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कोरोना: तीसरी लहर से अगर बचानी है जान, तो जरूर करें ये 2 काम

लखनऊ, भारत ने कोरोना संक्रमण की पहली लहर के बारे में जब ये बताया था कि सिंतबर 2020 में यह अपने चरम पर रहेगा, तो पूरी दुनिया में इसकी तारीफ हुई थी। भारत ने जिस सफलता के साथ कोरोना संक्रमण के पहले चरण का सामना किया था ऐसे में किसी ने ये नहीं सोचा था कि देश में मार्च 2021 से शुरू हुआ दूसरा लहर इस कदर तबाही मचायेगा। कोरोना संक्रमण के पहले और दूसरे चरण के बीच में में जो बडा अंतर है वो काफी सवाल खडे करता है। आखिर कहां गलती हुई जिसका खामियाजा पूरे देश को इस तरह भुगतना पड़ा। क्या हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह फेल हो चुकी है। क्या कोरोना से बचाव के सारे उपाय करना हमने छोड़ दिया था।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से मची तबाही के लिए किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। जब हम दूसरी लहर के पीक पर पहुंच रहे हैं, तो हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि हमसे कहां गलती हुई ताकि हम आने वाले थर्ड वेव में तबाही से बच सकें। अगर हम इतिहास पर विश्वास करें,तो थर्ड वेव का आना निश्चित है। थर्ड वेव कितना खतरनाक हो सकता है ये हमारी सोसाइटी द्वारा सेकेंड वेव के बाद उठाये गये कदम पर निर्भर करता है।

आइये कुछ सवालों के जबाव जानते हैं जो आगे हमें इस महामारी से बचने में मदद कर सकते हैं :

हमसे कहां गलती हुई?

हमारी सबसे बडी गलती ये रही कि कोरोना वायरस को हमने कमतर आंका और इसके बारे में जो भी जानकारी हमें मिली उसे हमने गंभीरता से नहीं लिया। 18 प्लस के लोगों के हाई रिकवरी रेट और कम मृत्यु दर के कारण लोगों को लगने लगा कि कोरोना वायरस के संक्रमण का लोगों को कम खतरा है। लोगों ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया कि यह वायरस अपने आप को म्यूटेट करता रहता है। सेाशल मीडिया पर भी कोरोना वायरस के बारे में गलत जानकारी दी गयी। कहा गया कि लोगों को इससे डरने की जरूरत नहीं क्योंकि कोविड 19 का इंफेक्शन साधारण कोल्ड और फ्लू के समान होता है। समाज में कुछ ऐसे लोगों का भी ग्रुप था जो मास्क को लेकर लेागों के बीच ये गलतफहमी फैला रहे थे कि मास्क पहनने से फायदे की बजाय नुकसान ज्यादा होता है। अब जब कोरोना वैक्सीन आ गया है, तो लोग इसकी ये कह कर बुराई कर रहे हैं कि यह कम फायदेमंद है और इसका साइड इफेक्ट भी काफी है।

ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपने अतीत से सबक लें। हमें चाहिए कि हम सही जानकारी सही माध्यम से लोगों तक पहुंचाएं ताकि लोग ये समझ सके कि सोशल मीडिया पर दी जाने वाली जानकारी सही नहीं है। अगर हम इतिहास पर विश्वास करें तो थर्ड वेव का आना निश्चित है, इतिहास हमें यह भी बताता है कि सेकेंड वेव भी काफी खतरनाक रहा है। ये सही है कि हम कोरोना को अभी और भी पीक पर देखेंगे। लेकिन वो सेकेंड वेब जैसा खतरनाक नहीं होगा।वैक्सीनेशन किसी भी महामारी को खत्म करने का प्रमुख हथियार है। हम खुशकिस्मत हैं कि इस महामारी के पहले साल में ही हमने वैक्सीनेशन शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया की अफवाहों पर पर विश्वास नहीं करते हुए सभी को अपनी बारी आने पर वैक्सीन जरूर लेना चाहिए।

क्या हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियां उजागर हो गयी हैं?

पूरी दुनिया इस महामारी के लिए तैयार नहीं थी, इंडिया भी उसमें शामिल था। काफी ज्यादा लोग देश में इस महामारी से बीमार होने लगे । इसका कोई सही इलाज भी देश में नहीं था। हमारा हेल्थ सिस्टम बीमारी को पहचानने में भी असमर्थ साबित हो रहा था। इंडिया के जैसी ही स्थिति इटली और अमेरिका की भी थी। किसी ने यह नहीं सोचा था कि भारत में कोरोना संक्रमण का सेकेंड वेव इतनी तबाही मचायेगा और अस्पतालों में ऑक्सीजन सल्पाई एक चुनौती बन जायेगी। जबकि आमदिनों में सभी अस्पतालों में आवश्यकता से अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध रहते हैं। कोरोना ने सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन के लिए संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया। सवाल यह उठता है कि फर्स्ट वेब के समय ही हमें इसकी तैयारी कर लेनी चाहिए थी। ताकि सेकेंड वेव की तबाही से बचा जा सके। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि वायरस सेकेंड वेव में म्यूटेट होकर और ज्यादा संक्रामक और खतरनाक हो जायेगा।

हालांकि सेकेंड वेव ने थर्ड वेव का सामना करने को लेकर इंफ्रास्टक्चर की पूरी तैयारी करवा दी है। हमारे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए यह एक चैलेंज के रूप में होगा जो पिछले एक साल से इसपर पर काम कर रहे हैं। यह जरूरी है कि थर्ड वेव को कम करने में आम जनता इनका सहयोग करे।

क्या हमने अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को पहले ही कमजोर कर लिया था?

हां कर लिया था, क्योंकि सेकेंड वेव के आने की हमें कोई जानकारी ही नहीं थी और पूरा देश लापरवाह हो चुका था. खराब स्वास्थ्य व्यवस्था इसका सबसे प्रमुख कारण रहा। फर्स्ट वेब के कम होते ही लोगों ने कोरोना प्रोटोकाॅल से बचाव के सारे नियम तोड दिये । शादी- विवाह और त्योहरों में अधिक लोगों का शामिल होना आम बात हो गयीं। लोगों ने मास्क पहनना और सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना तक छोड़ दिया। दूसरी लहर के बाद सभी अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं। वैक्सीन और कोरोना पोटोकॉल का पालन ये दो चीजें ऐसी हैं जो हमें कोरोना से बचा सकती हैं। इसलिएए इसकी अनदेखी न करें।डॉ. मनीष वैश्य, ब्रेन ट्युमर सर्जरी एंड ट्रीटमेंट, इंडिया-ब्रेन एंड स्पाइन पीपीएल सर्वाइकल स्पॉन्डोलाइटिस ब्रेन ट्युमर।

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