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ब्लैक फंगस मरीजों पर चमत्कार दिखाया आयुर्वेद, न किसी की आंख निकाली गई और न मौत हुई

अहमदाबाद. गुजरात में भले ही कोरोना पर लगाम कसती हुई दिख रही हो, लेकिन कोरोना से रिकवर हुए मरीजों में मिल रहे मिकोर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस ने हर शहर में हाहाकार मचा रखा है। गुजरात में अब तक 7210 मरीज मिल चुके हैं। करीब 200 की मौत हो चुकी है और 350 की आंखें निकाली जा चुकी हैं। फिर भी रिकवरी रेट 4% से ऊपर नहीं जा पा रहा है।

हर दिन लगने वाले 30 हजार रुपए के इंजेक्शन से मरीजों के करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं और फिर भी सही सलामत लौटने की कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में उम्मीद की किरण बनकर आया है आयुर्वेद। सूरत के एक आयुर्वेद चिकित्सक ने ब्लैक फंगस के 70 मरीजों का उपचार किया। इनमें से एक की भी मौत नहीं हुई और किसी की भी सर्जरी नहीं करनी पड़ी।

यहां तक कि खराब हुई आंखें और जबड़े तक ठीक हो रहे हैं। हालांकि आयुर्वेद चिकित्सक इसे ब्लैक फंगस नहीं कहते। आयुर्वेद में इसके नाम हैं कृमि, कुष्ठ, अस्थि मज्जा गति कुष्ठ, या फिर गलित कुष्ठ अस्थिराय। चिकित्सक का कहना है कि आयुर्वेद के लिए यह बीमारी नई नहीं है। पिछले 3000 साल से इसका इलाज हो रहा है। आयुर्वेद में दवा के साथ परहेज बहुत जरूरी है। तभी पूर्ण इलाज संभव है। इसके इलाज के दौरान ऊंटनी का दूध पीना, कच्चे केले और परवल की सब्जी, लाल चावल, मीठे और खट्टे का सेवन वर्जित है।

विकट है ब्लैक फंगस के हालात

सूरत में ब्लैक फंगस के करीब 1500 मरीज हैं। बुधवार को स्मीमेर अस्पताल में एक की मौत हुई। यहां अब तक 12 की जान जा चुकी है। वहीं सिविल अस्पताल में 18 की जान गई है। दोनों सरकारी अस्पतालों में 30 की मौत हो चुकी है। बुधवार को सिविल में 5 मरीजों की आंखें निकाली गईं। दोनों अस्पतालों में एक-एक नए मरीज भर्ती हुए।

मेडिकल एविडेंस के साथ इलाज कर रहे हैं

जिन भी मरीजों का ब्लैक फंगस का आयुर्वेद से इलाज हो रहा है, उनकी सीटी स्कैन में फंगस की पुष्टि हुई थी। ऐसे भी मरीज हैं, जिन्हें दिखना बंद हो चुका था और इलाज के बाद अब फिर दिखने लगा है। आयुर्वेद डॉक्टर रजनीकांत पटेल (काछड़िया) के अनुसार ऐसे भी केस हैं, जिनमें मात्र 7 दिन में रिकवरी दिखने लगी है। कई मरीजों में 15 दिन में ब्लैक फंगस का बढ़ना बंद हो गया और दर्द-सूजन भी ठीक हो गई।

दवाओं के साथ परहेज बहुत जरूरी है आयुर्वेद में

डॉ. रजनीकांत ने बताया कि हम अभी 70 मरीजों का इलाज कर रहे हैं। 27 अप्रैल को पहला मरीज देखा था। फंगस को नष्ट करने के लिए कई वनस्पतियां हैं, जिनमें विडंग, भल्लातक, उसीर, फलास, सिगरू, चित्र आदि हैं। इसके चूर्ण का धुआं नाक से लेकर मुंह से निकालना और मुंह से लेकर नाक से निकालना होता है। ऐसी ही कुछ वनस्पतियों का इस्तेमाल करते हुए नाक में दवा डाली जाती है। बाकी सभी दवाएं पीने वाली हैं। इससे 50% राहत मिल जाती है, बाकी 50 फीसदी इलाज परहेज से हो जाता है।

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