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गंगा में इस वजह से बहाई जाती हैं अस्थियां, विसर्जन के बाद पहुंचती हैं इस जगह

मृत्यु प्रकृति का अटल सत्य है. इस धरती पर जिसने जन्म लिया है वह एक ना एक दिन मर कर ही रहेगा. गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु पास आती है तब यमराज उन्हें कुछ संकेत देते हैं. यमराज के दो दूत मरने वाले लोगों के पास आते हैं और केवल पापी मनुष्यों को ही यम के दूतों से भय लगता है. अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति को मरने के समय अपने सामने दिव्य प्रकाश दिखता है और उन्हें मृत्यु से भय नहीं लगता.

जो मनुष्य मृत्यु को प्राप्त होने वाला होता है वह बोल नहीं पाता. अंत समय में व्यक्ति की आवाज बंद हो जाती है और उसकी आवाज घरघराने लगती है. ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई उसका गला दबा रहा हो. अंतिम समय में उसे ईश्वर की तरफ से दिव्य दृष्टि प्रदान होती है और वह सारे संसार को एकरूप समझने लगता है. आंखों से उसे कुछ नजर नहीं आता. वह अंधा हो जाता है और उसे अपने आस-पास बैठे लोग भी नजर नहीं आते.

उसकी समस्त इंद्रियों का नाश हो जाता है. वह जड़ अवस्था में आ जाता है यानी हिलने-डुलने में असमर्थ हो जाता है. गरुड़ पुराण में कुछ इस तरह से मौत को परिभाषित किया गया है. मरने के बाद व्यक्ति का रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है. अंतिम संस्कार के बाद उसकी अस्थियां गंगा नदी में विसर्जित की जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गंगा में अस्थियां विसर्जित करने के बाद ये जाती कहां हैं? नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं.

इसलिए गंगा में बहाई जाती हैं अस्थियां

इस सवाल का जवाब कोई नहीं जानता. यहां तक कि वैज्ञानिकों को भी इस सवाल का जवाब नहीं पता. गंगा नदी में हर दिन हजारों लोगों की अस्थियां बहाई जाती है. इतनी अस्थियां बहाने के बावजूद इस नदी को पवित्र माना जाता है. सनातन धर्म की मानें तो व्यक्ति की अस्थियां गंगा में इसलिए बहाई जाती है ताकि मरने के बाद उसकी आत्मा को शांति मिल सके. आपने भी लोगों को कहते सुना होगा कि वह अपने पाप धोने के लिए गंगा नहाने जा रहे हैं.

आपको बता दें, अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां गंगा में इसलिए बहाई जाती है ताकि मरने वाला व्यक्ति पाप मुक्त हो जाए. यदि उसने अपने जीवन में कोई पाप किया होगा तो अस्थियां गंगा में बहाने से वह पाप मुक्त हो जाएगा. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि आखिर अस्थियां विसर्जित होने के बाद जाती कहां हैं?

इस जगह जाती हैं विसर्जित अस्थियां

इस सवाल का जवाब शायद ही आपको पता होगा. बता दें, अस्थियां विसर्जित होने के बाद सीधे हरी विष्णु के चरणों में यानी ‘बैकुंठ’ जाती हैं. वहीं, वैज्ञानिकों के अनुसार, पानी में पारा यानी ‘मर्करी’ मौजूद होता है जो शरीर में मौजूद कैल्शियम और फ़ास्फ़रोस को पानी घोल देता है. इस वजह से यह पानी जीव-जंतुओं के लिए बहुत पौष्टिक हो जाता है.

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