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देवताओं का ‘अपमान’ करने वाले AAP नेता पहुंचे सोमनाथ मंदिर, धक्के मारकर खदेड़े गए

कहते हैं, जब जागो, तभी सवेरा। अक्सर हमने देखा है कि कुछ लोग सनातन संस्कृति पर कीचड़ उछालते हैं और सनातनी हिन्दू अपमान का घूंट पीकर ही रह जाते हैं, लेकिन इस बार कुछ और ही देखने को मिला। आम आदमी पार्टी के एक नेता का वीडियो कुछ दिन पहले वायरल हुआ था, जहां पर वह ओछी भाषा में हिंदुओं और उनकी संस्कृति के विरुद्ध उलटी सीधी बातें कर रहा था। इसके बाद लोगों ने उसे सोमनाथ मंदिर में घुसने से ही मना कर दिया।

जी हाँ, आपने ठीक सुना। एकजुटता की एक अनुपम मिसाल पेश करते हुए हिन्दू विरोधी नेता गोपाल इटालिया को लोगों ने गुजरात के सुप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में घुसने ही नहीं दिया। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, “सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने पहुंचे आप नेता गोपाल इटालिया का हिंदू समाज के लोगों ने विरोध किया। पुजारी व कथावाचकों के खिलाफ पूर्व में दिए गए उनके बयानों को लेकर कुछ लोग नाराज हैं। विरोध को देखते हुए इटालिया मंदिर के बाहर से ही कार में बैठकर रवाना हो गए। इस बीच आप के गुजरात अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने हिंदू समाज से माफी मांगी है। हिंदू परंपरा व कथा वाचकों के खिलाफ अपने बयानों के लिए उन्होंने खेद जताया है।”

लेकिन गोपाल ने ऐसा भी क्या किया कि हिंदुओं ने उनका ऐसा सामाजिक बहिष्कार किया? ऐसा भी क्या उसने कहा जिसके कारण गुजरात में हिन्दू उसके विरुद्ध भड़के हुए हैं? दरअसल, पिछले कुछ दिनों से गोपाल की कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें कहीं तो जनाब सनातन संस्कृति को अपशब्द कह रहे हैं, तो कहीं वे भगवान विष्णु के रूप सत्यनारायण के पूजा करने के लिए हिंदुओं और किन्नरों को एक साथ अपमानित कर रहे हैं।

एक वीडियो में तो गोपाल ने यहाँ तक कहा था, “आम आदमी मेहनत करके खाता है, लेकिन पुजारी, कथावाचक, लोगों को भविष्य बताने वाले लोग बैठे-बैठे जनता को ठगते हैं। कथावाचक व पुजारी आम आदमी को धर्म का डर दिखाते हैं तथा उन से पैसे ऐंठते हैं। समाज में हर व्यक्ति मेहनत से कमाकर खाता है, लेकिन पुजारी, कथा वाचक आदि लोग धर्म का धंधा करते हैं। सत्यनारायण की कथा में यही लोग उल्टे सीधे कथाएँ सुनाते हैं और लोग किन्नर की तरह ताली बजाते हैं।”

बस, इसी बात पर कई हिन्दू भड़के हुए हैं। जब पता चला कि यही गोपाल इटालिया सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने आए हैं , तो लोगों के क्रोध का कोई ठिकाना ही नहीं रहा। सनातन संस्था ‘हिन्दू समाज’ के नेतृत्व में कई लोगों ने सोमनाथ मंदिर के बाहर गोपाल के आगमन के विरोध में नारेबाज़ी की और प्रदर्शन भी किए। स्थिति ऐसी हो गई कि गोपाल को खाली हाथ ही सोमनाथ मंदिर से वापिस लौटना पड़ा।

लेकिन गोपाल इतने पे नहीं रुके। कहने को महोदय ने माफी मांगने का नाटक अवश्य किया, लेकिन कुछ ही देर बाद जनाब ने शिकायत की कि सोमनाथ में जो कुछ भी उनके साथ हुआ है, वो भाजपा के इशारे पर उनके साथ किया गया है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि गोपाल शायद ही इस घटना से कोई सीख लेने वाले हैं। हालांकि, जिस प्रकार से सनातन समाज के अनुयाइयों ने ऐसे निकृष्ट व्यक्तियों के विरुद्ध एकजुटता दिखाई, उससे स्पष्ट होता है कि उम्मीद अभी बाकी है।

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