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ब्लैक फंगस बना मिस्ट्री, वो भी हो रहे शिकार जिनकी नहीं है कोविड हिस्ट्री!

इंदौर. ब्लैक फंगस रहस्य बनता जा रहा है। बिना कोविड हिस्ट्री वालों को भी बीमारी ने चपेट में लेना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञ डॉक्टर गुत्थी सुलझाने में जुट गए हैं कि इस बीमारी की असली वजह क्या है? ऐसे मरीजों को एमजीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा अलग रखकर इलाज के साथ शोध भी किया जा रहा है। एमवायएच में 290 में से करीब 10 फीसदी यानी 25 से ज्यादा मरीज ऐसे आए हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण नहीं हुआ था। इनमें ज्यादातर मरीज 20 से 30 वर्ष के हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज द्वारा इन मरीजों पर शोध कर कारणों का पता लगाया गया है।

इस तरह चल रहा शोध

1 सबसे पहले एंटीबॉडी टेस्ट

इन 25 मरीजों में से सभी का पहले एंटीबॉडी टेस्ट करवाया गया। आशंका थी कि इन मरीजों को पहले सामान्य लक्षण या लक्षण न आने के कारण संक्रमण का पता न चल पाया हो। इस टेस्ट में 50 प्रतिशत ऐसे निकले जिनमें एंटीबॉडी बन चुकी थी।

2 फिर इम्यूनिटी की जांच

जिन मरीजों में एंटीबॉडी नहीं मिली थी, उनमें ब्लैक फंगस के कारण पता लगाने सीडी फोर टेस्ट करवाया गया। इससे इम्युनिटी लेवल पता चलती है। कई मरीजों में एंटीबॉडी नहीं मिली थी, उन सभी का इम्यूनिटी लेवल एक हजार से कम था।

3 अभी तक का निष्कर्ष

इम्यूनिटी लेवल कम होने पर 99 फीसदी मामलों में फंगल इंफेक्शन होने का खतरा रहा है। अस्पताल में भर्ती 290 मरीजों में से 92.7 प्रतिशत मरीज डायबिटीज के शिकार हैं। साथ ही 84.7 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिन्होंने 5 से 10 दिन तक स्टेरॉयड लिए थे।

राहत: 3850 इंजेक्शन आए, 1350 निजी अस्पतालों को भेजे
प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए एंटी फंगल इंजेक्शन की कमी में कुछ राहत मिल सकती है। रविवार को भोपाल 3850 एंटी फंगल इंजेक्शन आए। इनमें से 1350 निजी अस्पतालों को भेज दिए गए हैं, जबकि बाकी 2500 इंजेक्शन सरकारी अस्पतालों में भेजे गए हैं। यह इंजेक्शन मरीजों को अस्पताल के जरिए ही मिलेंगे। ब्लैक फंगस के प्रदेश में करीब 1100 मरीज भर्ती हैं। इनमें लगभग 6०त्न सरकारी अस्पतालों और 40 फीसदी निजी अस्पताल में हैं। मौजूदा मरीजों के अनुपात में प्रति मरीज 3 इंजेक्शन उपलब्ध हो गए हैं। अभी तक ब्लैक फंगस के इंजेक्शन की भारी किल्लत थी। इसके अलावा अभी इंजेक्शन की और खेप आना है। इससे जल्द ही इंजेक्शन की कमी दूर हो सकती है।

सर्जरी को लेकर मरीज भयभीत
सागर में ब्लैक फंगस के शिकार दो मरीजों की आंख निकाले जाने को लेकर अब दूसरे मरीजों में सर्जरी को लेकर डर बैठ गया है। छह मरीज ऐसे हैं, जिनकी सर्जरी करनी पड़ सकती है। मरीज इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। डॉक्टरों ने इन मरीजों की काउंसिलिंग शुरू की है। वर्तमान में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के ३२ मरीज भर्ती हैं। पर्याप्त मात्रा में एंटी फंगल इंजेक्शन नहीं मिलने से इनकी हालत बिगड़ रही है। मरीज को एक दिन में छह इंजेक्शन लगाना जरूरी है, लेकिन मरीज को एक दिन में एक इंजेक्शन ही लग रहा है।

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