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रोजाना 6 लाख केस वाली होगी तीसरी लहर, ‘ये लोग’ बनेंगे घातक Covid-22 के सुपर स्प्रेडर

नई दिल्ली : गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका की तुलना में भारत में टीकाकरण की गति बहुत धीमी है। इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर टीकाकरण तेज नहीं किया तो तीसरी लहर में रोजाना 6 लाख नए केस आ सकते हैं। विशेषज्ञ समिति ने आशंका जताई है कि देश में कोविड-19 की तीसरी लहर सितंबर और अक्टूबर के बीच कभी भी आ सकती है। समय रहते टीकाकरण तेज करना होगा।

डेल्टा से खतरनाक कोविड-22
इस बीच, एक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि ‘कोविड-22’ नाम का नया वेरिएंट मौजूदा सबसे घातक डेल्टा वेरिएंट से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। ज्यूरिक में इम्यूनोलॉजिस्ट प्रोफेसर डॉक्टर साई रेड्डी कहना है कि इसकी प्रबल संभावना है कि एक नया वेरिएंट आएगा और हम उससे बचने के लिए वैक्सीन पर निर्भर नहीं रह पाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जिसने वैक्सीन नहीं लगवाई है इसके संपर्क में आता है तो वह ‘सुपर स्प्रेडर’ बन सकता है यानी तेजी से संक्रमण को फैला सकता है। रेड्डी ने कहा कि 12 साल तक के बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जा रही है। लिहाजा ये बच्चे ‘सुपर स्प्रेडर’ का एक बड़ा ग्रुप बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम उच्च स्तरीय एंडीबॉडीज से इसका मुकाबला कर सकते हैं और यही काम बूस्टर डोज करती है।

बूस्टर डोज पर डेटा नहीं: एक्सपर्ट
विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्ण टीकाकरण करवा चुके लोगों को बूस्टर डोज देने पर फैसला करने के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त आंकड़े तैयार नहीं हुए हैं। हालांकि, WHO ने दुनिया भर में टीकों की कमी को देखते हुए कोविड टीकों की बूस्टर खुराकों पर दो महीने तक रोक लगाने की मांग की है।

कोविड वर्कफोर्स के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा, ‘भारत स्थानीय स्तर पर एकत्र वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर बूस्टर खुराक के बारे में फैसला करेगा। देश में अभी इस्तेमाल किए जा रहे टीकों के लिए बूस्टर की जरूरत और समय निर्धारित करने के लिए स्टडी पहले से ही चल रही हैं।’ उन्होंने कहा कि बूस्टर खुराक की जरूरत देश में कोविड संक्रमण के महामारी विज्ञान द्वारा तय की जाएगी।

एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि अभी यह बताने के लिए कोई निश्चित सबूत नहीं है कि जिन लोगों को टीका लग चुका है उन्हें बूस्टर खुराक देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘हमें उन लोगों का भी टीकाकरण करना चाहिए जिन्हें एक भी खुराक नहीं मिली है और वे उच्च जोखिम की श्रेणी में हैं। जैसे-जैसे अधिक डेटा आएगा यह साफ हो सकेगा कि कब और किस प्रकार की बूस्टर खुराक की जरूरत है।’

 

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