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In this Nov. 17, 2016 photo, 20-year-old patient Gleisiane Oliveira watches Shitzu dog named Mille be given a treat on her bed at the Support Hospital of Brasilia, Brazil. The animals are the "stars of the project," according to Nayara Brea who coordinates a pet therapy program for patients with advanced cancer, those living with chronic diseases and recovering from trauma. (AP Photo/Eraldo Peres)

इंसानों में मिला कुत्तों का कोरोना वायरस, लेकिन इस बात की मत लें टेंशन!

कैम्ब्रिज (ब्रिटेन)
वैज्ञानिकों ने निमोनिया से पीड़ित कुछ लोगों में कुत्तों में पाए जाने वाले एक नयी तरह के कोरोना वायरस का पता लगाया है। यह कहने, सुनने में भले खतरनाक लग सकता है, लेकिन इसका विश्लेषण करने के बाद लगता है कि इसकी वजह से आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। मलेशिया के सरवाक के एक अस्पताल में आठ लोगों में कुत्तों का कोरोना वायरस पाए जाने के बारे में अत्यधिक सम्मानित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने नैदानिक संक्रामक रोगों से संबंधित विभाग को सूचित किया है।

तो क्या इसका यह मतलब निकाला जाए कि कुत्ते इंसानों में कोरोनावायरस फैला सकते हैं? सबसे पहले स्पष्ट करने वाली बात यह है कि कुत्तों का कोरोना वायरस क्या है। यह जान लेना महत्वपूर्ण होगा कि यह सार्स-कोवी-2, जो वायरस कोविड-19 का कारण बनता है, से काफी अलग है। कोरोना वायरस परिवार को वायरस के चार समूहों में विभाजित किया जा सकता है: अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा कोरोना वायरस।

कुत्तों के कोरोना वायरस पूरी तरह से अलग
सार्स-कोवी-2 बीटा कोरोना वायरस समूह में आता है, जबकि कुत्तों के कोरोना वायरस पूरी तरह से अलग अल्फ़ा कोरोना वायरस समूह से हैं। वैज्ञानिक लगभग 50 वर्षों से कुत्तों के कोरोना वायरस के बारे में जानते हैं। इस अवधि के अधिकांश समय में ये वायरस अपने एक अनजान अस्तित्व के साथ मौजूद रहे और केवल पशु चिकित्सक और कभी-कभी कुत्तों को पालने वाले लोग इनमें रूचि रखते थे।

इन वायरस के इन्सानों को संक्रमित करने के बारे में पिछली कोई जानकारी नहीं है। लेकिन अब अचानक दुनिया में सब तरफ कोरोना वायरस पर सबकी नजर रहने से उन जगहों पर भी कोरोना वायरस की मौजूदगी के निशान मिल रहे हैं, जहां इन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था। हाल ही में लोगों में पाया गया कुत्तों का कोरोनावायरस संक्रमण दरअसल इस दिशा में की जा रही गंभीर खोज का नतीजा था। जिन लोगों को इस खोज का हिस्सा बनाया गया था वह काफी समय पहले ठीक हो चुके थे।

वैज्ञानिक विशेष रूप से सिर्फ कुत्तों के कोरोना वायरस की तलाश नहीं कर रहे थे, शोधकर्ता एक ऐसा परीक्षण विकसित करने की कोशिश कर रहे थे जो एक ही समय में सभी प्रकार के कोरोना वायरस का पता लगा सके – एक तथाकथित पैन-सीओवी परीक्षण। प्रयोगशालाओं में तैयार किए गए वायरस के नमूनों पर परीक्षण के काम करने की पुष्टि के बाद, उन्होंने मलेशिया के एक अस्पताल में भर्ती रहे निमोनिया के 192 रोगियों के नमूनों पर इसका परीक्षण किया। इनमें से नौ नमूनों का परिणाम कोरोना वायरस के लिए पॉजिटिव आया।

