन्हें इन आंकड़ों में जगह नहीं मिली। मौतों की ऐसी हकीकत जानने के लिए मीडिया ने पाली जिले की दो पंचायतों का दौरा किया। यहां प्रशासन ने दो महीने में कोरोना से सिर्फ एक मौत का दावा किया। जबकि पत्रकार जब गांव में घूमे तो 55 मौतों का आंकड़ा सामने आया।

इन दो पंचायतों में 55 में से एक को छोड़ प्रशासन शेष मौतें सामान्य तरीकों से होना बता रहा है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या दो महीने में दो ग्राम पंचायतों में 55 से ज्यादा मौतें महज इत्तेफाक है। सच तो यह है कि जिनकी मौतें हुईं उनमें से अधिकतर का कोरोना टेस्ट नहीं हुआ था। उनकी कोरोना जांच होती तो सच्चाई सामने आ जाती। हालांकि परिवार के लोगों ने जो-जो कारण बताए वे सब कोरोना से मिलते-जुलते ही थी। किसी की सांस फूल रही थी तो किसी ने तेज बुखार से दम तोड़ा।

कोरोना काल में रोहट पंचायत की ढाबर व खारड़ा ग्राम पंचायत सुर्खियों में रही हैं। दोनों ग्राम पंचायतों में अप्रैल-मई माह 55 से अधिक लोगों की मौत हुई हैं। मीडिया टीम ने दोनों ग्राम पंचायतों पहुंच हालात टटोले तो लोग कोरोना काल में अपनों को खोने का दर्द बयां करने लगे। अपनों को याद करते ही उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। बोले- कोरोना काल में हमारा तो सब कुछ ही चला गया गया। हालांकि दर्द से बिलखते ग्रामीणों को यह मतलब नहीं है कि सरकारी आंकड़ों में उनके परिजनों का नाम शामिल किया गया या नहीं, लेकिन उनके जाने के दर्द से अब तक उबर जरूर नहीं पा रहे हैं।

खारड़ा ग्राम पंचायत के तीन गांवों में मुख्य मार्ग सूने नजर आए

दोपहर के करीब सवा 12 बज रहे थे। करीब दो हजार घरों की आबादी वाली ग्राम पंचायत खारड़ा के खारड़ा गांव पहुंचे तो कुछ महिलाएं पानी के मटके लेकर आती नजर आईं। तालाब किनारे कुछ युवक मुंह पर मास्क लगा ताश खेलते नजर आए। गांव का मुख्य मार्ग लगभग सूना था। गलियों में कई घरों के दरवाजे दोपहर में भी खुले मिले। इनमें अधिकतर वे घर थे, जहां हाल ही में मौत हुईं।

फिर हम ग्राम पंचायत कार्यालय पहुंचे। यहां सरपंच प्रतिनिधि भंवरलाल चौकीदार सहित कुछ लोग मिले। चाय के साथ गांव में कोरोना के हालात पर चर्चा की तो सामने आया कि अब गांव में कोरोना कंट्रोल में हैं। सरपंच प्रतिनिधि भंवरलाल ने बताया कि अप्रैल-मई में उनकी ग्राम पंचायत के खारड़ा, गाजनगढ़व सरदाणा भाखर गांव में 19 मौतें हुई। इससे गांव में मानो अभी भी शोक छाया हुआ है। लोग घरों से कम ही निकलते हैं। उन्होंने बताया कि वे खुद गली-गली घूमकर लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने एवं मास्क का उपयोग करने का निवेदन करते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में कई युवाओं की मौत हुई, जो बहुत दुखदायी है।

जवान बेटा खोया है, अब इन पांचों मासूमों का क्या होगा?

