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COVID-19 : हवा के जरिए फैल रहा ‘कोरोना वायरस’, जानिए क्या कह रहे एक्सपर्ट

नई दिल्ली
कोरोना की दूसरी लहर पहले के मुकाबले अधिक खतरनाक साबित हो रही है। कोरोना वायरस को लेकर इस बार लोगों के मन में पहले की तुलना में अधिक डर समा गया है। कोरोना महामारी की पहली लहर में जहां सिर्फ गंभीर बीमारी वाले लोग ही जान गंवा रहे थे वहीं इस लहर में कम उम्र के लोगों की मौत अधिक हो रही है। स्थिति यह है कि एक ही परिवार के कई-कई सदस्य बीमार पड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि लोगों को अस्पतालों में ना तो बेड मिल रहा है और ना ही इलाज के लिए ऑक्सिजन।

लोगों के मन में बढ़ गया है डर
कोरोना वायरस के हवा में फैलने की स्टडी ने लोगों के मन में डर को और बढ़ा दिया है। एक्सपर्ट्स भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं है कि कोरोना वायरस हवा से नहीं फैलता है। लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि यदि कोरोना वायरस हवा से फैल रहा है तो क्या घरों की खिड़कियां बंद कर लेनी चाहिए।

एक्सपर्ट ने पेश किए कई सबूत
एक्सपर्ट की टीम ने वायरस के हवा से फैलने को लेकर कई सबूत पेश किए हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक वायरस का ट्रांसमिशन आउटडोर (बाहर) की तुलना में इंडोर (अंदर) में ज्यादा होता है और इंडोर में अगर वेंटिलेशन हो तो इसकी आशंका काफी कम हो जाती है। दुनिया भर में कोविड संक्रमण फैलने में सबसे बड़ी भूमिका साइलेंट ट्रांसमिशन की है और यह मुख्य रूप से एयरबोर्न ट्रांसमिशन के संकेत देता है।

देखें लांसेट स्टडी में क्या हुआ खुलासा

  • लांसेट की स्टडी में बताया गया है कि वायरस के सुपरस्प्रेडर इवेंट महामारी को तेजी से आगे ले जाते हैं। इसमें कहा गया है कि ऐसे ट्रांसमिशन का हवा (aerosol) के जरिए होना ज्यादा आसान है बजाय बूंदों के। ऐसे इवेंट्स की ज्यादा संख्या के आधार पर इस ट्रांसमिशन को अहम माना जाता सकता है।
  • लांसेट की हालिया स्टडी में कहा गया है कि कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) का ट्रांसमिशन हवा के जरिए हो रहा है।
  • बिना लक्षण या लक्षण से पहले ऐसे लोगों से ट्रांसमिशन जिन्हें खांसी या छींक ना आ रही हो, उनसे ट्रांसमिशन के कम से कम एक तिहाई मामले हैं और दुनियाभर में वायरस फैलने का यह एक बड़ा जरिया है। इससे हवा के रास्ते वायरस फैलने की बात को बल मिलता है। स्टडी में यह भी कहा गया है कि बोलते वक्त हजारों पार्टिकल पैदा होते हैं और कई बड़ी बूंदें जिससे हवा के जरिए वायरस फैलने का रास्ता खुलता है।
  • वायरस के ट्रांसमिशन (संचार) की दर इंडोर में और उन जगहों में अधिक है, जहां वेंटिलेशन (हवा का संचार) कम है।
  • अस्पतालों और मेडिकल संगठनों के अंदर भी इन्फेक्शन फैला है जहां कॉन्टैक्ट और ड्रॉपलेट से जुड़े कड़े नियमों, जैसे PPE तक का पालन किया जाता है। हालांकि, Aerosol से बचने के लिए कोई तरीका नहीं होता।
  • लैब में SARS-CoV-2 वायरस हवा में मिलने का दावा किया गया है। इस दौरान वायरस 3 घंटे तक हवा में संक्रामक हालत में रहा। कोविड-19 मरीजों के कमरों और कार में हवा के सैंपल में वायरस मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि हवा में वायरस का सैंपल इकट्ठा करना काफी चुनौतीपूर्ण है।
  • लांसेट की स्टडी के मुताबिक, इस बात के सबूत नहीं हैं कि वायरस बड़ी बूंदों या सतहों के माध्यम से फैलता है।
  • अस्पतालों और कोविड-19 के मरीजों वाली इमारतों के एयर फिल्टर्स और डक्ट में वायरस मिला है जहां सिर्फ aerosol पहुंच सकते हैं।
  • अलग-अलग पिंजड़ों में कैद जानवरों में भी ट्रांसमिशन मिला है जो एयर डक्ट से ही जुड़े थे
  • नई रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों ने कोविड-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल में तत्काल बदलाव किए जाने का सुझाव दिया है।
  • इंग्लैंड, अमेरिका और कनाडा के छह एक्सपर्ट्स द्वारा यह रिपोर्ट तैयार की गई है।
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