रोगियों के नाक और गले के नमूनों की जांच का अध्ययन

इस संबंध में और जांच करने पर पता चला कि उपरोक्त नौ नमूनों में से पांच सामान्य मानव कोरोना वायरस थे जिससे सर्दी जुकाम हो सकता है। लेकिन, आश्चर्यजनक रूप से, चार नमूने कुत्तों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस के थे। इसी अस्पताल के मरीजों की और जांच करने पर चार और पॉजिटिव मरीज सामने आए। कुत्तों में पाए जाने वाले कोरोना वायरसों के बारे में अधिक जानने के प्रयासों के तहत शोधकर्ताओं ने इन सभी आठ मलेशियाई रोगियों के नाक और गले के नमूनों की जांच का अध्ययन किया।

यह जानने के लिए कि क्या कोई जीवित वायरस मौजूद है, प्रयोगशाला में इन नमूनों को कुत्ते की कोशिकाओं में डाला गया। एक ही नमूने से वायरस को अच्छी तरह से दोहराया गया, और वायरस के कणों को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का उपयोग करके देखा जा सकता था। वैज्ञानिक वायरस के जीनोम को अनुक्रमित करने में भी सक्षम थे। विश्लेषण में पाया गया कि कुत्तों में पाया जाने वाला कोरोना वायरस कुछ अलग अल्फ़ा कोरोना वायरस – जिसमें सूअर और बिल्लियां भी शामिल थे – से निकटता से संबंधित था और यह भी पता चला कि इसे पहले कहीं और पहचाना नहीं गया था।

आगे फैलने का कोई सबूत नहीं

अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या मरीजों में निमोनिया के लिए कुत्तों में पाया जाने वाला यह कोरोनावायरस जिम्मेदार था? फिलहाल, हम इस सवाल का जवाब नहीं दे सकते। जांच का हिस्सा बनाए गए आठ में से सात मरीज एक साथ दूसरे वायरस से भी संक्रमित थे, जो या तो एडेनोवायरस, इन्फ्लूएंजा या पैरेनफ्लुएंजा वायरस था। हम जानते हैं कि ये सभी वायरस अपने आप में निमोनिया का कारण बन सकते हैं, इसलिए इस बात की अधिक संभावना है कि ये बीमारी के लिए जिम्मेदार थे। हम कह सकते हैं कि इन रोगियों में मिले निमोनिया का कुत्तों के कोरोना वायरस के साथ संबंध है, लेकिन यह नहीं कह सकते कि सिर्फ यह वायरस ही उनमें निमोनिया का कारण है।

इस बात को लेकर आशंकाएं हैं कि मलेशिया के इन रोगियों में पाया गया कुत्तों का कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं, और अगर ऐसा हुआ तो उसका नतीजा बड़े पैमाने पर बीमारी के प्रकोप के तौर पर सामने आएगा। इस तथ्य को प्रमुखता से उठाने वाले यह स्पष्ट नहीं करते कि इंसानों में संक्रमण के यह मामले दरअसल 2017 और 2018 के हैं। ऐसे में इस स्रोत से कुत्तों के कोरोना वायरस के प्रकोप की संभावना और भी कम हो जाती है क्योंकि बीच के तीन से चार वर्षों में इसके आगे फैलने का कोई सबूत नहीं है।

नए कोरोना वायरसों पर निगरानी जारी रहे

यह ऐसा समय है, जब चारों तरफ कोरोना वायरस की बात हो रही है और इससे जुड़े तमाम तरह के वायरस की खोज की जा रही है और ऐसे में अप्रत्याशित स्थानों से कुछ और पॉजिटिव नमूने मिलने से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इनमें से अधिकांश केवल अध्ययन और जांच तक सीमित होंगे और इसके लिए चिंतित होने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि नए कोरोना वायरसों पर निगरानी जारी रहे और इसका विस्तार हो ताकि भविष्य में अगर कोई नयी तरह का वायरस सामने आए तो हमारे पास उसे पहचानने का हर संभव मौका हो।

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