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जयंती विशेष : वो घटना जिससे नाराज होकर धर्म-परिवर्तन कर लिए थे बाबासाहेब ?

संविधान निर्माता, समाज सुधारक और राजनीतिज्ञ भीमराव अंबेडकर को बाबा साहेब के नाम से जाना जाता है. वे स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री और भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार थे. उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और दलितों के खिलाफ सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया. श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया. आज हम आपको बताते हैं कि बाबासाहेब ने आखिर धर्म परिवर्तन क्यों किया था.

डॉ. अम्बेडकर के मित्र रहे अक्षय कुमार जैन की किताब ‘अम्बेडकर स्मृति’ में लिखा है- बम्बई के ही सार्वजनिक तालाब पर डॉ अम्बेडकर जब पानी पीने गए तो कुछ ऊंची जाति के लोग लाठियां लेकर पहले से खड़े थे. इस घटना को लेकर वो कोर्ट गए, जिसमें 10 साल तक केस चला और वो जीत गए. इसके बाद वो हरिजनों के प्रतिनिधि की हैसियत से लंदन गोलमेज सम्मेलन में गए.

वहां उन्होंने हरिजनों के लिए अलग से निर्वाचन करने की व्यवस्था की मांग की. महात्मा गांधी उस बात से बहुत नाराज हुए. लेकिन तत्कालीन भारत सरकार ने 1932 में कम्यूनल अवार्ड देकर उनकी मांग को स्वीकार कर लिया. इसके विरोध में गांधी जी ने पूना में आमरण अनशन किया.

इसी घटना से परेशान होकर अम्बेडकर ने 1934 में घोषणा कि, जिसमें उन्होंने कहा- अब से हिंदुओं से अलग होकर हरिजन अलग धर्म स्वीकार करेंगे. इसके बाद मुस्लिम और सिख समुदाय उनके पास धर्म स्वीकार करने का प्रस्ताव लेकर आए, लेकिन उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया.

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