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राजेश को प्रशासन ने फोन किया और कहा- राजेशजी नहीं रहे, सरकारी मुआवजा ले जाएं

बीकानेर : मोबाइल की घंटी बजती है, सामने से आवाज आती है आप राजेश यादव जी के यहां से बोल रहे हैं। जवाब “हां” में दिया जाता है। इसके बाद सामने वाला जो कहता है, वो चौंकाने वाला है। फोन करने वाला कहता है, “हम समाज कल्याण विभाग से बोल रहे हैं, कोरोना से राजेश यादवजी की मौत हो गई थी। उनको सरकारी पैकेज मिल सकता है, कृपया आप उनका रिकॉर्ड हम तक पहुंचायें।” अब फोन करने वाले काे क्या पता कि जिससे बात की जा रही है, वो खुद राजेश यादव है। वो भी जिंदा। बाल कल्याण विभाग को मृतकों की सूची हेल्थ डिपार्टमेंट ने दी थी और राजेश खुद इसी डिपार्टमेंट का कर्मचारी है। उसी के विभाग ने मृत मानते हुए नाम समाज कल्याण विभाग को रिपोर्ट भेज दी।

दरअसल, बीकानेर की महाजन सीएचसी पर काम करने वाले राजेश यादव को कोरोना तो हुआ था लेकिन ए सिम्टोमेटिक था। घर पर ही रहते हुए वो कोरोना मुक्त हो गए थे। चिकित्सा विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक वो 29 अक्टूबर को पीबीएम अस्पताल में भर्ती हुए थे और दो नवम्बर को उनकी मौत हो गई। खुद राजेश बताते हैं कि वो कोरोना पॉजिटिव तो हुए लेकिन पीबीएम अस्पताल में भर्ती हुए ही नहीं थे। ऐसा भी नहीं है कि ये राजेश यादव कोई और है क्योंकि एड्रेस उसी का है और मोबाइल नंबर भी।

अस्पताल में भर्ती नहीं, डिपार्टमेंट में मृतकों की सूची में शामिल

इस बारे में पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. परमेंद्र सिरोही ने बताया कि पीबीएम अस्पताल के रिकार्ड में राजेश यादव का नाम नहीं है। वहीं जब चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट में राजेश यादव का नाम है। जहां उसे मृत घोषित किया गया है। राजेश का नाम चिकित्सा विभाग की लिस्ट में कैसे पहुंचा, यह जांच का विषय है। CMHO डॉ. ओ.पी. चाहर ने बताया कि मामले की जांच करवाई जा रही है कि आखिर ये नाम मृतक की सूची में कैसे आया। खास बात यह है कि वो विभाग का ही कर्मचारी है, इसके बाद भी गलती हुई है।

लगातार ड्यूटी पर है राजेश

पिछले छह महीने से राजेश यादव स्वयं लगातार ड्यूटी पर है। अगर उसकी मौत होती तो चिकित्सा विभाग को इसकी सूचना मिलती। विभाग ने रिकॉर्ड भेजने से पहले अपना रिकार्ड भी चैक नहीं किया। वहीं इस मामले में कहीं कोई गड़बड़ी करने की नीयत की भी विभाग जांच कर रहा है।

जांच करवा रहे हैं

इस बारे में सीएमएचओ डॉ. ओ.पी. चाहर ने दैनिक भास्कर को बताया कि मामले की छानबीन करवा रहे हैं। आमतौर पर पीबीएम अस्पताल से यह रिपोर्ट आती है। अगर वहां से नाम नहीं आया है तो हमारे यहां से कैसे जुड़ा है। यह जांच का विषय है।

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