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कोरोना को हराया जो साउथ कोरिया मॉडल, उसके भारत में कामयाब होने के कितने % चांस ?

कोरोना वायरस से दुनिया का हर देश घबराया हुआ है। अमेरिका, स्‍पेन, इटली, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों में एक लाख से ज्‍यादा कन्‍फर्म मामले हो चुके हैं। 16 मार्च को वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन के महासचिव ने कहा था कि टेस्‍ट के बिना कोरोना वायरस को रोका नहीं जा सकता। उस वक्‍त तक साउथ कोरिया वैसे कदम उठा चुका था जो शायद अब हर देश को उठाने चाहिए।

साउथ कोरिया में 9 अप्रैल तक कोरोना वायरस के 10,423 कन्‍फर्म मामले थे। वहां पर 204 लोगों की मौत हुई है। मगर जो सबसे सुखद डेटा है, वो है यहां रिकवर हुए लोगों की संख्‍या। साउथ कोरिया ने 6,973 पेशेंट्स को ठीक कर लिया है। उन्‍होंने कोरोना टेस्‍ट फ्री कर दिए। बड़े पैमाने पर किए, मगर लॉकडाउन नहीं किया। अब वहां पर कन्‍फर्म केसेज की संख्‍या में गिरावट देखी जा रही है तो भारत में एक नई बहस छिड़ रही है। कई विपक्षी नेता समेत कुछ लोग ये कह रहे हैं कि भारत में तुरंत कोरोना की मुफ्त जांच होनी चाहिए। अगर यहां भी साउथ कोरिया मॉडल अपनाया गया होता तो लॉकडाउन की जरूरत नहीं पड़ती।

पहले क्‍या थे हालात, अब कैसे बदले?
18 फरवरी के बाद से साउथ कोरिया में कोरोना वायरस के मामले आने शुरू हुए। महीना खत्‍म होते-होते और मार्च शुरू होने तक रोज 500 मामले आने लगे थे। करीब डेढ़ हफ्ते तक यही सिलसिला चला। फिर साउथ कोरिया ने कुछ अहम फैसले किए। सबसे अहम था टेस्टिंग। इसके लिए वहां की चार कंपनियां टेस्‍ट किट्स बनाने में जुट गईं। वहां डेली करीब 22-25000 संदिग्‍धों का टेस्‍ट होता है। साउथ कोरिया अब दूसरे देशों को भी किट्स निर्यात कर रहा है। टेस्‍ट किट्स देश की सरकारी और प्राइवेट, दोनों लैब्‍स में पहुंचाई गई। उन लोगों से टेस्‍ट के लिए आने को कहा गया जिनमें कोरोना के लक्षण है। ये जांच मुफ्त होती है। जो केसेज पॉजिटिव मिलते, उनके कॉन्‍टैक्‍ट में आए लोगों का पता लगाया जाता।

टेक्‍नोलॉजी का भरपूर इस्‍तेमाल
साउथ कोरिया ने कोरोना वायरस के मामलों का पता लगाने के लिए टेक्‍नोलॉजी का खूब इस्‍तेमाल किया। देश के हर स्‍मार्टफोन यूजर्स को एलर्ट भेजने की सुविधा तैयार की गई। किसी कोरोना प्रभावित मरीज का रूट ऑनलाइन अपडेट किया जाता है। हर व्‍यक्ति को कन्‍फर्म केस के पास जाने पर एलर्ट मिलता है। ये एलर्ट कम्‍पलसरी हैं। एप्‍स के जरिए होम क्‍वारंटीन किए गए लोगों को मॉनिटर किया गया। हालांकि प्राइवेसी की वजह से इस कदम का खासा विरोध भी हुआ।

अब कम हो रहे एक्टिव केस
साउथ कोरिया में मार्च के दूसरे हफ्ते से बदलाव दिखने लगा। डेली 100-120 के बीच नए मामले सामने आने लगे। तीसरे सप्‍ताह से यह आंकड़ा घटकर 100 के नीचे आ गया। चौथे हफ्ते और अप्रैल के पहले सप्‍ताह में कुछ-कुछ दिन 50 से कम नए मामले भी सामने आए। इस दौरान एक्टिव केसेज का ग्राफ भी तेजी से नीचे आया है।

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