खारड़ा गांव में 37 वर्षीय शकुर खान पुत्र पुरखा खान की 11 मई को मौत हो गई। उनकी मौत से पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। इनमें से एक लड़का मानसिक विमंदित है। मृतक की पत्नी व मां की आंखों से अब भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वृद्ध पुरखा खान कहते हैं कि साहब, बेटा था जो मजदूरी कर जैसे-तैसे अपना घर खर्च चलाता था। अब पांचों बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी उनके बूढ़े कंधों पर आ गई है। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर हैं। अब शरीर भी साथ नहीं देता। सरकारी सहायता मिले तो इन मासूमों का जीवन संवर जाए। वे बताते हैं कि शकुर को सप्ताह भर तक तेज बुखार आया, फिर सांसें फूलने लगीं। आखिरकार उसकी मौत हो गई।

हमें क्या पता था कि हमारा लाडला हमें 16 साल की उम्र में छोड़ जाएगा

खारड़ा गांव निवासी सोहनलाल वैष्णव अब भी अपने 16 साल के बेटे की मौत का गम नहीं भूल पाए हैं। 25 मई को उनके लाडले बेटे सुनील की सांस लेने में तकलीफ के कारण मौत हो गई। दूसरा बेटा है, वह भी दिव्यांग है। सोहनलाल ने बताया कि सुनील भी दिव्यांग था। वे उसका खूब ख्याल रखते थे। लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। सुनील की मां तो अब भी अपने बेटे का फोटो देख-देख कर रोती रहती हैं। परिजनों के लाख समझाइश के बाद भी बेटे का फोटो देखते ही उनकी आंखों से आंसू छलक जाते हैं। वे बताते हैं कि सुनील की मौत के बाद पूरे परिवार को भी बुखार आया था।

घर के बाहर अभी भी लगा है कोविड, डू नॉट विजिट का पोस्टर

ढाबर ग्राम पंचायत में दो माह में करीब 35 मौतें हो चुकी हैं। सैंपलिंग करवाई तो कई और संक्रमित सामने आए। ऐसे में ढाबर गांव के कई घरों के बाहर आज भी पोस्टर चस्पा हैं। इन पर लिखा है कोविड, प्लीज डू नोट विजिट। ऐसे पोस्टर गांव की गलियों में कई घरों के बाहर चस्पां मिले। गांव में 18 मई को बाबूलाल घांची की कोरोना से मौत हो गई थी। उनके घर में अभी कई सदस्य पॉजिटिव हैं। इनका स्वास्थ्य ठीक है लेकिन पॉजिटिव होने से उन्होंने खुद को क्वारेंटाइन कर रखा है, ताकि जल्द स्वस्थ हो सकें।

इसी तरह 65 वर्षीय भंवरीदेवी की 2 मई को कोरोना से मौत हो गई थी। परिवार में एक सदस्य जांच में कोरोना संक्रमित मिला। ऐसे में वे पिछले कई दिनों से परिवार के अन्य सदस्यों से दूरी बनाए हुए है तथा खुद को क्वारेंटाइन कर रखा है।

सरपंच प्रतिनिधि बोले- दो माह में 35 से ज्यादा मौत

ढाबर गांव के सरपंच प्रतिनिधि प्रभुदयाल जांगिड़ ने बताया कि गांव में अप्रैल-मई में 35 से ज्यादा मौतें हुई हैं। इनमें कई युवा भी शामिल हैं। गांव में शिविर लगवाया गया है। 149 लोगों की जांच हुई जिसमें 37 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। 50 लोगों की सैंपलिंग करवाई इनमें से 7 कोरोना संक्रमित मिले। जो घरों में क्वारैंटाइन हैं। वे बताते हैं कि मरने वालों की कोरोना जांच नहीं हुई थी, लेकिन ज्यादातर को बुखार-खांसी जरूर थी। सांस फूलने की समस्या भी थी।

प्रशासन की नजर में केवल बाबूलाल ने कोरोना से दम तोड़ा, बाकी मौतों पर सवाल कायम

ढाबर गांव में अप्रैल-मई माह में 36 से ज्यादा मौतें हुई तथा खारड़ा में अप्रैल-मई में 19 मौतें हुई। जिनकी मौत हुई, उनकी कोरोना जांच नहीं हुई थी तथा मौत के बाद प्रशासन ने शवों की कोरोना जांच नहीं करवाई। ढाबर ग्राम पंचायत क्षेत्र में दो माह में हुई 36 मौतों से महज ढाबर निवासी बाबूलाल घांची की कोरोना से मौत होना प्रशासन मान रहा हैं। अब सवाल यह है कि बाकी 54 लोगों की मौत क्या साधारण तरीके से हुई। दो माह में दोनों ग्राम पंचायतों में इतनी मौतें होना क्या महज इतेफाक था। हकीकत है कि ज्यादातर ग्रामीणों ने कोरोना टेस्ट नहीं करवाया नहीं तो इन दोनों ग्राम पंचायतों में कोरोना से मौतों का आंकड़ा ज्यादा होता।

