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Chaitra Navratri 2021: नवरात्र में हर रंग का अलग-अलग महत्व, ऐसे करे देवी मां को प्रसन्न

सनातन धर्म में नवरात्र को पर्व के रूप में मनाया जाता है। साल में ये पर्व चार बार आता है, जिनमें चैत्र व शारदीय नवरात्र मुख्य जबकि दो अन्य गुप्त नवरात्र होते हैं। इनमें चैत्र नवरात्रि chaitra navratri का प्रारंभ वह दिन होता है, जिस दिन से हिंदुओं का नया साल new year of hindus शुरु होता है। ऐसे में इस बार चैत्र नवरात्रि 2021 का पर्व मंगलवार को 13 अप्रैल से शुरु हो रहा है।

जानकारों के अनुसार प्रत्येक नवरात्र के अलग-अलग महत्व होते हैं। देवी पुराण में कहा गया है कि साल भर में मुख्य रुप से नवरात्र का त्यौहार 2 बार आता है। हिन्दू पंचाग (Hindu Panchang ) के अनुसार चैत्र यानि मार्च-अप्रैल में मां दुर्गा के पहले नवरात्र पर 9 दिन आराधना जाती है, जिन्हें वासंतीय नवरात्र भी कहा जाता है।

वहीं अश्विन मास यानि सितम्बर-अक्टूबर में आने वाले नवरात्र को भी मुख्य नवरात्रों में माना जाता है, जिसे शारदीय नवरात्र के नाम से जानता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जहां नवरात्रि Navratra के कुछ नियम होते हैं, वहीं इस समय आपके द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों के रंगों का भी अत्यधिक महत्व होता है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार वहीं यदि किन्हीं कारणोंवश आप नवरात्रि के शुरूआती दिनों में इन रंगों के कपड़े नहीं पहने तो भी आखिरी दिनों में ऐसे वस्त्र धारण कर सकते हैं, जिससे देवी मां की आप पर कृपा बनी रह सकती है।

प्रत्येक वर्ष नवरात्रि के पहले दिन से आखिरी दिन तक का रंग निर्धारण किया जाता है। इसके बाद बाकी 8 दिनों के रंगों के क्रम का चक्र चलता है। हर रंग का अलग-अलग महत्व होता है। प्रत्येक दिन के अनुसार रंगों की सूची व उनका महत्व जानना जरूरी है।

Importance of color in navratri : ऐसे समझें नवरात्रि के 9 दिनों nine nights of navratri के रंग और उनका महत्व…
इन रंगों के कपड़े पहनकर करें पूजा-पाठ

दिन – रंग : महत्व
पहले दिन – ग्रे देवी शैलपुत्री की पूजा के दिन का यह रंग समझदारी और शांति का भी प्रतीक है। इसका मतलब बुराई का नाश करना भी होता है।
दूसरे दिन – नारंगी यह रंग ऊर्जा और खुशी का प्रतीक होने के साथ ही शांति, चमक और ज्ञान का प्रतीक भी माना जाता है।
तीसरे दिन – सफेद यह रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक होने के साथ ही भलाई के लिए भी जाना जाता है।
चौथे दिन – लाल यह ऊर्जा, प्रेम और रचनात्मकता के अलावा क्रोध और जुनून के लिए भी जाना जाता है।
पांचवें दिन – नीला यह रंग दैवीय ऊर्जा, बुद्धिमता और श्रेष्ठता का प्रतीक माना जाता है।
छठवें दिन – पीला यह रंग खुशी, ताजगी, चमक और खुशमिजाजी का प्रतीक माना गया है।
सातवें दिन – हरा यह रंग विकास, सकारात्मकता और नई शुरुआत को दर्शाता है।
आठवें दिन – मोरपंखी हरा यह रंग कामना के पूरे होने की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
नौवें दिन – बैंगनी या जामुनी रंग यह रंग सुंदरता, महत्वाकांक्षा और लक्ष्य का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही यह अखंडता का भी प्रतीक माना जाता है।

नवरात्रि में बिलकुल ना करें ये काम –

अगले चंद दिनों में यानि 13 अप्रैल 2021 से चैत्र नवरात्रि Chaitra Navratra की शुरुआत होने जा रही है। सनातन पूजन परंपरा में विश्वास रखने वाले लोग नवरात्र के दौरान उपवास रखते हैं। ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे काम बता रहे हैं, जिन्हें शास्त्रों के मुताबिक नवरात्रि के दौरान एक व्रती के लिए निषेध माना गया है।

1. कलश स्थापना करने या अखंड दीप जलाने वालों को नौ दिनों तक अपना घर खाली नहीं छोडऩा चाहिए।

2. नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को इस व्रत के दौरान दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए।

3. व्रती को नौ दिनों तक नाखून नहीं काटने चाहिए।

4. काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। वैसे तो नवरात्रि में हर दिन के लिए एक विशेष रंग होता है, लेकिन मां भगवती को लाल रंग सर्वाधिक प्रिय होता है।

5. इन दिनों तामसी भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस मदिरा के सेवन से परहेज करें। इसका कारण यह माना गया है कि इनसे काम, क्रोध की भावना बढ़ती है, मन संयमित नहीं रह पाता है।

6. व्रत में खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।

7. किसी का दिल दुखाना सबसे बड़ी हिंसा मानी जाती है। इसलिए ऐसी हिंसा से भी बचना चाहिए।

8. महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पूजन नहीं करना चाहिए।

9. नवरात्रि का व्रत करने वालों को पूजा के दौरान बेल्ट, चप्पल-जूते या फिर चमड़े से बनी चीजें नहीं पहननी चाहिए।

10. वैसे तो सामान्य दिनों में भी कन्याओं को बुरा भला नहीं कहना चाहिए और ना ही उन पर हाथ उठाना चाहिए। लेकिन नवरात्रि के दौरान इस बात का खास ध्यान रखें। कन्याओं में देवी का वास माना जाता है।

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