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कोरोना: हर सोमवार नए मामलों में 15% तक गिरावट, क्या रविवार को वायरस की भी होती है छुट्टी?

टीवी चैनल्स और न्यूज वेबसाइट्स पर सोमवार को खबर थी कि 31 मई को देश में नए कोरोना केस मिलने के आंकड़े में रिकॉर्ड गिरावट आई। कोरोना को ट्रैक करने वाली सरकारी और गैर-सरकारी वेबसाइट्स ने अपने आंकड़े अपडेट किए तो पता चला कि 31 मई को देश में कुल 1 लाख 26 हजार 698 कोरोना के नए मामले मिले। यह रविवार के मुकाबले 17.45% कम थे। ठीक इसी तरह पिछले सोमवार यानी 24 मई को भी कोरोना के आंकड़े में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।

जब आप कोरोना के पुराने आंकड़ों को देखेंगे तो पता चलेगा कि देश में कोरोना शुरू होने से लेकर आज तक हर सोमवार को कोरोना के नए केस मिलने का आंकड़ा काफी काम हो जाता है। सतही तौर पर यह खबर अच्छी लगती है, मगर सच कुछ और है।

दरअसल, यह हमारी सरकारी मशीनरी की जादूगरी है। डेटा से साफ पता चलता है कि रविवार को कोरोना जांचने वाला हमारा सिस्टम छुट्टी पर चला जाता है। अब वायरस भले ही पूरी ताकत से फैलता रहे लेकिन सोमवार के डेटा में कोरोना के कदम ठिठकते नजर आने लगते हैं।

सबसे पहले देखते हैं कोरोना की दूसरी लहर के चढ़ने और उतरने के दौरान कैसे यह गड़बड़ी साफतौर पर दिखी…

2020 में पहली लहर के दौरान भी आंकड़ों में रविवार की सुस्ती साफ नजर आई …

रविवार की सुस्ती का असर मंगलवार के डेटा तक पड़ता है

  • RT-PCR टेस्ट की रिपोर्ट आने में 24-48 घंटों का समय लगता है। मतलब यह कि संडे को जांच में हुई सुस्ती सोमवार के डेटा में नजर आती है।
  • दूसरे शब्दों में कहें तो सोमवार को कोरोना कम नहीं होता बल्कि जांच करने वाली मशीनरी सुस्त पड़ जाती है और आंकड़े राहत भरी तस्वीर पेश करने लगते हैं।
  • यही वजह है कि पहली लहर और दूसरी लहर के कमजोर पड़ने के दौरान भी सोमवार के अगले दिन यानी मंगलवार को कोरोना केस बढ़ते नजर आए। पहली लहर के दौरान सितंबर का और दूसरी लहर के मई का डेटा इस बात की पुष्टि करता है।
  • रविवार को जांच में हुई ढिलाई के चलते सोमवार को जांच केंद्रों पर ज्यादा लोग जांच कराते हैं। ज्यादा जांच का मतलब ज्यादा केस मिलना। यह असर मंगलवार के डेटा में नजर आता है।

कोरोना की पहली लहर से ही रविवार को जांच कम होती हैं, जो सोमवार के डेटा में साफ दिखता है

2020 में पहली लहर के दौरान भी रविवार को जांच कम हुईं जो सोमवार को डेटा में नजर आई…

दिलचस्प बात: मौत के आंकड़े पर रविवार-सोमवार का असर नहीं

  • रविवार को कोरोना की जांच में ढिलाई और उसके नतीजे में नए मामले मिलने के आंकड़े में कमी का असर मौत के आंकड़ों पर नजर नहीं आता है।
  • साफ है हर सोमवार को कोरोना के नए केस कम मिलने की सुखद खबर असल में उतनी सुखद नहीं होती, जितनी आंकड़ों में नजर आती है।

ज्यादा जांच यानी ज्यादा केस, इसलिए जांच पर फोकस जरूरी

  • हर सप्ताह रविवार, सोमवार और मंगलवार को कोरोना के नए मामलों के आंकड़ों से यह भी साफ है कि जांच कम होने का सीधा असर कोरोना मामलों के आंकड़ों पर पड़ता है।
  • मतलब यह कि कोरोना की सही घुसपैठ का पता लगाने के लिए सभी राज्यों को ज्यादा से ज्यादा कोरोना जांच पर फोकस करना चाहिए।
  • एक्सपर्ट्स के अनुसार रविवार को राज्यों में कोरोना डेटा की रिपोर्टिंग में ढिलाई का भी असर सोमवार के आंकड़े पर पड़ता है।

अमेरिका और यूरोप में नजर आया वीकेंड इफेक्ट

  • ऐसा नहीं कि कोरोना की जांच ढिलाई का यह ट्रेंड केवल भारत में पाया गया है। अमेरिका और यूरोप के डेटा में भी यह कमी साफ नजर आती है।
  • अमेरिका और यूरोप में तो कोरोना की जांच और नए केस मिलने की रिपोर्टिंग में ढिलाई सिर्फ रविवार को ही नहीं बल्कि शनिवार को भी नजर आती है।
  • दरअसल, पश्चिमी देशों में आमतौर पर दो दिन का वीकेंड होता है। इसका असर कोरोना की जांच पर पड़ता है जो आखिरकार कोरोना के नए मामलों के आंकड़ों पर नजर आता है।
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