दोनों गांवों में युवाओं की भी बुखार से मौत

खारड़ा गांव में 25 साल की विवाहिता पूजा की मौत हो गई। परिवार के लोगों ने बताया कि वह एकदम ठीक थी। अचानक कुछ दिन बुखार आया और मौत हो गई। इसी तरह केराराम के पुत्र सुजाराम के भी सर्दी खांसी थी। ढाबर में 35 वर्षीय युवक ओमाराम और बाबूलाल भी बुखार और सर्दी खांसी से ही हुई।

ढाबर में कोरोना से एक मौत

मई माह में ढाबर ग्राम पंचायत से कोरोना से सिर्फ ढाबर निवासी बाबूलाल की मौत हुई हैं। खारड़ा में अप्रल-मई में जो मौतें हुई उनमें ज्यादातर वृद्धजन और बीमार थे। कोरोना से कोई मौत नहीं हुई।

– विकास विश्नोई, बीडीओ रोहट, पंचायत समिति

ये देखिए, मौतों का हिसाब

ग्राम पंचायत खारड़ा में अप्रैल-मई में 19 मौतें

तारीख मृतक
14 अप्रैल सुंदरदास (70) पुत्र छोगादास
23 अप्रैल भूरीदेवी (70) पत्नी अन्नाराम
24 अप्रैल कमला (55) पत्नी जीवनसिंह
24 अप्रैल कन्यादेवी पत्नी नारायणराम
28 अप्रैल घीसीदेवी
28 अप्रैल हीरादेवी (49) पत्नी रमेश कुमार
30 अप्रैल मनाराम पुत्र रूघाराम बावरी
30 अप्रैल पूजा (25) पत्नी नैनाराम
30 अप्रैल सुजना पत्नी कनजी
2 मई पारसमल (65) पुत्र पुखाराम
6 मई अणसी देवी (65) पत्नी समाराम
8 मई ढलाराम (70) पुत्र हराराम
9 मई हीरादेवी (45) पत्नी छगनदास
10 मई शोभाराम (65) पुत्र रताराम
11 मई सुखा खां (35) पुत्र पुरखा खां
16 मई सुजाराम (33) पुत्र केराराम
16 मई छोटूसिंह (45) पुत्र रूपसिंह

ग्रामौतें, प्रशासन कोरोना से मान रहा 1 मौत

तारीख मृतक
2 मई पुरुषोत्तम (42) पुत्र पृथ्वीराज
3 मई भंवरीदेवी (65)
4 मई सुगनादेवी (95) पत्नी मूलसिंह
5 मई शेराराम (65) पुत्र राणाराम
6 मई कमलीदेवी (80) पत्नी ढलाराम
7 मई लालाराम (70) पुत्र राऊराम
8 मई धापूकंवर (70) पत्नी गुलाबसिंह
9 मई चंदूणी (45) पत्नी भीखाराम
9 मई गुलाब (60) पत्नी हंसाराम
11 मई वन्नाराम (80) पुत्र शेषाराम
14 मई दाकूदेवी (70) पत्नी मोहनलाल
16 मई भंवरलाल (50) पुत्र मोहनराम
18 मई ओमाराम (35) पुत्र मुन्नालाल
18 मई बाबूलाल (35) पुत्र शेषाराम
20 मई रतनीदेवी (80) पत्नी नानकजी
21 मई नारायणदेवी (65) पत्नी भूराराम
11 मई डूंगरराम (75) पुत्र रामेश्वर
11 मई हीरालाल सैन (70) पुत्र भूराराम सैन
12 मई धापूदेवी (70) पत्नी सुखलाल
14 मई पूखाराम (70) पुत्र वेनाराम

नोट : ढाबर गांव में अप्रैल महीने में कोरोना जैसे लक्षण दिखने वाले 16 लोगों की मौत हुई थी। इस तरह इस गांव में अप्रैल और मई में 36 मौत हुई है।

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