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साइकिल से हर महीने 400 किलोमीटर सफर करता है ये बाप, ताकि 4 साल के बेटे की बच जाए जान

जामताड़ा/गोड्डा
वैसे तो झारखंड का जामताड़ा साइबर ठगी का गढ़ माना जाता है। मगर पिता-पुत्र की दिल छू लेने वाली कहानी भी है। एक पिता अपने बेटे की जान बचाने के लिए हर महीने 400 किलोमीटर का सफर साइकिल से करता है। गोड्डा के मेहरमा प्रखंड के माल प्रतापपुर गांव के दिलीप यादव का बेटा विवेक थैलेसीमिया से ग्रसित है। उसे हर माह एक यूनिट ब्लड की जरूरत होती है। दिलीप के बेटे को जामताड़ा में ब्लड मिल पाता है।

साइकिल से 400 किलोमीटर की सफर
लॉकडाउन में दिहाड़ी मजदूर दिलीप यादव थैलेसीमिया पीड़ित बेटे विवेक कुमार को खून दिलाने के लिए साइकिल पर बैठाकर मेहरमा से गोड्डा, दुमका होते हुए जामताड़ा तक की दूरी तय करते हैं। विवेक का ब्लड ग्रुप ए निगेटिव रहने के कारण उसे खून मिलने में हर बार कठिनाई का सामना करना पड़ता है। मगर बेटे की जान के सामने दिलीप यादव को हर कठिनाई मामूली लगता है। यही कारण है कि बेटे के जन्म के छह माह बाद से ही वह लगातार खून दिलाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

प्रत्येक माह खून नहीं चढ़ाने पर पर बोलचाल, खानपान सभी बंद हो जाता है। झारखंड में लॉकडाऊन लग जाने के कारण वह अपने पुत्र को पिछले दो महीने से साइकिल चलाकर जामताड़ा लेकर जाते हैं। दो दिन जाने में और दो दिन आने में लगता है। इधर से जाने के दौरान वो दुमका के बस स्टैंड पर रात बीताते हैं। कई बार किसी पेड़ के नीचे भी वक्त गुजारना पड़ता है।

पीरपैंती से भागलपुर और फिर दिल्ली
दिलीप यादव के मुताबिक जन्म के करीब पांच माह बाद बच्चे को सर्दी, खांसी, बुखार आने लगा। पीरपैंती और भागलपुर में डॉक्टरों को दिखाने के बाद उन्हें बच्चे को पीएमसीएच पटना ले जाने की सलाह दी गई। फिर उन्होंने सोचा अभी तो भागलपुर से पटना भेजा जा रहा है। अगर पटना में भी खून नहीं मिला तो फिर दिल्ली जाना पड़ सकता है। इसलिए दिलीप यादव ने कर्ज लेकर अपने बेटे को दिखाने दिल्ली चले गए। पहले सफदरगंज अस्पताल में दिखाए। वहां कई माह मुफ्त में खून मिलता रहा।

फिर वहां के डॉक्टरों ने सलाह दी कि मुफ्त में खून यहां बच्चों को ज्यादा दिन नहीं मिलेगा, इसलिए बच्चे को राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करा दीजिए। इसी दौरान वह वहां मजदूरी भी करने लगे। दिलीप ने ढाई साल तक दिल्ली में मजदूरी कर बेटे का इलाज कराया। मार्च 2020 में गांव आ गए। इस दौरान लॉकडाउन लगने के कारण दोबारा दिल्ली नहीं जा सके।

जिला प्रशासन से मदद का भरोसा
मीडिया में खबर आने के बाद जिला प्रशासन ऐक्टिव हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने पीड़ित परिवार की सुध ली। सिविल सर्जन डॉ एसपी मिश्रा ने मीडिया को बताया कि थैलेसीमिया पीड़ित कई मरीजों का यहां इलाज हो रहा है। मरीज के परिजन को चार दिन पहले ब्लड ग्रुप की जानकारी देकर पंजीयन करा लेना है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से सारी व्यवस्था कर दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि मेहरमा के माल प्रतापपुर गांव के पीड़ित मासूम चार वर्षीय विवेक कुमार के बारे में अबतक कोई जानकारी सदर अस्पताल या मेहरमा स्वास्थ्य केंद्र में नहीं दी गई थी। अगर विभाग के संज्ञान में यह मामला होता तो उन्हें जिला अस्पताल में ही इलाज की सारी सुविधाएं मुहैया करा दी जाती।

दिलीप यादव ने बताया कि विवेक के इलाज में दस लाख रुपए की जरूरत है। महागामा विधायक दीपिका पाण्डेय सिंह को भी गंभीर बीमारी योजना के तहत कागजात दिए हैं। अगर वहां से मंजूर हो गया तो आयुष्मान कार्ड से पांच लाख और कुछ मदद समाज के लोगों ने कर दिया तो इसका इलाज गंगाराम अस्पताल दिल्ली में जरूर कराएंगे।

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