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15 साल से जंजीरों में कैद है जिंदगी, इलाज के लिए दिव्यांग पिता ने जमीन बेच दी, अब हाथ खाली

जयपुर. राजस्थान में नागौर जिले के आंतरोली कला गांव में एक युवा जिंदगी 15 साल से जंजीरों में जकड़ी हुई है। जंजीरों से बंधा यह युवक मानसिक रूप से बीमार है। इसकी उम्र 33 साल है। युवक का नाम सुरेश कुमार है। सुरेश न बोल सकता है और न सुन सकता है।

सुरेश के पिता ओमप्रकाश शर्मा भी दिव्यांग हैं। ने बताया कि दुनिया का हर पिता अपने पुत्र को खुश देखना चाहता है चाहे उसके लिए पिता को खुद भी क्यों ना बिकना पड़े। चाहे अपना सब कुछ दांव पर क्यों ना लगाना पड़े, लेकिन न तो वो अपने पुत्र को खोना चाहता है और न हीं उसे यूं जंजीरों में जकड़ना चाहता है।

उन्होंने बताया कि अपने पुत्र सुरेश के इलाज के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया है। हालत ये है कि उनके पास अपने बेटे के इलाज के पैसे भी नहीं बचे है। इसलिए पिछले 15 वर्ष से सुरेश को एक कोने में सांकल से बांधकर रखा है ताकि बाहर निकल कर किसी को कोई नुकसान ना पहुंचाए। सुरेश की जिंदगी घर का एक कोना ही हो गया है। उसी जगह वह दैनिक कार्य करता है। पिछले 14 वर्षों से एक ही जगह हो रहा है।

ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि सुरेश चौथी कक्षा की पढ़ाई के दौरान बीच में हीं मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गया। इसके बाद डेगाना, ऋषिकेश जयपुर, जोधपुर, दिल्ली, भीलवाड़ा और आगरा सहित अनेक जगहों पर इलाज के लिए दर-दर भटका, लेकिन कहीं इलाज सफल नहीं हुआ और इस दौरान इलाज के लिए अपनी पुश्तैनी 6 बीघा जमीन थी वह भी बेच दी।

ओमप्रकाश शर्मा के 4 पुत्र थे जिनमें बड़ा पुत्र जो कमाऊ था, वह 2 वर्ष पहले दुनिया छोड़ गया। अब उनके बच्चों की देखभाल ओम प्रकाश शर्मा को करनी पड़ती है। बाकी दोनों लड़के अपने-अपने बीवी-बच्चों के साथ अलग रह रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पहले वे पुणे में पुजारी का काम करते थे लेकिन सुरेश की हालत के बाद वहां से वह गांव चले आए। यहां आने के बाद अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, लेकिन सुरेश की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ है। डेगाना एसडीएम सुनीता 2012 में उनके पास आई थीं और मदद का आश्वासन भी दिया था, लेकिन आज तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है।

ओमप्रकाश ने बताया कि अब उनके पास इलाज के पैसे नहीं हैं और पुत्र का इलाज कराने में पूरी तरह से असमर्थ और लाचार है। अब न कोई जमीन है न कोई धंधा है। पूरी तरह से बेरोजगार है।

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