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बेहद दिलचस्प है ATM की खोज की कहानी, जानकर आपको भी होगा गर्व

बाप बड़ा न भैय्या, सबसे बड़ा रुपैया।  जी हाँ आज पैसा ही हमारी सबसे बड़ी जरुरत बन गया है। आज वक्त बेवक्त पैसे की ज़रूरत पड़ने पर ATM मशीन ही है जो हमें किसी भी वक़्त मांगने पर पैसा दे देती है।  बैंकों में लोगों की आवाजाही को कम करने के लिए और अपने ग्राहकों को सुविधा देनें के लिए, प्रत्येक बैंक ने जगह जगह पर अपनी ATM मशीनें लगा रखीं हैं। अब सवाल ये उठता है :

कब,कैसे और क्यों बनीं ATM मशीन

दरअसल इस मशीन के अस्तित्व में आने की कहानी भी न्यूटन के सेब गिरने की कहानी जैसी ही है। जॉन शेपर्ड बैरन नामक एक व्यक्ति को जब अचानक पैसों की आवश्यकता पड़ी तब तक बैंक बंद हो चुके थे।  इस घटना ने निराश बैरन के दिमाग में खलबली मचा दी।  बैरन सोचने लगा की जब दूध की वेंडिंग मशीन से दूध और चॉक्लेट की मशीन से चॉक्लेट निकल सकता है तो पैसे क्यों नहीं निकल सकते। अब क्या था अपनी ज़िद का पक्का और जुझारू स्वाभाव वाला जॉन बैरन भीड़ गया महान वैज्ञानिक आर्किमिडीज़ की तरह उस मशीन को बनाने के प्रयासों में। आखिरकार एक दिन वह मशीन बन ही गयी जो ग्राहक का सीक्रेट नंबर बताने पर पैसे  देती हो।  जॉन शेपर्ड बैरन ने उस मशीन का नाम रखा “ऑटोमेटेड टेलर मशीन ” यानी की A.T.M.।

कब और कहाँ लगी पहली एटीएम मशीन

निर्माण एवं सम्पूर्ण तकनीकी सुविधाओं के साथ विश्व की पहली ATM  मशीन २७ जून १९६७ को लंदन के बार्कलेज बैंक की शाखा में लगी।

भारत में कब आयी यह मशीन

लंदन में लगने के २० साल बाद और आज से ३० साल पहले यानि की सन १९८७ में यह मशीन भारत में “हांगकांग एंड शंघाई कॉर्पोरेशन बैंक”(HSBC बैंक )की शाखा में लगाई गयी थी।

मशीन के पासवर्ड पिन

जॉन बैरन ने जब पहली मशीन बनाई थी तो उसमें ग्राहक द्वारा ६ अंकों का पासवर्ड डाला जाता था। बैरन की पत्नी को उसके ६ अंकों का नंबर याद रखने में कठिनाई होती थी।  सो अपनी पत्नी के आग्रह पर बैरन ने ग्राहकों का पासवर्ड पिन नंबर ४ अंकों का बना दिया।  जिसका इस्तेमाल हम आज भी करतें हैं।

कहाँ जन्मा था यह महान अविष्कारक

आपको हम गर्व के साथ बताना चाहेंगे की एटीएम मशीन के निर्माता जॉन शेपर्ड बैरन का जन्म भारत के मेघालय, शिलांग में २३ जून १९२५ को हुआ था।  जॉन शेपर्ड बैरन के स्कॉटलैंड निवासी पिता उन दिनों उत्तरी बंगाल के चटगांव पोर्ट में चीफ इंजिनियर थे। हम ऐसे महान वैज्ञानिक को नमन करतें हैं।

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